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टेक्नोमैक मामले में संदेह के घेरे में 19 अफसर, विभाग ने सीआईडी से लिए नाम, अब विभागीय कार्रवाई की तैयारी

इंडियन टेक्नोमैक के मामले में आबकारी एवं कराधान विभाग के 19 अफसर संदेह के घेरे में है। विभाग ने सीआईडी से इन अफसरों...

Dainik Bhaskar

May 08, 2018, 02:10 AM IST
इंडियन टेक्नोमैक के मामले में आबकारी एवं कराधान विभाग के 19 अफसर संदेह के घेरे में है। विभाग ने सीआईडी से इन अफसरों की सूची ले ली है और अब इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी है। जानकारी के मुताबिक इन्हें चार्जशीट कर विभाग इनके खिलाफ जांच बिठाएगा। टेक्नामैक कंपनी ने अाबकारी एवं कराधान विभाग को सेल टैक्स के रूप में 600 करोड़ रुपए नहीं चुकाए हैं। हालांकि, टैक्स न चुकाने पर विभाग ने कंपनी की फैक्टरी सील कर रखी है, पर इसका मालिक और प्रबंध निदेशक राकेश शर्मा विदेश भाग चुका है। टैक्स के रूप में 600 करोड़ रुपए 2009 से 2014 तक के हैं।

विभाग के अफसर संदेह के घेरे में इसलिए हैं कि उन्होंने टैक्स असेसमेंट और वसूली में देर किसलिए की। कंपनी ने फैक्ट्री 2008 में शुरू की थी। उसके बाद कंपनी से सेल टैक्स सालाना वसूल किया जाना था, पर अफसर यह नहीं कर पाए। इधर, टेक्नोमैक कंपनी पर जब सेल टैक्स का एक साथ 600 करोड़ का बोझ पड़ गया तो मालिक इस राशि को चुकाने से पीछे हट गया। अगर समय पर टैक्स लिया होता तो यह राशि न फंसती। दूसरी ओर कुछ अफसरों की कंपनी के साथ मिलीभगत की भी आशंका है। कंपनी के निदेशक ने सील फैक्ट्री के अंदर से लाखों का कबाड़ बेचा है। कबाड़ बेचने और प्रोडक्शन के जाली दस्तावेज बनाने के आरोप में सीआईडी ने निदेशक विनय शर्मा 20 मार्च को अरेस्ट किया था। आजकल विनय न्यायिक हिरासत में है। इधर, सीआईडी भी मामले की जांच में जुटी है। हाल ही में सीआईडी ने कंपनी के मालिक के खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी कराया था।

गोलमाल

टेक्नामैक कंपनी ने अाबकारी एवं कराधान विभाग को सेल टैक्स के रूप में 600 करोड़ रुपए नहीं चुकाए हैं

4 साल में सेल टैक्स बढ़कर पहुंचा 2100 करोड़ 600 करोड़ रुपए का यह घपला चार साल में बढ़कर अब 2100 करोड़ पहुंच गया है। 2014 में जब आबकारी एवं कराधान विभाग ने फैक्ट्री सील की थी, तब टैक्स 600 करोड़ आंका था। पेनल्टी जोड़कर अब टैक्स की राशि 2100 करोड़ पार कर चुकी है। टेक्नाेमैक कंपनी ने सिरमौर के माजरा में 2008 में एक फैक्ट्री शुरू की थी, मगर सेल टैक्स न चुकाने पर छह साल के अंदर आबकारी विभाग ने इसे सील कर दिया।

संदेह के दायरे में दो रिटायर्ड अफसर भी मामले में संदेह के दायरे में आए कुल 19 में से दो अफसर रिटायर हो चुके हैं। ये अफसर 2009 से 2015 तक सिरमौर में तैनात रहे हैं। हालांकि, सेवानिवृत के बावजूद विभाग के पास इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का विकल्प खुला है। सेवारत अफसरों की तरह ही विभाग इनके खिलाफ भी नियमित जांच कर सकता है।

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