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उन अफसरों के नाम बताएं, जिन्होंने कब्जे कराए: हाईकोर्ट

शिमला | हाईकोर्ट ने शिमला-कालका हाईवे पर दो साल के अंदर हुए निर्माण के दौरान नियुक्त अफसरों से नाम मांगे हैं।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 02:10 AM IST

शिमला | हाईकोर्ट ने शिमला-कालका हाईवे पर दो साल के अंदर हुए निर्माण के दौरान नियुक्त अफसरों से नाम मांगे हैं। हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव टीसीपी को आदेश दिए दिए कि वे शिमला-कालका हाईवे पर 2015-16 में बने सभी तरह के निर्माण से ताल्लुक रखने वाले अफसरों व कर्मचारियों के नाम अदालत को बताएं। कोर्ट ने कहा कि उन सभी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हाईवे और इसके आसपास अवैध निर्माण होने दिया और कोई कार्रवाई नहीं की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने प्रधान सचिव को हिदायत दी कि 17 मई तक वे कोर्ट को नाम बताएं। अगर वे इस दिन अफसरों और कर्मियों की सूची पेश नहीं करते हैं तो वह स्वयं कोर्ट में उपस्थित रहकर इसका कारण बताएं। कोर्ट ने सभी संबंधित विभागों से पूछा था कि शिमला-कालका हाईवे के दोनों तरफ निर्माण करने की इजाजत किस-किस को दे रखी है। कोर्ट ने विशेषकर बड़ोग बाईपास और उसके नजदीक की सड़क की पूरी जानकारी मांगी थी।

अगली सुनवाई 17 मई को होगी।

राज्य में सड़कों के किनारे हजारों कब्जे

शिमला-कालवा नेशनल हाईवे की नहीं, बल्कि अन्य सड़कों किनारों पर भी लोगों ने अंधाधुंध अवैध तौर पर कब्जे कर रखे हैं। कई मामले कोर्ट में चल रहे हैं। संजौली ढली बाईपास और इसके अासपास अवैध तौर पर कब्जों का मामला कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने अवैध कब्जों को हटाने के संबंधित विभागों को आदेश भी दिए हैं। जुब्बल क्षेत्र में जब सरकार बड़े कब्जाधारकों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही तो कोर्ट को ही एसआईटी गठित करनी पड़ी। इन दिनों हाईकोर्ट की एसआईटी इन बड़े कब्जाधारकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

शिमला | हाईकोर्ट ने शिमला-कालका हाईवे पर दो साल के अंदर हुए निर्माण के दौरान नियुक्त अफसरों से नाम मांगे हैं। हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव टीसीपी को आदेश दिए दिए कि वे शिमला-कालका हाईवे पर 2015-16 में बने सभी तरह के निर्माण से ताल्लुक रखने वाले अफसरों व कर्मचारियों के नाम अदालत को बताएं। कोर्ट ने कहा कि उन सभी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हाईवे और इसके आसपास अवैध निर्माण होने दिया और कोई कार्रवाई नहीं की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने प्रधान सचिव को हिदायत दी कि 17 मई तक वे कोर्ट को नाम बताएं। अगर वे इस दिन अफसरों और कर्मियों की सूची पेश नहीं करते हैं तो वह स्वयं कोर्ट में उपस्थित रहकर इसका कारण बताएं। कोर्ट ने सभी संबंधित विभागों से पूछा था कि शिमला-कालका हाईवे के दोनों तरफ निर्माण करने की इजाजत किस-किस को दे रखी है। कोर्ट ने विशेषकर बड़ोग बाईपास और उसके नजदीक की सड़क की पूरी जानकारी मांगी थी।

अगली सुनवाई 17 मई को होगी।

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