पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Shimla News Municipal Corporation Is Unable To Earn From The Six Places From Which The Treasury Of The Corporation Will Be Filled

जिन छह जगह से भरेगा निगम का खजाना वहीं से कमाई नहीं कर पा रहा नगर निगम

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

नगर निगम शिमला का बजट अाैर रेवन्यू पिछले सालाें की की अपेक्षा साल दर साल घटता ही जा रहा है। साल 2016-17 में माकपा शासित नगर निगम ने अपना बजट पेश िकया गया ताे वह बजट 400 कराेड़ का था जिसमें करीब 25 कराेड़ का सरपल्स बजट दिखाया गया था। वहीं इस साल की बात करे ताे बजट अाधा घट कर रह गया। मेयर सत्या काैंडल ने इस बार 225 कराेड़ का बजट पेश िकया। एेसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि साल दर साल नगर निगम के अाय के स्त्राेत ताे घटे ही है साथ ही बजट में भी कटाैती हुई है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि पहले जाे नगर निगम के इनकम के साेर्स थे वे अब खत्म हुए हैं। वहीं निगम काे जिन स्रोतों से अाय हाेनी थी वे या ताे सरकार के पास विचाराधीन है या फिर नगर निगम उन्हें किन्हीं कारणाें से लागू ही नहीं कर पाया।

प्रॉपर्टीज का किराया ही नहीं वसूल पाया**

कमाई का 30 फीसदी हिस्सा नहीं मिला**

20 करोड़ की होनी थी अाय, टेंडर ही नहीं हुए**

कई सालों से लेने की बात हो रही लेकिन नहीं ले सके**

2 से 10 रुपए प्रति बोतल करने का प्रस्ताव सरकार के पास, मंजूरी नहीं**

10 से 20 पैसे प्रति यूनिट लेना था प्रस्तावित,

नहीं लिया गया

लिफ्ट पार्किंग

टूटीकंडी पार्किंग

ग्रीन फीस

लिकर सेस

पॉवर सेस

जाे प्रोजेक्ट शुरू कर दिए उनसे भी नहीं हाे रही अाय इसके अलावा नगर निगम ने पिछले साल अपनी अाय काे बढ़ाने के लिए जाे साेर्स शुरू िकए थे उनसे अभी तक एक रुपए की कमाई भी नहीं हाे रही। इसमें सबसे पहले कमाई का साेर्स टूटीकंडी की सबसे बड़ी मल्टीस्टाेरी पार्किंग थी। नगर निगम इसे इस मकसद से शुरू िकया था कि यहां से करीबन सालाना 20 कराेड़ की अाय हाेगी। अभी तक इस पार्किंग का टेंडर ही नहीं हाे पाया है। दूसरा बड़ा साेर्स नगर निगम काे टूरिज्म डिपार्टमेंट की लिफ्ट पार्किंग से मिलने वाली 30 फीसदी की अाय थी जाे अाज तक मिली ही नहीं। तीसरा पहली बार नगर निगम ने लीज पर दी गई दुकानाें के किराए वसूलने का प्लान बनाया था लेकिन अभी तक इन दुकानाें से विराेध के चलते किराया लिया ही नहीं जा सका है। एेसे में साफ है कि नगर निगम पिछले पांच सालाें में अपने इनकम के साधनाें काे जेनरेट ही नहीं कर पाया अाैर जाे है भी उनसे भी नगर िनगम काे काेई बड़ा लाभ नहीं हाे पा रहा।

ये हैं अाय के मुख्य स्रोत नगर निगम ने प्रदेश सरकार काे पॉवर सेस, लिकर सेस, ग्रीन फीस का प्रस्ताव भेजा था। इसमें पॉवर सेस काे 10 पैसे प्रति यूनिट से बढ़ाकर 20 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव, लिकर सेस काे 2 रुपए से बढ़ाकर 10 रुपए प्रति बॉटल करने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार काे भेजा गया है। पिछले डेढ़ सालाें से ये मामले प्रदेश सरकार के पास विचाराधीन है। इसमें नगर निगम काे 10 से 12 कराेड़ की सालाना अाय हाेनी है। प्रदेश सरकार ने लिकर सेस काे पूरे प्रदेश में बढ़ाकर 1 रुपए से डेढ़ रुपए कर दिया है। लेेकिन नगर निगम काे हाेने वाली अाय पर प्रदेश सरकार से मंजूरी ही नहीं मिल रही। उसी तरह नगर निगम की अाय का एक बड़ा हिस्सा ग्रीन फीस है। हैरानी की बात है ये टैक्स बाहरी राज्य से अाने वाली गाड़ियाें पर लगना है। लेकिन नगर निगम उसके बाद भी इसे लागू नहीं कर पा रहा। ग्रीन फीस यदि लागू हाेती है ताे इससे नगर निगम काे करीबन 15 से 16 कराेड़ की अाय हाेनी है।
खबरें और भी हैं...