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पत्थर का एक ऐसा अजीब खेल, जब तक खून न बहने लगे तब तक यहां नहीं रुकती है पत्थरबाजी

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2018, 05:30 PM IST

पहले नरबलि फिर राजा की मौत के बाद पशुबलि, अब इसने ली इसकी जगह

stone fair in shimla

शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिमला से 30 किमी दूर हलोग धामी गांव में हर साल परंपरागत रूप से दिवाली के दूसरे दिन पत्थर मेला लगता है। पत्थर का ऐसा अजीब खेल, जब तक खून न बहने लगे, तब तक पत्थरबाजी नहीं रुकती है। गुरुवार को इस मेले में हजारों लोग जुटे।

युवक के माथे से निकले खून से किया मां भद्रकाली का अभिषेक

धामी रियासत के राजा जगदीप सिंह के पहुंचते ही दो गुटों के बीच पत्थर चलने शुरू हो गए। आधे घंटे तक चली पत्थरबाजी के बाद जमोगी गांव के सुरेश को माथे पर पत्थर लगा और उसके खून से मां भद्रकाली का अभिषेक किया गया। मेले में पत्थर लगना सौभाग्य की बात मानी जाती है। धामी गांव में लगने वाला यह मेला प्रसिद्ध है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं।

नरबलि के बाद पशुबलि, अब पथराव

पहले यहां हर साल नरबलि दी जाती थी। राजा की मौत के बाद रानी सती हो गई। मरते समय रानी ने यहां पर नरबलि बंद करवा दी। इसके बाद पशुबलि शुरू हुई। फिर इसे भी बंद कर दिया। इसके बाद अब पत्थर मेला शुरू किया गया।

पत्थरबाजी के लिए दो टोलियां ही मान्य


एक ओर राज परिवार की टोली और दूसरी तरफ से जमोगी खानदान की टोली के सदस्य ही पत्थरबाजी में भाग ले सकते हैं। बाकी लोग केवल मेला देख सकते हैं। मेले की शुरुआत राजपरिवार के नरसिंह के पूजन के साथ होती है।

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