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रूसा में बदलाव के लिए गठित कमेटी ने किया मंथन, एचपीयू से एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) में बदलाव के लिए गठित कमेटी की बैठक वीरवार दूसरे दिन भी कमेटी की बैठक आयोजित...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 02:10 AM IST

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) में बदलाव के लिए गठित कमेटी की बैठक वीरवार दूसरे दिन भी कमेटी की बैठक आयोजित हुई। कमेटी के चेयरमैन प्रो. सुनील कुमार गुप्ता ने एचपीयू के डीन ऑफ स्टडीज और परीक्षा नियंत्रक को बैठक में बुलाया। उन्होंने पूछा कि यदि कॉलेजों में समेस्टर सिस्टम को खत्म कर दोबारा से वार्षिक पैटर्न को अपना दिया जाता है तो इससे विश्वविद्यालय की परीक्षा शाखा पर क्या असर पड़ेगा। इससे व्यवस्थाओं को कितने दिनों में सुधारा जा सकता है। इस मुद्दे पर काफी देर तक मंथन हुआ। कमेटी ने एचपीयू से एक सप्ताह में इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वह नए शैक्षणिक सत्र के लिए फिलहाल प्रोस्पेक्टस न छापे। विभाग इसके लिए जल्द ही निर्देश जारी करेगा।

शर्तों की अनदेखी से रुक सकती है ग्रांट: कमेटी का कहना है कि रूसा एक स्कीम है। इसे बंद करना संभव नहीं है लेकिन इसमें सुधार इस तरह करने होंगे ताकि केंद्र से मिलने वाली ग्रांट पर कोई असर न पड़े। कमेटी के कुछ सदस्यों ने कहा कि रूसा लागू करते वक्त कुछ शर्तें तय की गई है। इन शर्तों का पालन करने के बाद ही केंद्र ने ग्रांट जारी की है। ऐसे में बदलाव किया जाता है तो केंद्र से मिलने वाली फंडिंग पर असर पड़ सकता है।

जल्द तैयार होगी रिपोर्ट: गुप्ता: कमेटी के चेयरमैन और एचपीयू के पूर्व कुलपति प्रो. सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि बैठक में कई चीजों पर मंथन हुआ है। जल्द ही कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी। एचपीयू से कुछ क्लेरीफिकेशन मांगी गई है। छात्र संगठनों, शिक्षक संगठनों की राय को ध्यान में रख कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

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30 से पहले सौंपी जाएगी रिपोर्ट

कमेटी का तर्क है कि 30 मई से पहले फाइनल रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी। रूसा में जो बदलाव करने हैं उस पर राज्य सरकार अंतिम फैसला लेगी। 15 जून से कॉलेजों में एडमिशन होनी है। सरकार चाहती है कि रूसा में जो बदलाव करने हैं उसे इसी सत्र से कर दिया जाए। यदि इस साल देरी हुई तो जो छात्र पहले समेस्टर में एडमिशन लेंगे उन्हें अगले तीन साल तक इसी सिस्टम के तहत पढ़ाई करनी पड़ेगी।

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