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स्कूल और आंगनबाड़ी में सूर्य की रोशनी से पकेगा मिड डे मील खाना

हिमाचल के सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में मिड डे मील (एमडीएम) का खाना सूर्य की रोशनी से पकेगा। राज्य...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 02:10 AM IST
स्कूल और आंगनबाड़ी में सूर्य की रोशनी से पकेगा मिड डे मील खाना
हिमाचल के सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में मिड डे मील (एमडीएम) का खाना सूर्य की रोशनी से पकेगा। राज्य सरकार का उपक्रम हिम ऊर्जा इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों को सोलर डिश और बॉक्स टाइप कुकर मुहैया करवाएगा। इन उपकरणों की खरीद के लिए हिम ऊर्जा 60 फीसदी सब्सिडी भी देगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा तरुण कपूर ने हिम ऊर्जा के अधिकारियों के साथ बैठक की।

उन्होंने हिम ऊर्जा के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह इस मामले को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और प्रारंभिक शिक्षा विभाग के समक्ष उठाए। उन्हें योजना के बारे में पूरी जानकारी दें। राज्य में इस योजना पर सरकार की आेर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें स्कूलों को आेर ज्यादा सब्सिडी मिल सके, इसका मामला केंद्र के समक्ष उठाया जाएगा। प्राइमरी आैर मिडल स्कूलों में शिक्षकों को सबसे ज्यादा टेंशन स्कूल में गैस सिलेंडर के बंदोबस्त करने की रहती है। इसे खरीदने से लेकर स्कूल तक पहुंचाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। सरकारी आैर निजी बसों में सिलेंडर कर्मचारी ले जाने की अनुमति नहीं देते हैं, इसलिए किसी निजी वाहन की ही मदद लेनी पड़ती है।



समय पर काम शुरू न करने वाले प्रोजेक्ट होंगे रद्द

अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा तरुण कपूर ने कहा कि हिम ऊर्जा से प्रोजेक्ट लेकर काम शुरू न करने वाले इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर को नोटिस जारी किए जाएंगे। इनसे पूछा जाएगा कि उन्होंने इस पर काम शुरू क्यों नहीं किया। यदि ये समय पर प्रोजेक्ट निर्माण का कार्य शुरू नहीं करते तो इनके प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हिम ऊर्जा के भविष्य की परियोजनाओं को लेकर रोडमैप तैयार करे। उन्होंने कहा कि बीओटी आधार पर 5 परियोजनाओं को जल्द ही स्थापित किया जाए। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय शर्मा, निदेशक हिम ऊर्जा केएल ठाकुर के अलावा अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

छोटे बिजली उत्पादकों को राहत

हिम-उर्जा के अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी उत्पादकों को बिजली को बेचने में आती है। अब सरकार ने 10 मेगावाट तक के बिजली प्रोजेक्टों से बिजली खरीदना बोर्ड के लिए अनिवार्य कर दिया है। इससे छोटे बिजली उत्पादकों को ग्राहक तलाशने के लिए मशक्कत नहीं करनी होगी।

वन टाइम इन्वेस्टमेंट, फिर बचेगा पैसा

प्रदेश में 16,500 के करीब आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इसके अलावा 15,351 मिडल स्कूल। इनमें रोजाना मिड डे मील के तहत दोपहर का खाना बनाया जाता है। अभी तक सरकार इसके लिए गैस का खर्चा मुहैया करवाती है। यह काफी काॅस्टली पड़ता है। यदि यह विभाग सोलर उपकरण खरीदते हैं तो इसमें वन टाइम इन्वेस्टमेंट है। यानि एक बार खर्चा करने के साथ हर महीने गैस पर होने वाले खर्च को बचाया जा सकता है।

गांव में पूल कर लगा सकेंगे प्लांट | सोलर प्लांट गांव में किसी एक को स्थापित नहीं करना होगा। इसके लिए विभाग की आेर से गांव में एक कॉमन स्थान पर प्लांट स्थापित किया जाएगा। स्कूल का सोलर चूल्हे से लेकर सभी संयंत्र इससे जोड़ा जाएगा। इससे किसी एक पर प्लांट स्थापित करने का बोझ नहीं पड़ेगा।

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