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राहत तो मिली नहीं, पानी के नए कनेक्शन - कंस्ट्रक्शन के लिए भी रोकी पानी की सप्लाई

शहर में पानी के संकट के बीच शिक्षा मंत्री और स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज ने सोमवार शाम बैठक शुरू की तो उम्मीद...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 08, 2018, 02:10 AM IST

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    शहर में पानी के संकट के बीच शिक्षा मंत्री और स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज ने सोमवार शाम बैठक शुरू की तो उम्मीद जगी कि पानी के इस संकट का कोई हल सामने अाएगा। क्योंकि सुरेश भारद्वाज ने सचिवालय में रखी इस मीटिंग में डीसी शिमला से लेकर कई अफसर शामिल भी हुए। लेकिन शाम तक इस बैठक से किसी राहत की खबर आना तो दूर बल्कि पहले इंतजार कर रहे लोगों को नए कनेक्शन न देने और इन दिनों शहर में अपनी मेहनत की कमाई से मकान बनाने वालों को पानी की सप्लाई पर रोक का फैसला ले लिया गया। शहर में पानी का संकट पहली बार नहीं आया है। शिक्षा मंत्री इस बात से वाकिफ हैं, लेकिन पानी के संकट से बचने के लिए आने वाले दिनों के लिए कोई ठोस योजना देने की बजाय नए कनेक्शन और कंस्ट्रक्शन करने वालों के लिए ही मुसीबत खड़ी हो गई है। बैठक में शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को आदेश दिए है कि शिमला शहर में पेयजल की कमी के दृष्टिगत निर्माण कार्य के लिए दिए पानी के कनेक्शन तुरंत बंद किए जाएं। इसके अलावा पानी के नए कनेक्शनों पर प्रतिबंध लगाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने रोस्टर के आधार पर सभी वार्डों को एक समान पानी की आपूर्ति सुनिश्चित बनाने को कहा है। इसकी निगरानी के लिए निगम को नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए। सभी पेयजल भंडारणों की क्लोरीनेशन सुनिश्चित बनाने के साथ-साथ शिमला शहर के जल स्त्रोतों के सुधार करने के निर्देश दिए।

    सहायक अभियंता से मिले लोग: वहीं, बल्देयां तथा पुजारली पंचायतों से किसान सभा जिला शिमला के अध्यक्ष सत्यवान पुंडीर तथा जिला परिषद सदस्य अनिता के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पीने के पानी की समस्या को लेकर आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता से मिला। बल्देयां पंचायत के सोंल वार्ड से रती राम, मस्त राम, सांवलिया राम आदि ने आरोप लगाया कि भंडारण टैंक से पहले ही एक व्यक्ति को गैर कानूनी तरीके से कनेक्शन देने से आगे के गांव की सप्लाई रुक जाती है। अतः इसे तुरंत बंद करके अन्य जगह से दिया जाए। वहीं सहायक अभियंता कपिल ने खुद दौरा करने व समाधान का आश्वासन दिया।

    सुरेश भारद्वाज ने सचिवालय में रखी इस मीटिंग में डीसी शिमला से लेकर कई अफसर शामिल भी हुए।

    पानी की समस्या पर पार्षदों ने मेयर से मांगा इस्तीफा, कहा-समाधान नहीं कर सकते तो क्यों बैठे हैं

    शिमला | शहर में पेयजल किल्लत से जहां आम जनता परेशान हैं, वहीं पार्षदों ने भी मेयर पर हल्ला बोल दिया है। सोमवार को शहर के कई पार्षद मेयर से मिलने पहुंचे। इस दौरान पार्षदों ने मेयर से समस्या के समाधान की बात कही। पार्षदों ने आरोप लगाया कि निगम का डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम ठीक नहीं है। पानी कम भी आ रहा तो तीसरे दिन सप्लाई हो सकती है। वीआईपी क्षेत्रों में पानी की कमी नहीं है, जबकि आम जनता परेशान हैं। इस दौरान कांग्रेसी पार्षद आनंद कौशल, राकेश चौहान, सुषमा कुठियाला ने पेयजल समस्या को लेकर मेयर का घेराव किया और मूलभूत सुविधाएं न देने पर इस्तीफा मांगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के मंत्रियों के आवासों और शहर के होटल में रोजाना पानी मिल रहा है जबकि शहरवासियों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा। लोग पार्षदों से पानी न आने के बारे में पूछ रहे हैं, जबकि वह कुछ जबाव नहीं दे पा रहे। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समस्या दूर न हुई तो वह आंदोलन करेंगे।

    मेयर कुसुम सदरेट का घेराव करते पार्षद।

    कुछ जगह पर टेंकरों पहुंचाई सप्लाई

    शिमला में चल रही पानी की कमी को देखते नगर निगम प्रशासन ने कुछ जगहों पर टंकरों से पानी की सप्लाई दी। फोटो : अजय भाटिया

    पानी नहीं मिलेगा तो

    कैसे होगा शहर में काम

    अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि शहर के लोगों को पानी नहीं मिलेगा तो भवन निर्माण कार्य कैसे होंगे। शिक्षा मंत्री ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है। वहीं, जिन लोगों को पानी के नए कनेक्शन मिलने थे, इस पर भी रोक लगा दी गई है। शिक्षा मंत्री ने अश्वनी खड्ड से शिमला के लिए पेयजल आपूर्ति संबंधी जानकारी भी अधिकारियों से ली। निगम के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि शिमला स्थित आईजीएमसी प्रयोगशाला तथा पुणे स्थित प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अश्वनी खड्ड का पानी पीने के लिए उपयुक्त पाया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अश्वनी खड्ड से शिमला शहर के लिए पानी की आपूर्ति शीघ्र आरंभ की जाए।

    पेयजल किल्लत पर पूर्व पार्षद ने दिए सुझाव

    शिमला | नगर निगम में चल रही कूड़े की समस्या को लेकर पूर्व एमसी पार्षद सुशांत कपरेट ने हाईकोर्ट का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यदि निगम इसमें हस्तक्षेप न करता तो समस्या और विकराल हो जाती। निगम की नालायकी के चलते ही यह समस्या विकराल हुई है। निगम को सुझाव दिया कि चाबा नाले का पानी भी शिमला शहर को उपलब्ध करवाया जाए। इसके अलावा विद्युत बोर्ड व एमसी आपसी तालमेल बनाए। पंपिंग स्टेशनों में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर उपलब्ध करवाएं।

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