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100 प्राइमरी स्कूलों में किसी भी छात्र ने नहीं ली एडमिशन, अब होंगे बंद

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मौजूदा शैक्षणिक सत्र में 100 के करीब प्राइमरी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 02:10 AM IST

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मौजूदा शैक्षणिक सत्र में 100 के करीब प्राइमरी स्कूलों में किसी भी छात्र ने एडमिशन नहीं ली है। इनमें जो स्टूडेंट थे वह पासआउट हो चूके हैं। इन स्कूलों में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ अभी भी तैनात है। विभाग इस इंतजार में था कि कोई लेट एडमिशन लेता है तो इस सत्र में इन स्कूलों को चलाया जाएगा। सत्र शुरू होने के तीन महीने बाद जब कोई भी एडमिशन नहीं हुई तो इन स्कूलों को बंद करने करने का निर्णय लिया गया है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने इसकी फाइल मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजी है। निदेशक प्रारंभिक शिक्षा मनमोहन शर्मा ने कहा कि जिन स्कूलों में जीरो एनरोलमेंट हैं उनकी सूची तैयार कर ली गई है। स्कूल बंद करने पर अंतिम फैसला राज्य सरकार लेगी।

बढ़ता जा रहा ड्रॉपआउट: राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। पिछले चार सालों में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1,17,554 लाख छात्र कम हुए हैं। यह आंकड़ा साल दर साल घटता जा रहा है। अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में न पढ़ाकर निजी स्कूलों को तरजीह दे रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013-14 में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या 10,07,196 थी। वर्ष-2017 तक यह संख्या घटकर 8,89,642 रह गई है।

स्कूल मर्ज करने को केंद्र देगा पैसा

जीरो एनरोलमेंट वाले स्कूलों को बंद करने के बाद विभाग कम एनरोलमेंट वाले स्कूलों को भी मर्ज करेगा। केंद्र सरकार ने हिमाचल को इसके लिए मंजूरी दे दी है। दस व इससे कम संख्या वाले स्कूलों में बच्चों को यदि दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया जाता है तो केंद्र सरकार इसके लिए छह हजार प्रत्येक छात्र मुआवजा देगी। इसे छात्रों की ट्रांसपोर्टेशन और अन्य चीजों पर खर्च किया जाएगा।

क्या कहता है नियम| राइट टू एजुकेशन एक्ट (आरटीई) नियमों की धारा 19(2) में स्पष्ट किया गया है कि प्रारंभिक स्कूलों में 60 बच्चों तक दो शिक्षक होना अनिवार्य हैं, जबकि 90 बच्चों के लिए तीन शिक्षक होने चाहिए। 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना भी जरूरी बताया गया है। इसके अलावा दस फीसदी से ज्यादा रिक्त पद भी स्कूल में नहीं होने चाहिए, लेकिन प्रदेश में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

1421 स्कूलों में नहीं हो रहा आरटीई एक्ट का पालन

प्रदेश में 10,734 प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें 1421 स्कूल शिक्षा के अधिकार कानून के नियमों को पूरा नहीं कर रहे हैं। 47 स्कूल तो पूर्व कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम छह माह के दौरान खोले और अपग्रेड किए। इन 1421 स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है। वर्तमान में जेबीटी के 1858, सीएंडवी के 5531, हैडमास्टर के 136 और टीजीटी के 2499 पद रिक्त चल रहे हैं।

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