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5 बीघा तक कब्जों को नियमित करने पर सरकार नहीं जारी कर सकी नोटिफिकेशन

पूर्व सरकार के समय में पांच बीघा तक के कब्जों को नियमित करने की पाॅलिसी विवादों में फंस गई है। पूर्व सरकार के समय...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 02:10 AM IST
पूर्व सरकार के समय में पांच बीघा तक के कब्जों को नियमित करने की पाॅलिसी विवादों में फंस गई है। पूर्व सरकार के समय में इसे कैबिनेट से मंजूरी तो मिल गई थी, लेकिन इसकी अधिसूचना आज तक जारी नहीं हो सकी है। इस मसले पर राज्य के मुख्यमंत्री ने चार दिन पहले तो सीएम ने आेकआेवर में बैठक बुलाई, इसका बाद राज्य के मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने भी राजस्व विभाग के अधिकारियों से स्टेट्स रिपोर्ट ली है, लेकिन इसमें हल कुछ नहीं निकल पाया है। सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार के अधिकारियों की आेर से तर्क दिया जा रहा है कि 2002 में दायर पीटिशन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। अभी तक इसमें ही कुछ फैसला नहीं आया है। ऐसे में राज्य सरकार की आेर से अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए कोई अधिसूचना जारी की जाती है तो इस पर विवाद आेर बढ़ सकता है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने फिलहाल पांच बीघा तक के कब्जाधारियों को राहत देने के लिए फैसले की अधिसूचना पर कोई फैसला न लेने का मन बनाया है।

2002 में कब्जों को नियमित करने को बनी थी पाॅलिसी

राज्य में 2002 में धूमल सरकार में अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए पालिसी तैयारी की थी। उस समय ही राज्य सरकार में इस पालिसी को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दे दी थी। सरकार की इस पालिसी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। अभी तक इस फैसले पर रोक ही लागू है, इस पर हाईकोर्ट की आेर से अन्य कोई फैसला नहीं आया है। राज्य सरकार शीघ्र ही इस मसले पर फैसला शीघ्र देने या सुनवाई की याचिका राज्य हाईकोर्ट में जारी कर सकती है।

पूर्व सरकार के समय में बनी थी उच्चस्तरीय कमेटी

पूर्व सरकार के समय में पहले विधानसभा से वन भूमि के अवैध कब्जाधारियों को राहत देने के लिए पालिसी बनाने का प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद पूर्व राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में कमेटी बनी। कमेटी ने पांच बीघा से कम भूमि के कब्जाधारियों को राहत देने के लिए पालिसी लाने का प्रस्ताव तैयार किया।

इसे कैबिनेट से लेकर हाईकोर्ट में मंजूरी के लिए ले गए। दोनों ही स्थानों से इसके लिए मंजूरी मिल गई, लेकिन पहले से हाईकोर्ट में लगे स्ट्रे के कारण इसकी अधिसूचना जारी नहीं हो सकी।

कब्जाधारियों पर कार्रवाई कर एसआईटी ने सौंपी रिपोर्ट, 1634 बीघा वन भूमि से हटाए 33 हजार 740 पेड़

शिमला जिला के जुब्बल में वन भूमि पर काबिज 13 बड़े कब्जाधारियों को बेदखल करने के लिए बनाई एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष दाखिल की। मामले पर सुनवाई के दौरान एसआईटी की पूरी टीम कोर्ट में मौजूद रही। रिपोर्ट के मुताबिक 1634 बीघा वन भूमि से 33,740 सेब के पेड़ काट दिए है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिए कि वह अतिरिक्त शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट को बताए कि और कितने बड़े बड़े कब्जाधारी वन भूमि पर अभी भी काबिज हैं। हाइकोर्ट ने बड़े कब्जाधारियों से अतिक्रमण हटाने में सरकार की नाकामी के कारण एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने बताया कि उन्हें सौंपी गई, जिम्मेदारी की अक्षरश अनुपालना कर दी गई है। कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी में अतिरिक्त उपायुक्त शिमला देवा श्वेता , पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज डरोह की प्रिंसिपल सौम्या संवाशिवम व चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट आलोक नागर को रखा गया था जबकि वनमंडलीय अधिकारी सीबी ताशीलदार को इस टीम का कॉर्डिनेटर बनाया गया था।

जुब्बल में निकले बड़े कब्जाधारी

एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार जुब्बल उपमंडल के तहत आने वाले पहाड़ गांव के मोतीराम पुत्र पदम सिंह, बबलू सपुत्र मंगत राम व लायक राम पुत्र पदम सिंह की 23 बिघा 13 बिस्वा भूमि से 535 पेड़, इसी गांव के अशोक कुमार पुत्र श्याम लाल, हेमंत ठाकुर पुत्र सोहन सिंह व ज्ञान सिंह पुत्र कर्म सिंह की 60 बीघा भूमि से 1856 पेड़, बर्थाटा गांव के चंपालाल पुत्र चुन्नी लाल, भूपेंदर सिंह पुत्र प्रताप सिंह, रमेश कुमार पुत्र माधु राम व मोहन लाल पुत्र भागमल की 180 बीघा 4 बिस्वा से 1871 पेड़, बर्थाटा व बधाल गांव के ज्ञानचंद पुत्र लच्छीराम, बलबीर धौलटा पुत्र मेघराम, शीशी राम जेटटा पुत्र चेतराम, जोगिंदर किनट्टा पुत्र रामसिंह व सुरेंद्र गुमटा पुत्र प्यारेलाल की 243 बीघा 18 बिस्वा भूमि से 4400 पेड़, बर्थाटा गांव के कुशालचंद पुत्र हीरा सिंह व संत राम पुत्र लज्जा राम की 164 बीघा 10 बिस्वा भूमि से 3387 पेड़, पहाड़ गांव के गोवर्धन पुत्र भगतराम व सुनील पुत्र शामा नंद की 136 बीघा 17 बिस्वा भूमि से 5185 पेड़, इसी गांव के जोगिंदर सिंह पुत्र मंगतराम, अजय सूद पुत्र मस्तराम, बेली राम पुत्र बुद्धि राम, सुनील कुमार पुत्र श्यामानंद की 81 बीघा 4 बिस्वा भूमि से 2544 पेड़ों की प्रूनिंग की गई है।

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