रेणुका के विधायक विनय के खिलाफ विजिलेंस जांच की तैयारी

Shimla News - रेणुका के विधायक अाैर पूर्व कांग्रेस सरकार में सीपीएस रहे विनय कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच करवाने की तैयारी है।...

Nov 10, 2019, 07:22 AM IST
रेणुका के विधायक अाैर पूर्व कांग्रेस सरकार में सीपीएस रहे विनय कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच करवाने की तैयारी है। मामला अवैध रूप से टीडी लेने का है। वन विभाग की अाेर से करवाई गई विभागीय जांच में इसका पता चला है। अब विभाग इस मामले काे जांच के लिए विजिलेंस काे साैंपने जा रहा है। वन विभाग ने फाइल विजिलेंस काे भेजने से पूर्व विभाग के संबंधित अधिकारियों से कमेंट्स मांगे हैं। इसमें पूछा गया है कि जब नियम इजाजत नहीं देते थे ताे उन्होंने कैसे टीडी देने की मंजूरी दी। वन विभाग के कई अाला अधिकारी इस केस में फंस सकते हैं। अाराेप है कि विनय कुमार ने पूर्व कांग्रेस सरकार के समय में धारटीधार क्षेत्र के त्रिमोली नामक स्थान पर मकान बनाने के नाम पर अवैध रूप से शीशम के पेड़ों की टीडी अपने नाम से ली। जबकि उनका यहां पर काेई अधिकार नहीं बनता था, क्योंकि विनय कुमार मूल निवासी माइना बाग के हैं। उनका राशन कार्ड भी माइना बाग का है।

भाजपा ने चार्जशीट में लगाए थे अाराेप

भाजपा ने अपनी चार्जशीट में इस मामले काे उठाया था। राज्य सरकार ने चार्जशीट विजिलेंस काे साैंपी थी। विजिलेंस ने इस पर संबंधित अधिकारियों के कमेंट्स मांगे थे। विभाग ने इसकी विभागीय जांच करवाई। जिसमें पता चला है कि इस मामले में अनियमितता हुई है।

वन विभाग ने अभी तक 3 मामले भेजे हैं जांच के लिए

वन विभाग ने विजिलेंस काे जांच के लिए अभी 3 मामले भेजे हैं। इसमें मिड हिमालय प्रोजेक्ट में चहेतों काे लाभ पहुंचाने, पाेल खरीद में अनियमितता अाैर फर्जी तरीके से किए गए पाैधा राेपण का मामला है। मिड हिमालय प्रोजेक्ट के तहत चुवाड़ी मंडल में फॉरेस्ट शूज, जैकेट, प्रैशर कुकर, टाॅर्च व रूकसुक बैग आदि चीजें ज्यादा कीमत में खरीद कर अपने चहेते भेड़ पालकों को बांटी गई। हिमाचल प्रदेश मिड हिमालयन वाटरशैड प्रोजेक्ट की आॅडिट रिपोट में भी पाया गया था कि चुवाड़ी डिवीजन ने 139.38 लाख रुपए उन 11 पंचायतों में खर्च कर दिया जो इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत अाती ही नहीं थी। जो इस प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। इसके अलावा बिलासपुर जिला के घुमारवीं में पौधारोपण के कार्य में अनियमितता हुई है। पौधारोपण केवल कागाजों में ही दिखाया गया। जमीन पर पाैधे लगे ही नहीं। इसी तरह विभाग ने फैंसिंग के लिए अारसीसी के पाेल खरीदे थे। इनकाे खरीदने के लिए प्राॅपर प्राेसिजर नहीं अपनाया गया। बिना टैंडर के इन पाेल काे खरीद कर चहेतों काे लाभ पहुंचाया गया था। राज्य सरकार ने इन दाेनाें मामलाें काे जांच के लिए विजिलेंस काे भेजा है। जल्द ही इन तीनाें मामलाें में एफअाईअार दर्ज हाेगी।

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