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महिला दिवस मनाने से कुछ नहीं हाेगा, महिलाओं काे अपने रूल्स खुद ही बनाने हाेंगे: अाईशी घाेष

एक वर्ष पहले
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महिलाअाें काे अपने रूल्स खुद बनाने हाेंगे। कुछ लाेगाें की अाेर से सब रूल्स महिलाअाें के लिए ही बनाए जाते हैं अाैर उन पर बंदिशें लगाई जाती हैं। एेसे में हम खुद ही अपने रूल्स बना सकती हैं। सभी महिलाएं सक्षम मेंं, महिला दिवस काे सिर्फ एक दिन मनाया जाता है। एक दिन महिला दिवस मनाने से महिलाएं सशक्त नहीं हाेगी। यह कहना है जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष अाईशी घाेष का। वे पहली बार एचपीयू पहुंची अाैर एसएफअाई की अाेर से अायाेजित सेमीनार में छात्राअाें काे संबाेधित किया। उन्हाेंने कहा कि महिला दिवस सिर्फ एक दिन मनाने का दिन नहीं है। आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी समाज में महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है। आज भी हर 29 मिनट में छेड़छाड़ का एक मामला दर्ज होता है। यह दर्शाता है इस पितृ सत्तात्मक समाज में महिलाओं को सिर्फ भोग विलास की वस्तु के रूप में ही देखा जाता है,जो कि आज के समाज की वास्तविकता भी है। महिलाएं एक ओर बराबरी की ओर बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर घर के अंदर भी पितृ सत्तात्मक समाज की झलक देखने को मिलती है।

जेएनयू में हुई हिंसा में अाईशी घाेष काे लगी थी चाेट जेएनयू में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। नकाबपोशों ने छात्र-शिक्षकों को डंडे और लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा था। इस हमले में छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत कई घायल हो गए थे। इसके बाद अाईशी घाेष देशभर में पहचानी जानी लगी। एचपीयू परिसर में रविवार काे जैसे ही वह एसएफअाई के कार्यक्रम में पहुंची, छात्र छात्राअाें ने उनका स्वागत किया।

{शिक्षा से ही लाया जा सकता है बदलाव अाईशी घाेष ने कहा कि शिक्षा ही एक मात्र ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा समाज में बदलाव लाया जा सकता है। लेकिन सरकारें शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने से अपने हाथ पीछे ही करती आई है। अगर इसी तरह से शिक्षा बजट कम होता तो इसका सीधा असर महिलाओं या लड़कियों पर पड़ेगा। स्कूलाें में लगातार ड्रॉप अाउट हाे रहा है। एेसे में हमारी सरकाराें काे पहले छात्राअाें के लिए अच्छे स्कूलाें की व्यवस्था करनी हाेगी।

{महिलाअाें के खिलाफ लगातार बढ़ रही है हिंसा जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष अाईशी घाेष का कहना है कि भारतीय संविधान जो सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है लेकिन सामाजिक बाधाओं के कारण आज भी लिंग के आधार पर भेदभाव होता है। समाज मे पुरुषों को ही प्राथमिकता दी जाती है दूसरी ओर लिंग के नाम पर महिलाओं के साथ भेदभाव होता है। महिलाओं के साथ हिंसा के दर्ज होने वाले मामले बड़ी संख्या में बढ़ रहे है और न दर्ज होने वाले मामले जो सामने आते ही नहीं हर दिन देखने को मिलते है।

_photocaption_एचपीयू में एसएफअाई की अाेर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सेमिनार अायाेजित किया गया। इसमें जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष अाईशी घाेष ने छात्राअाें काे संबाेधित किया।*photocaption*
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