पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Rampur News Shortage Of Power Employees Becoming A Burden On Villagers Six Posts Are Vacant In Jagatkhana

ग्रामीणों पर बोझ बन रही बिजली कर्मचारियों की कमी, जगातखाना में छह पद चल रहे रिक्त

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

रामपुर के साथ लगती जगातखाना सब स्टेशन में कर्मचारियों की कमी का खामियाजा आउटर सिराज के तुनन पंचायत के बाशिंदों को भुगतान पड़ रहा है। उक्त पंचायत के करीब आधा दर्जन से अधिक गांवों के उपभोक्ताओं को पांच-छह माह बाद बिजली बिल मिल पा रहे है। ऐसे में लंबे अंतराल के बाद विभाग द्वारा दिए जा रहे भारी भरकम बिलों को चुकाने में ग्रामीणों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है इस समस्या को लेकर विभाग को भी सूचित किया गया है, लेकिन अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है।

गौर हो रामपुर के साथ लगते जिला कुल्लू के अंतर्गत आने वाले विद्युत विभाग के सब स्टेशन जगातखाना में लंबे समय से करीब छह कर्मचारियों के पद रिक्त चल रहे है। ऐसे में विभाग समय पर उपभोक्ताओं को बिजली बिल नही दे पा रहा है, जिसका सीधा खामियाजा ग्रामीणों को भुगतान पड़ रहा है। चाटी निवासी धर्मेद्र, मोतीलाल, देव कुमार, सुशील, मदन लाल, वेद प्रकाश, सुमित्रा, देवी सिंह, सुभाष व अन्य लोगों का कहना है कि बीते छह माह से अधिक समय से उन्हें बिजली बिल नही मिल पाया है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा लंबे अंतराल के बाद दिए जा रहे बिलों को चुकाने में लोगों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। वही जगातखाना निवासी यशवंत शर्मा, लेखराज, पवन, सनम, आलोक, चुन्नी लाल, योगेद्र नेगी, बाला राम व अन्य लोगों ने कहा कि इस क्षेत्र में अधिकतर लोग कृषि व दैनिक भोगी निवास करते है। ऐसे में छह-छह माह के बिजली बिलों का भुक्तान एक साथ करने में उन्हें परेशानियां उठानी पड़ रही है। प्रदेश सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों के रिक्त पड़े पदों को भरा जाए।

सब स्टेशन में कर्मचारियों के करीब छह पद रिक्त पड़े हुए है, जिसके चलते लोगो को बिजली बिल देने में देरी हो रही है। विभाग के उच्चाधिकारियों को कर्मचारियों के पद भरने को लेकर लिखित तौर पर सूचित कर दिया गया है।
बीएल बंसल, सहायक अभियंता विद्युत बाेर्ड, जगातखाना।

यहा है अधिक समस्या: जानकारी के मुताबिक सब स्टेशन के अंतर्गत आने वाली तुनन पंचायत के चाटी, जगातखाना, तुनन, शरशाया, गांवबील, मोतीसेर, सिस्वासेरी व साथ लगते अन्य गांवों के लोगों को लंबे समय से इस समस्या से दो चार होना पड़ रहा है।
खबरें और भी हैं...