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नई इंडस्ट्री लगाने पर 10 साल तक मिलेगी स्टेट जीएसटी में छूट

राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए उद्योग विभाग ने 2028 तक उद्योगों को एसजीएसटी (स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स)...

Dainik Bhaskar

May 08, 2018, 02:10 AM IST
राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए उद्योग विभाग ने 2028 तक उद्योगों को एसजीएसटी (स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स) में छूट देने की तैयारी की है। इसके तहत उद्योगों को इस अवधि तक जीएसटी का स्टेट शेयर रिंबर्स किया जाएगा। केंद्र सरकार ने हिमाचल सहित पहाड़ी राज्यों के लिए पहले ही औद्योगिक विकास स्कीम शुरू की है।

इसके बाद अब राज्य सरकार ने निवेशकों को हिमाचल लाने के लिए जीएसटी के स्टेट शेयर में अगले दस साल तक छूट देने का प्रस्ताव तैयार किया है। नियमों के तहत सरकार जीएसटी में सीधे छूट नहीं दे सकती, इसलिए इसे रिंबर्स करने का प्रस्ताव तैयार किया है। जीएसटी में दो तरह के टैक्स उद्योगों से लिए जाने हैं। पहले में सीजीएसटी (सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स) केंद्र का हिस्सा है। एसजीएसटी(स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स) स्टेट का शेयर रहेगा। राज्य अपने हिस्से के टैक्स को पूरा या आंशिक किसी भी तरह से रिंबर्स करने का फैसला ले सकता है। इस आधार पर उद्योग विभाग ने इसका पूरा खाका बनाया है। इस प्रस्ताव को आबकारी एवं कराधान विभाग आैर वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेजा है। इन दोनों विभागों की मंजूरी के बाद उद्योग विभाग की आेर से इसे कैबिनेट में लाया जाना है। प्रधान सचिव उद्योग आरडी धीमान ने माना कि सीजीएसटी में उद्योगों को 2028 तक छूट देेने का प्रस्ताव बनाया है। इसे वित्त आैर अन्य संबंधित विभागों के पास मंजूरी के लिए भेजा है।

कई योजनाएं बनी मगर रिजल्ट नहीं दिख रहा था

पूर्व सरकार के समय में हिमाचल में उद्योगों को लाने के लिए कई योजनाएं तैयार की गई, लेकिन इसके रिजल्ट नहीं दिख रहे हैं। पूर्व सरकार के समय में मुंबई, दिल्ली से लेकर देश के नामी शहरों में इंवेस्टर मीट का आयोजन तक किया, लेकिन निवेशक हिमाचल नहीं पहुंचे। अब केंद्र ने हिमाचल को कैपिटल सब्सिडी के साथ एडिशनल इंवेस्टमेंट पर इंसेंटिव देने की स्कीम शुरू की है। इससे सरकार को उम्मीद दिखने लगी है। इसी के तहत सरकार ने अपने हिस्से के टैक्स में छूट देने की तैयारी की है।

वैट के बराबर की मिल सकेगी उद्योगों को छूट

सीजीएसटी (स्टेट गुड्स एवं सर्विस टैक्स) की दर करीब वैट के बराबर रहती है। अगर नए निवेशक आते हैं तो उन्हें अगले 10 साल तक की छूट मिलेगी। जिन उद्योगों को लगे दस साल से कम समय हुआ है, उन्हें अवधि ूपरी होने तक इस छूट का लाभ मिल सकेगा। उद्योगों पर 8 या 5 फीसदी वैट लगता था, लगभग इतनी ही दर से सीजीएसटी लिया जाता है।

रोहित नागपाल | शिमला

राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए उद्योग विभाग ने 2028 तक उद्योगों को एसजीएसटी (स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स) में छूट देने की तैयारी की है। इसके तहत उद्योगों को इस अवधि तक जीएसटी का स्टेट शेयर रिंबर्स किया जाएगा। केंद्र सरकार ने हिमाचल सहित पहाड़ी राज्यों के लिए पहले ही औद्योगिक विकास स्कीम शुरू की है।

इसके बाद अब राज्य सरकार ने निवेशकों को हिमाचल लाने के लिए जीएसटी के स्टेट शेयर में अगले दस साल तक छूट देने का प्रस्ताव तैयार किया है। नियमों के तहत सरकार जीएसटी में सीधे छूट नहीं दे सकती, इसलिए इसे रिंबर्स करने का प्रस्ताव तैयार किया है। जीएसटी में दो तरह के टैक्स उद्योगों से लिए जाने हैं। पहले में सीजीएसटी (सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स) केंद्र का हिस्सा है। एसजीएसटी(स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स) स्टेट का शेयर रहेगा। राज्य अपने हिस्से के टैक्स को पूरा या आंशिक किसी भी तरह से रिंबर्स करने का फैसला ले सकता है। इस आधार पर उद्योग विभाग ने इसका पूरा खाका बनाया है। इस प्रस्ताव को आबकारी एवं कराधान विभाग आैर वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेजा है। इन दोनों विभागों की मंजूरी के बाद उद्योग विभाग की आेर से इसे कैबिनेट में लाया जाना है। प्रधान सचिव उद्योग आरडी धीमान ने माना कि सीजीएसटी में उद्योगों को 2028 तक छूट देेने का प्रस्ताव बनाया है। इसे वित्त आैर अन्य संबंधित विभागों के पास मंजूरी के लिए भेजा है।

...लेकिन मंजूरी देने की प्रक्रिया करनी होगी आसान

राज्य में उद्योगपति मंजूरी की जटिल प्रक्रिया के फेर से परेशान रहते हैं। बहारी निवेशक 118 की मंजूरी के लिए पटवारी से लेकर सचिवालय तक के चक्कर काटते हैं। इसे दूर करने की मांग लगातार उठ रही है, अब कब तक जयराम सरकार इसकी मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाती है। इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

10 लाख बेरोजगारों के लिए उम्मीद

केंद्र आैर राज्य सरकार की आेर से उद्योगों को जो रियायतें दी जा रही है, इससे प्रदेश के दस लाख बेरोजगारों को भी उम्मीद बंधी है। राज्य में तीन लाख के लगभग युवा उद्योगों में सेवाएं दे रहे हैं। पहले के पैकेज के बंद होने के बाद से निवेशकों की संख्या घटी है। अब पैकेज आने के बाद निवेशकों के आने की उम्मीद सरकार आैर युवाआें दोनों को ही दिखने लगी है। हर साल एक लाख से ज्यादा युवा ग्रेजुएट कर बेरोजगारी की कतार में शामिल होते हैं। इसलिए पहाड़ी राज्य में आैद्योगिकरण की जरूरत समय की मांग है।

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