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25 मार्च काे विस घेराव, एसएफअाई ने शुरू िकया स्ट्रीट प्ले अाैर जत्था यात्रा

एक वर्ष पहले
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एसएफआई ने राज्य कमेटी के आह्वान पर जिला शिमला कमेटी ने अारकेएमवी काॅलेज से अपने अभियान की शुरूअात की। 25 मार्च काे विधानसभा घेराव से पहले वीरवार काे कॉलेज से जत्था यात्रा शुरू हुई। इसके अलावा स्ट्रीट प्ले से भी सरकार की शिक्षा विराेधी नीतियाें पर प्रहार किया। एसएफअाई का कहना है कि जत्था शुरू करने का उद्देश्य प्रदेश सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ 25 मार्च को विधानसभा का घेराव कर रही है।

एसएफआई जिलाध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि जत्थे को स्वाधीनता जनवाद समाजवाद के झंडे को फहराते हुए रवाना किया। यह जत्था अारकेएमवी से शुरू होकर सुन्नी कॉलेज, करसोग कॉलेज,आनी कॉलेज ,रामपुर, कुमारसैन, सावड़ा कॉलेज, सीमा कॉलेज, ठियोग कॉलेज, संध्याकालीन विभाग धामी कॉलेज,कोटशेरा कॉलेज और अंत में 25 मार्च को विधानसभा के बाहर ये जत्था खत्म होगा। सरकार का लक्ष्य रहा है कि किसी न किसी तरह से छात्र आंदोलन को खत्म किया जा सके ताकि सरकारें बिना किसी रोक टोक के फीस वृद्धि और छात्र विरोधी निर्णयों को छात्र समुदाय पर थोप सके। 2014 से छात्रों का जनवादी अधिकार चुनने और चुने जाने के अधिकार पर पाबंदी लगा रखी है। इसी का ही परिणाम था कि प्रदेश सरकार ने 2015 में 100 से 2500 फीसदी फीस वृद्धि की।

सरकार कर रही शिक्षा के निजीकरण की कोशिश

एसएफआई जिला अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने अारकेएमवी में बात रखते हुए कहा कि जो प्रदेश की भाजपा सरकार है, वो लगातार छात्रों के विरोध में शिक्षा विरोधी निर्णय लगातार ले रही है। उसके खिलाफ एसएफआई पूरे हिमाचल के अंदर छात्रों को लामबंद करते हुए विधानसभा का घेराव करने जा रही है। प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार शिक्षा का निजीकरण करने की कोशिश कर रही है। प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस साल सत्र का बजट पेश किया है उसके अंदर शिक्षा के लिए लगातार जो शिक्षा के बजट में कटौती की है। उनका कहना है कि जो प्रदेश सरकार ने छात्रों से वादा किया था कि छात्रसंघ चुनाव को बहाल किया जाएंगे, जबकि अभी तक छात्र के लोकतांत्रिक अधिकार को बहाल नहीं किया गया है। इसके साथ साथ देश के अंदर बढ़ रहे नशा माफिया पर राेक नहीं लगाई गई है।

20 मार्च काे सीएम का पुतला फूकेंगे कार्यकर्ता एसएफअाई कार्यकर्ता 20 मार्च को सीएम का पुतला दहन करेंगे। इसके जरिए सरकार को मैसेज पहुंचाया जाएगा कि, अगर मांगों को पूरा नहीं किया गया तो अाने वाले दिनाें में इसका परिणाम सरकार को भुगतना होगा। 23 मार्च को शहीद दिवस पर बड़ी रैली के साथ छात्रों को को 25 मार्च के विधानसभा घेराव के लिए छात्रों को लामबद्ध करेगी। एसएफआई का मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की छात्रों को सुविधाएं मुहैया कराने का कोई इरादा नही है अगर होता तो छात्र मांगों को सुनते हुए इस फीस वृद्धि के प्रस्ताव को वापिस ले चुके होते। विश्वविद्यालय प्रशासन इस तरह के छात्र विरोधी फैसले लेकर छात्रों को लगातार शिक्षा से दूर कर रहा है।

वीरवार काे अारकेएमवी काॅलेज में शिक्षा विराेधी नितियाें के खिलाफ एसएफअाई ने जत्था शुरू किया।
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