एमफिल के हर विभाग में बढ़ेगी सीटें, स्टूडेंट्स काे मिलेगा फायदा

Shimla News - हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के हर विभाग में एमफिल की सीटाें काे बढ़ाया जाएगा। जिन बड़े विभागाें में ज्यादा सीटाें...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:31 AM IST
Shimla News - seats will increase in every department of mphil students will get benefit
हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के हर विभाग में एमफिल की सीटाें काे बढ़ाया जाएगा। जिन बड़े विभागाें में ज्यादा सीटाें की जरूरत है, वहां ज्यादा सीटाें बढ़ाने की याेजना प्रशासन की अाेर से बनाई जा रही हैं। एचपीयू के लगभग सभी विभागाें में 10 से 15 सीटें की जाएगी। ताकि, ज्यादा से ज्यादा छात्राें काे एडमिशन मिल सके। अभी कई विभागाें में ताे दाे से तीन सीटें ही छात्राें काे मिली है। हालांकि, इस सत्र में खाली सीटाें काे भरने के लिए विवि प्रशासन जल्द ही अधिसूचना जारी कर रहा है, लेकिन विभागाें में सीटाें काे बढ़ाने का फैसला अगले सत्र के लिए लिया जाएगा।

इस बार विवि प्रशासन ने फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलॉजी, जियोग्राफी, मैथेमेटिक्स, एमए फिजिकल एजूकेशन, इंग्लिश, सोशल वर्क, एमएड, डीएचआरडी, पीजीडीएमसी, एलएलएम, एमएबीई, एमए (हिंदी ट्रांसलेशन, संस्कृत, म्यूजिक, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, राजनीति विज्ञान, साइकोलॉजी, इतिहास, विजुअल आर्ट (पेंटिंग) योगा स्टडीज, ग्रामीण विकास और एमकॉम में एमफिल के लिए अावेदन मांगें थे।

इन विभागाेंं में अभी काफी कम सीटें हैं। वहीं, परीक्षा नियंत्रक डाॅ. जेएस नेगी का कहना है कि एमफिल की सीटाें के लिए काउंसिलिंग चली हुई है। सीटाें पर स्टडी किया जा रहा है, छात्राें के हित में ही फैसला लिया जाएगा।

एचपीयू से काफी अधिक स्टूडेंट्स करते हंै एमफिल, पीएचडी

प्रदेश यूनिवर्सिटी में एमफिल अाैर पीएचडी के लिए अावेदन करने वाले छात्राें की संख्या बीते तीन साल में काफी बढ़ी हैं। एचपीयू से एमफिल अाैर पीएचडी करने के लिए सैंकड़ाें स्टूडेंट अावेदन करते हैं। इनमें वे लाेग भी शामिल है, जाे या ताे सरकारी कर्मचारी है अाैर या फिर प्राइवेट नाैकरी कर रहे हैं। प्रदेश में एचपीयू ही छात्राें की एमफिल करने की पहली पसंद है। इसलिए अब विवि प्रशासन एमफिल की सीटें बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा छात्राें काे रिसर्च करने का माैका देना चाहता है।

एबीवीपी ने उठाई मांग, सबकाे रिसर्च का माैका मिलना चाहिए

एबीवीपी की विवि इकाई ने एमफिल विषय में सीटें बढाने के लिए अधिष्ठाता अध्ययन को ज्ञापन भी सौंपा था। एबीवीपी के कैंपस सचिव मनीष वर्मा का कहना है कि अधिक से अधिक छात्रों को शोध करने का अवसर मिलना चाहिए। विश्वविद्यालय में सभी विभागों में एमफिल में कम सीटें हैं। शिक्षकाें की भारी कमी हैं। सभी विभागाें में सही अनुपात में सीटें बढ़ाई जाएं। वहीं, डीन अाॅफ स्टडीज प्राे. अरविंद कालिया ने भी एमफिल की सीटाें काे बढ़ाने का अाश्वासन छात्राें काे दिया था, अब इस पर प्रक्रिया शुरू हाे गई है।

काॅलेज में अब डिग्री ही नहीं, राेजगार भी देंगे

यूजीसी ने सभी काॅलेजाें काे जारी किए निर्देश, 22 तक रखी है अंतिम तारीख

एजुकेशन रिपाेर्टर | शिमला

हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से संबंधित प्रदेश भर के काॅलेजाें काे अब डिग्री डिप्लाेमा देने के साथ साथ छात्राें काे राेजगार देने के लिए भी प्लानिंग तैयारी करनी हाेगी।

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने इस तरह के अादेश जारी किए हैं। इसके लिए हर काॅलेजाें में एक सेल गठित करना हाेगा। ये सेल प्रत्येक छात्र की रुचि और पढ़ाई के लिहाज से उसके भविष्य की रूप रेखा तैयार करेगा। काॅलेज इसमें अपने पूर्व छात्राें की मदद ले सकते हैं। यूजीसी ने इसे लेकर एक नीति तैयार की है, जिसे छात्र कैरियर प्रोन्नति और पूर्व विद्यार्थी नेटवर्क नाम दिया गया है। फिलहाल इसे अंतिम रुप देने की तैयारियां चल रही है।

हालांकि इससे पहले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों की राय मांगी गई है। यूजीसी के मुताबिक राय देने की अंतिम तारीख 22 नवंबर तक की तय की गई है। वहीं, यूजीसी की इस पहल को विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में बड़ी पहल मानी जा रही है।

नाॅन सब्सिडाइज्ड सीट की फीस है 50 हजार, 10 से अधिक हो सीटें

नाॅन सब्सिडाइज्ड सीटाें में प्रवेश के लिए 50 हजार रुपए वार्षिक फीस तय की गई है। एलएलएम में इस बार 21 सीटें रखी गई है। इसी तरह इकाेनाेमिक्स में छह, जियाेग्राफी में 7, बाॅटनी में तीन, जूलाॅजी में सात अाैर साइकाेलाॅजी में सात सीटें हैं, जबकि कई अन्य विभाग में है उसमें दाे से तीन ही सीटें हैं। इसलिए अब विभाग चाहता है कि छात्राें की संख्या काे देखते हुए हर विभाग में 10 से अधिक सीटें रखी जाए, ताकि छात्राें काे किसी तरह की दिक्कताें का सामना न करना पड़े।

छात्राें काे अच्छा प्लेटफाॅर्म दिलाने की तैयारी: यूजीसी की अाेर से ये पहल छात्राें काे बेहतर माहाैल देने के लिए अाैर अच्छा प्लेटफार्म दिलाने के लिए किया गया है। मौजूदा समय में देश में लाखाें काॅलेज हैं। जहां हर साल लाखों छात्र उच्च शिक्षा हासिल करके निकलते है। इनमें बड़ी संख्या में छात्र सही मार्गदर्शन न मिलने के चलते कैरियर में आगे नहीं बढ़ पाते है। छात्रों के कैरियर को सही दिशा देने को लेकर ही है।

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