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सड़क किनारे बच्चे को जन्म दे रही थी मादा कक्कड़, गाड़ी आई तो डर से बच्चा छोड़ भागी, अब रिहबिलिटेशन सेंटर में है सहमा बच्चा

Shimla News - मल्याणा के पास कक्कड़ का एक नवजात बच्चा मिला है। मादा कक्कड़ सड़क पर इस बच्चे को जन्म दे रही थी और इस दौरान वहां एक...

Oct 13, 2019, 07:26 AM IST
मल्याणा के पास कक्कड़ का एक नवजात बच्चा मिला है। मादा कक्कड़ सड़क पर इस बच्चे को जन्म दे रही थी और इस दौरान वहां एक गाड़ी पहुंची तो वह बच्चा सड़क पर छोड़कर भाग गई। बच्चे को रेस्क्यू एंड रिहबिलिटेशन सेंटर टूटीकंडी ले जाया गया है।

सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे यशवंत अपने कुछ साथियों के साथ कार से मैहली की ओर से अपने घर मल्याणा आ रहे थे। जब वे मल्याणा के कुछ आगे पहुंचे तो वहां सड़क पर ही कक्कड़ बच्चे को जन्म दे रही थी। इस दौरान कक्कड़ की नजर उनकी गाड़ी पर पड़ी और डर से छलांग मारकर वह भाग गई। यशवंत और उनके साथियों ने बच्चे को उठाया और काफी देर तक उसकी मां का इंतजार किया। लेकिन जब मादा कक्कड़ वापस नहीं आई तो बच्चे को मल्याणा ले आए और वहां रोहित सूद को सौंप गए। रोहित सूद वहां दुकान चलाते हैं। रोहित सूद ने बच्चे के मिलने की सूचना वन विभाग को दी। इसके बाद खुद अपनी कार में इस बच्चे को टूटीकंडी रेस्क्यू एंड रिहबिलिटेशन सेंटर पहुंचाया।

टूटीकंडी सेंटर में हो रही देख भाल टूटीकंडी सेंटर में मादा कक्कड़ के इस बच्चे की देखभाल की जा रही है। सेंटर पहुंचने पर वहां कर्मचारियों ने इसको दूध पिलाना शुरू कर दिया है। मादा कक्कड़ का बच्चा भी धीरे-धीरे दूध पीने लगा है। बच्चे को कुछ समय के अंतराल के बाद दूध दिया रहा है। हालांकि वह सहमा भी हुआ है। इस सेंटर में पहले ही 26 जानवर रखे गए हैं, इनमें 15 तेंदुए के अलावा 11 काले भालू भी हैं। इस तरह अब एक नया मेहमान कक्कड़ के तौर पर सेंटर में आया है। वेटरनरी डाक्टरों की रिकमंडेशन के बाद इसको कुफरी जू में शिफ्ट किया जाएगा, जहां काफी संख्या में कक्कड़ हैं।

हिरन की है प्रजाति कक्कड़ काफी छोटी कद-काठी का होता है। यह जानवर किसी भी खतरे का आभास होने पर भौंकने की तरह ध्वनि निकालने लगता है, इसीलिए इसको अंग्रेजी में बार्किंग डीर कहते हैं। इसके बाल छोटे व मुलायम भूरे या स्लेटी रंग के होते हैं और कभी-कभी उनमें सफेदी भी झलकती है। यह भारत से लेकर श्रीलंका, चीन दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं। इसके अलावा पूर्वी हिमालय और म्यांमार में भी पाया जाता है। यह हिरन प्रजाति में सबसे पुराना जीव है। इसको धरती ढाई से तीन लाख साल पहले देखा गया। इसके फॉसिल्स जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड में भी पाए गए हैं। हिमाचल में भी कक्कड़ कई जगह पाया जाता है।

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