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हिमाचल में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध, अब जांच के लिए डेढ़ करोड़ से पुलिस मुख्यालय में बनेगी हाईटेक लैब

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 02:10 AM IST

Shimla News - हिमाचल में साइबर अपराधों की जांच के लिए पुलिस हाईटेक लैब स्थापित कर रही है। करीब डेढ़ से दो करोड़ की लागत की यह...

हिमाचल में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध, अब जांच के लिए डेढ़ करोड़ से पुलिस मुख्यालय में बनेगी हाईटेक लैब
हिमाचल में साइबर अपराधों की जांच के लिए पुलिस हाईटेक लैब स्थापित कर रही है। करीब डेढ़ से दो करोड़ की लागत की यह हाईटेक लैब पुलिस मुख्यालय स्थित स्टेट साइबर क्राइम थाना में बनेगी।

आधुनिक लैब बनने से पुलिस के लिए साइबर अपराधों को सुलझाना आसान होगा। अभी हिमाचल पुलिस के पास आधुनिक लैब नहीं है। डिजिटल फ्रॉड और हैकिंग समेत अन्य साइबर अपराधों की जांच के लिए अन्य एजेंसियों की मदद लेनी पड़ती है। अपनी लैब बनने के बाद पुलिस को अन्य एजेंसियों की मदद की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और जांच भी तेजी से कर सकेगी। लैब के लिए डेढ़ करोड़ का बजट स्वीकृत है और इसे स्थापित करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।

पुलिस मुख्यालय स्थित साइबर क्राइम थाना में बनेगी, जांच के लिए नहीं लेनी पड़ेगी अन्य एजेंसियों की मदद

तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध, इसलिए पड़ी जरूरत

हिमाचल में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें डिजिटल फ्रॉड, साइट हैकिंग, सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल समेत अन्य तरह के केस हैं। प्रदेश में डिजिटल फ्रॉड से जुड़े मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले साल ऐसे 316 केस सामने आए थे और लोगों ने इसमें 1 करोड़ 66 लाख 76 हजार रुपए गंवा दिए। सबसे अधिक 73 केस शिमला जिले के थे। 2016 में ऐसे 110 केस सामने आए थे। लोगों को फ्रॉड से बचाने और ऐसे मामलों की जांच के लिए साइबर क्राइम पुलिस थाना में विशेष तौर पर आधुनिक लैब स्थापित की जा रही है। हालांकि, फ्रॉड पर अंकुश लगाना मुमकिन नहीं है, क्योंकि ऐसे अधिकांश फ्रॉड लोगों की अपनी गलती से ही होते हैं, लेकिन लैब की मदद से पुलिस के लिए जांच करने में आसानी होगी। लैब की सहायता से लड़कियों की फेक प्रोफाइल, ईमेल से परेशान करने जैसे मामलों में अपराधी पकड़े जा सकते हैं। अभी तक जांच में सामने आया है कि अपराधी किसी तरह का अपराध करने के बाद फोन स्विच ऑफ कर देते हैं, मगर ईमेल से वे कनेक्ट रहते हैं।

हाईटेक लैब में ट्रेनिंग भी मिलेगी

इस लैब में पुलिस अधिकारियों, एडीए समेत अन्य बड़े अफसरों को साइबर अपराधों की ट्रेनिंग भी मिलेगी। खासकर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हो रहे साइबर अपराधों को कैसे हैंडल करना है, इसके बारे में जानकारी दी जाएगी। इंटरनेट पर खासकर लड़कियां साइबर अपराधों से जूझ रही है। शातिर फेक प्रोफाइल बनाकर सोशल मीडिया पर गलत ढंग से लड़कियों की फोटो प्रसारित करते हैं, जिससे उनकी बदनामी होती है। साइबर थाना में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे अपराधों से किस तरह से लड़कियों को बचाया जा सकता है, इसके बारे में भी जागरूकता लाई जाएगी।

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