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जिस तरफ धंस रहा है रिज, उसी तरफ पानी के टैंकों में पड़ चुकी हैं बड़ी दरारें

Shimla News - अब इसे चाहे रिज धंसने का कारण मानें या फिर लक्कड़ बाजार बस स्टैंड की तरफ कच्ची मिट्टी का हाेना, मगर रिज जिस तरफ से...

Feb 15, 2020, 07:26 AM IST
Shimla News - on the same side the ridge is sinking on the same side there are big cracks in the water tanks

अब इसे चाहे रिज धंसने का कारण मानें या फिर लक्कड़ बाजार बस स्टैंड की तरफ कच्ची मिट्टी का हाेना, मगर रिज जिस तरफ से धंस रहा है, उसी तरह से रिज के नीचे बने टैंकाें में माेटी-माेटी दरारें है। रिज के टैंकाें की दराराें से भी हल्का रिसाव लक्कड़ बाजार बस स्टैंड की तरफ हाे रहा है। लगातार पानी पड़ने से मलबा भी कच्चा पड़ रहा है। जिससे लगातार रिज पर दरारें अा रही है। हालांकि नगर निगम ने एक्सपर्ट से रिज की दराराें काे राेकने के लिए कई प्रयास कर लिए हैं। इसमें रिपाेर्ट का अभी इंतजार है। मगर जब तक लक्कड़ बाजार की तरफ पानी का रिसाव टैंकाें से हाेता रहेगा, तब तक रिज काे बचाने की मुहिम भी कामयाब हाेना मुश्किल है।

बताया जा रहा है कि रिज के टैंकाें में सबसे माेटी दरार लक्कड़ बाजार की तरफ पेड़ के नीचे है। उसके नीचे लक्कड़ बाजार में कई जगह पर छाेटे-छाेटे पानी के रिसाव साफ नजर अाते हैं। रिज के टैंकाें से अगर हल्का रिसाव भी हाे रहा है वह भी नीचे की तरफ निकल रहा है। रिज के नीचे बने टैंकाें की क्षमता 45 लाख लीटर पानी की है। इससे ही शहर के कई एरिया काे पानी की सप्लाई की जाती है। यह टैंक ब्रिटिश काल में बनाए गए हैं, मगर अभी तक इनकी रिपेयर नहीं हाे पाई है।

सफाई के दाैरान हर साल इन दरारों को देखते हैं अधिकारी लेकिन बचाव कब?

{रिज टैंक के अंदर पड़ी दरारें।

पैच वर्क की अाैपचारिकता से तो नहीं बचेगा रिज करीब 9 साल पहले भी 2011 में रिज का एक भाग लक्कड़ बाजार बस स्टैंड की तरफ धंस गया था और कई दुकानें चपेट में आ गई थी। अब एक बार फिर रिज के धंसने से तिब्बतियन मार्केट पर भी एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हर बार सीमेंट का मरहम इससे पहले भी रिज मैदान पर पड़ी दरारों पर लगाया जाता रहा है लेकिन ये सब खानापूर्ति ही होती है। निगम की इस औपचारिकता से ऐतिहासिक रिज मैदान खतरे में है। मरम्मत के नाम पर मैदान की बार-बार खुदाई से रिज के धंसने का खतरा घटने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। रिज मैदान पर अंग्रेजों के जमाने का पेयजल भंडारण टैंक भी है। जहां से पूरे शहर को पेयजल आपूर्ति की जाती है। वर्ष 2011 में रिज के धंसने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 2011 में यहां का बड़ा भू-भाग अपनी जगह से पूरी तरह से बैठ गया था, जिसे बचाने के लिए नगर निगम ने इसका बचाव कार्य आरंभ किया था। वहीं रिज को बचाने का अस्थाई समाधान था जो बरसात के दौरान अक्सर जवाब दे देता है।

सन 1880 में बनाया गया है यह पानी का टैंक शिमला के रिज मैदान के नीचे अंग्रेजों ने 1880 में पानी का टैंक बनाया था। आज भी शिमला शहर को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। टैंकों का निर्माण सीमेंट से नहीं चूना पत्थर से किया गया। टैंक की जल भंडारण क्षमता करीब 45 लाख लीटर है। भंडारण के लिए अलग-अलग चैंबर बनाए गए हैं। शहर के मालरोड, लोअर बाजार, रामबाजार, बस स्टैंड, कृष्णानगर, कैथू, लक्कड़ बाजार, अनाडेल जैसे कोर एरिया में इसी टैंक से पानी की सप्लाई होती है, लेकिन अब इस टैंक अाैर रिज का अस्तित्व खतरे में है।


जब तक नहीं रुकेगा रिसाव, तब तक न रिज न टैंक सेफ

रिज के नीचे बने टैंकाें में हर साल नगर निगम सफाई करवाता है। टैंकाें की सफाई के दाैरान इसमें अाई दराराें काे भी हर साल देखा जाता है। उस समय उन्हें ठीक करने के लिए भी प्लान तैयार किया जाता है। मगर बाद में उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। ना ताे अभी तक यहां पर उन दराराें काे भरा गया है अाैर ना ही कब तक उन्हें दुरुस्त किया जाएगा इस बारे में निगम कुछ प्लान कर पा रहा है। मगर जब तक रिसाव हाेता रहेगा, ना ताे रिज काे बचाने की मुहिम कामयाब हाेगी अाैर ना ही टैंक सुरक्षित हैं।

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