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एसआईटी जिन कॉलेजों में जांच के लिए गई, विजिट का खर्चा उन्हें ही देना होगा

नियमों को ताक पर रखकर चल रहे निजी शिक्षण संस्थानों को सरकार ने एक और झटका दे दिया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद राज्य...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 02:10 AM IST

नियमों को ताक पर रखकर चल रहे निजी शिक्षण संस्थानों को सरकार ने एक और झटका दे दिया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद राज्य सरकार स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के विजिट का पूरा खर्चा भी इन्हीं कॉलेजों से वसूलेंगी। बीते रोज राज्य सचिवालय में शिक्षा सचिव डा. अरुण शर्मा की अध्यक्षता में हुई शिक्षा विभाग की बैठक में ये निर्णय लिया गया है। इन कॉलेजों को इसके लिए बाकायदा नोटिस जारी किए जाएंगे। कमेटी के विजिट के दौरान रहने, गाड़ियों के खर्चे को कॉलेजों से ही वसूला जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चूकी है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश में 35 निजी तकनीकी और कुछ अन्य शिक्षण संस्थानों को बंद करने के आदेश दिए हैं, जबकि 42 शिक्षण संस्थानों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। एफआईआर की प्रक्रिया शुरू की जा चूकी है।

मामले पर आज होगी सुनवाई: कोर्ट ने इन सभी संस्थानों के बारे में एआईसीटीई व एनसीटीई को आदेश दिए कि वह एसआईटी की सिफारिशों पर 6 सप्ताह के भीतर अपनी सिफारिशें कोर्ट को बताए। मामले पर सुनवाई 18 मई को होगी।

यह है पूरा मामला |हाईकोर्ट ने प्रदेश के कुछ शिक्षण संस्थानों द्वारा जाली सर्टिफिकेट जारी करने से जुड़ी खबरों पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के सभी तकनीकी, बीएड और स्वास्थ्य शिक्षण संस्थानों की विस्तृत जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखते हुए कहा कि वह मैनपावर के अभाव इतने बड़े जांच कार्य को अंजाम देने में सक्षम नहीं है वह इस जांच के लिए एसआइटी का गठन करे। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी का गठन करते हुए इसका अध्यक्ष बिहार कैडर के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी ए सी वर्मा को बनाया जबकि सीबीआई के रिटायर्ड उच्च अधिकारी ए के मल्होत्रा, पीसी शर्मा व विजय कुमार को इसका सदस्य बनाया।

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