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अप्रैल से 8 कराेड़ में की जाएगी 30 किमी के एरिया में सड़काें की टारिंग
शिमला शहर में अब पिछले साल की बाकि रह गई शहराें की टारिंग अप्रैल में हाेगी। इसके लिए नगर निगम की राेड एंड बिल्डिंग ब्रांच ने पार्षदाें से भी डिटेल मांगी है कि जिन-जिन वार्डाें में सड़काें की टारिंग नहीं हाे सकी है उनकी सूचना एमसी काे दे। इसके लिए प्लान बनाया गया है कि 30 किलाेमीटर के दायरे में जितनी भी सड़कें रह गई हैं उनकी टारिंग की जाएगी। टारिंग पर करीब 8 कराेड़ रुपए खर्च िकए जाने हैं। वहीं एमसी प्रशासन अपने स्तर पर भी सड़काें की टारिंग की सूची बना रहा है। गाैर रहे कि बीते साल बरसात के माैसम में शहर में 30 फीसदी सड़कें एेसी रह गई थी जिनकी टारिंग नहीं हाे सकी थी। वहीं जिन सड़काें की टारिंग हुई भी वे भी अब उखड़ने लगी है। एेसे में नगर निगम शेष बची टारिंग का काम जल्द ही शुरू कर देगा। नगर निगम का कहना है कि माैसम खराब हाेने के चलते अभी शहर में सड़काें की टारिंग का काम शुरू नहीं िकया जा सकता। एेसे में एक अप्रैल से एक बार फिर सड़काें की टारिंग का काम नए सिरे से शुरू िकया जाएगा। गाैर रहे कि उपनगराें में छाेटी सड़काें की हालत बेहद खस्ता है। हर साल बरसात के कारण इन सड़काें की टारिंग का काम अधूरा ही रह जाता है।
टारिंग के लिए अप्रैल से जून का समय सबसे सही नगर निगम की मानेें ताे टारिंग का काम करवाने के लिए माैसम का साफ हाेना जरूरी है। शहर में अभी तक 20 फीसदी सड़काें की ही टारिंग हाे पाई है। शिमला शहर में यदि टारिंग का काम करना है, ताे इसके लिए अप्रैल से जून तीन माह का समय ही सबसे सही हाेता है, लेकिन बारिश के कारण बीच में ही नगर निगम काे कुछ समय के लिए काम बंद करना पड़ता है। उसके बाद डेढ़ महीने बाद बरसात का मौसम शुरू हो जाएगा। ऐसे में शहर के कई वार्डों की सड़कों में टारिंग का काम होने को अभी बाकी है। नगर निगम का तारगेट रहता है कि बरसात से पहले शहर की सभी छाेटी-बड़ी टारिंग का काम पूरा िकया जाए।