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टेक्नोमैक ने कर्जा लेने को दिए थे 500 करोड़ के फर्जी एफ फॉर्म

बैंकों से कर्जा लेने के लिए टेक्नोमैक कंपनी ने 500 करोड़ के फर्जी एफ फॉर्म दिए थे। इन फेक एफ फार्म की बदौलत कंपनी ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 02:10 AM IST

बैंकों से कर्जा लेने के लिए टेक्नोमैक कंपनी ने 500 करोड़ के फर्जी एफ फॉर्म दिए थे। इन फेक एफ फार्म की बदौलत कंपनी ने दिल्ली समेत कई शहरों के अलग-अलग बैंकों से कर्जा लिया। लेकिन ये पैसा वापस नहीं लौटाया। कर्ज चुकाने से पहले ही कंपनी मालिक राकेश शर्मा विदेश भाग लिया। इस कंपनी पर अलग-अलग बैंकों की करीब 2300 करोड़ की देनदारी है। कंपनी ने 2008 में सिरमौर के माजरा में फैक्टरी लगाकर स्टील बनाया जाता था। फैक्टरी के अंदर 80 से 90 फीसदी प्रोडक्शन होती ही नहीं थी। लेकिन बैंकों से अरबों रुपए कर्ज लेने के लिए कंपनी ने 500 करोड़ रुपए के फर्जी एफ फॉर्म तैयार किए। बैंक भी कंपनी की जालसाजी को पकड़ नहीं पाए। जब आबकारी एवं कराधान विभाग ने सेल टैक्स न देने पर कंपनी की फैक्टरी को सील कर दिया तब बैंक अधिकारियों को इस धोखाधड़ी के बारे में पता चला। जब भी बैंक माजरा स्थित उद्योग का विजिट करते थे, तब प्रोडक्शन अधिक दिखाने के लिए फैक्टरी के बाहर मिट्‌टी की बोरियों के ढेर लगाए जाते थे। अधिकारियों को बताया जाता था कि इसमें उत्पाद तैयार करने के बाद वेस्ट मैटीरियल है।

अब इस केस की जांच के लिए सीआईडी की एक टीम दिल्ली पहुंची है। सीआईडी कर्जा लेने वाले बैंकों से रिकॉर्ड ले रही है। जल्द ही यह टीम दिल्ली से कागजात लेकर शिमला पहुंचेगी। कंपनी के फर्जीवाड़े की जांच सीआईडी 2016 से कर रही है। इस मामले में कंपनी के निदेशक विनय को गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि मालिक पर शिकंजा कसने के लिए भी सीआईडी प्रयास कर रही है। कुछ दिन पहले ही सीआईडी ने मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। अब कंपनी मालिक पर एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों की भी नजर रहेगी।

यह होता है एफ फॉर्मप्रदेश में कंपनी उत्पादन कर जब उत्पाद राज्य से बाहर कहीं दूसरी कंपनी को भेजती है तो इसके लिए कंपनी को एफ फार्म जारी किया जाता है। इस बिक्री को सेल नहीं माना जाता है। सेल माने जाने पर इस पर सेल टैक्स देना पड़ता है, लेकिन अपनी ही यूनिट को ट्रांसफर करने पर टैक्स नहीं लगता है। टेक्नोमैक कंपनी ने इस तरह के हजारों फॉर्म फर्जी जारी किए। हालांकि उत्पादित सामान शिफ्ट ही नहीं किया गया। ऐसे में कंपनी का कारोबार कागजों में तो बढ़ा लेकिन असल में उत्पादन के नाम पर कुछ नहीं किया गया। ये भी बताया जा रहा है कि जिस कंपनी को उत्पाद सप्लाई करना था, वह विदेशी कंपनी थी और कुछ साल पहले बंद भी हो चुकी थी।

सिटी रिपोर्टर | शिमला

बैंकों से कर्जा लेने के लिए टेक्नोमैक कंपनी ने 500 करोड़ के फर्जी एफ फॉर्म दिए थे। इन फेक एफ फार्म की बदौलत कंपनी ने दिल्ली समेत कई शहरों के अलग-अलग बैंकों से कर्जा लिया। लेकिन ये पैसा वापस नहीं लौटाया। कर्ज चुकाने से पहले ही कंपनी मालिक राकेश शर्मा विदेश भाग लिया। इस कंपनी पर अलग-अलग बैंकों की करीब 2300 करोड़ की देनदारी है। कंपनी ने 2008 में सिरमौर के माजरा में फैक्टरी लगाकर स्टील बनाया जाता था। फैक्टरी के अंदर 80 से 90 फीसदी प्रोडक्शन होती ही नहीं थी। लेकिन बैंकों से अरबों रुपए कर्ज लेने के लिए कंपनी ने 500 करोड़ रुपए के फर्जी एफ फॉर्म तैयार किए। बैंक भी कंपनी की जालसाजी को पकड़ नहीं पाए। जब आबकारी एवं कराधान विभाग ने सेल टैक्स न देने पर कंपनी की फैक्टरी को सील कर दिया तब बैंक अधिकारियों को इस धोखाधड़ी के बारे में पता चला। जब भी बैंक माजरा स्थित उद्योग का विजिट करते थे, तब प्रोडक्शन अधिक दिखाने के लिए फैक्टरी के बाहर मिट्‌टी की बोरियों के ढेर लगाए जाते थे। अधिकारियों को बताया जाता था कि इसमें उत्पाद तैयार करने के बाद वेस्ट मैटीरियल है।

अब इस केस की जांच के लिए सीआईडी की एक टीम दिल्ली पहुंची है। सीआईडी कर्जा लेने वाले बैंकों से रिकॉर्ड ले रही है। जल्द ही यह टीम दिल्ली से कागजात लेकर शिमला पहुंचेगी। कंपनी के फर्जीवाड़े की जांच सीआईडी 2016 से कर रही है। इस मामले में कंपनी के निदेशक विनय को गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि मालिक पर शिकंजा कसने के लिए भी सीआईडी प्रयास कर रही है। कुछ दिन पहले ही सीआईडी ने मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। अब कंपनी मालिक पर एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों की भी नजर रहेगी।

सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी फॉर्म के जरिए कई शहराें से कर्जा लेकर नहीं चुकाया

बैंकों का कर्ज कहां खर्च किया, देखेगी ईडीबैंकों से लिए अरबों रुपए का कर्जा कंपनी ने कहां इन्वेस्ट किया, ये मामला अब ईडी देखेगी। ईडी ने सीआईडी से मामले में दर्ज एफआईआर की कापी ले ली है और अब जांच शुरू होने वाली है। संदेह जताया जा रहा है कि कंपनी ने बैंकों से जो कर्जा लिया है, वह मालिक ने विदेश भेजा है। सिरमौर के माजरा में लगाई फैक्टरी के संचालन को लिए लोन को विदेश ट्रांसफर नहीं किया जा सकता था। कंपनी ने कितनी राशि विदेश भेजी, यह ईडी की जांच के बाद ही पता चलेगा। जांच के बाद मालिक के खिलाफ मनी लान्ड्रिंग एक्ट में केस दर्ज किया जाएगा।

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