बीएड के लिए रुचि नहीं, खाली सीटों पर फिर काउंसिलिंग, सेशन चले हुए दो महीने

Shimla News - प्रदेश में शिक्षक बनने के लिए युवाअों का रुझान काफी कम हो रहा है। ऐसे में जो बीएड शिक्षण संस्थान चल रहे है, उनके...

Oct 13, 2019, 07:25 AM IST
प्रदेश में शिक्षक बनने के लिए युवाअों का रुझान काफी कम हो रहा है। ऐसे में जो बीएड शिक्षण संस्थान चल रहे है, उनके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। इस बार विवि की ओर से करवाई गई काउंसिलिंग में अभी तक सीटें नहीं भर पाई है। ऐसे में कैसे संस्थानों को छात्र मिलेंगे, इस पर सवाल उठ रहे है। बीएड के नए सत्र शुरू हुए दाे महीने से ज्यादा का समय हाे गया है, इसके बावजूद विवि प्रशासन निजी बीएड काॅलेजाें पर मेहरबान हैं। प्राइवेट बीएड काॅलेजाें का प्रेशर इतना ज्यादा है कि खाली सीटाें काे भरने के लिए अब अाधा सेशन बीत जाने के बावजूद भी काउंसिलिंग करवाई जा रही है। एचपीयू सभागार में 13 अाैर 14 अक्टूबर काे काउंसिलिंग हाेगी। प्रदेश में कुछ निजी बीएड कॉलेज तो ऐसे है, जिनके पास अभी तक 15 से 20 स्टूडेंट ही है। दो वर्ष की बीएड होने के बाद इस तरह की दिक्कतें आई है। अब अाज से फिर से बीएड के लिए काउंसिलिंग करवाई जा रही है। प्रदेश भर में लगभग 72 बीएड कॉलेज है।

अब सिलेक्ट होने वाले स्टूडेंट कैसे कवर करेंगे सिलेबस

बीएड में इसलिए अब दिलचस्पी नहीं






इस बार निजी बीएड काॅलेजाें काे हुअा नुकसान इस बार निजी बीएड काॅलेजाें की मर्जी नहीं चली है। अभी तक निजी बीएड काॅलेजाें की अाेर से अाॅफलाइन छात्राें की एडमिशन ली जाती थी। इसके फायदा उन्हें ये हाेता है कि वह किसी भी जिले के स्टूडेंट काे अपने काॅलेज में एडमिशन दिला देते हैं। जबकि ऑनलाइन में स्टूडेंट अपनी मर्जी से काॅलेज का चुनाव कर सकते हैं। हालांकि, बीएड में प्रवेश के लिए च्वाइस का काॅलेज चुनने की अनुमति दी गई है, लेकिन फिर भी निजी बीएड काॅलेज अपने संस्थानाें में ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट काे एडमिशन दिला देते हैं। अब एेसा नहीं किया जा सकता है। जिस स्टूडेंट ने जिस काॅलेज की फीस जमा करवा दी है, वह दूसरे काॅलेज में प्रवेश नहीं ले सकता हैं।

सीटें फिर खाली रही तो बिना एंट्रेंस वालों को भी दाखिला अब सिलेबस काे पूरा करना भी चुनाैती है। हैरानी की बात यह है कि अगर काेई स्टूडेंट अब एडमिशन लेता है ताे उसका सिलेबस कैसे पूरा हाेगा। दाे महीने के बाद काउंसिलिंग करवाई जा रही है, जबकि कक्षाएं लगातार लग रही हंै। काउंसिलिंग काे करवाने के बाद अगर फिर भी सीटें खाली रहती हैं ताे उन छात्राें काे भी एडमिशन देने की तैयारी है, जिन्हाेंने एंट्रेंस नहीं दिया है। बीएड में ग्रेजुएशन की मैरिट के अाधार पर एडमिशन दी जाएगी। एेसे में प्रशासन ने भी मेहरबानी दिखाते हुए काउंसिलिंग के लिए हामी भरी।

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