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सतीवाला नदी का पानी स्लम एरिया में घुसा, रिटेनिंग दीवार गिरने से एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत

घटना से आसपास की तीन चार झुग्गियों को भी नुक्सान पहुंचा है।

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2018, 06:29 PM IST
बारिश का पानी आने से दीवार झुग बारिश का पानी आने से दीवार झुग

बद्दी/ मानपुरा। औद्योगिक क्षेत्र बरोटीवाला में प्रवासी कामगारों की झुग्गी पर रिटेनिंग वॉल गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में चार साल के मासूम सहित उसके माता-पिता शामिल हैं। यह हादसा रविवार सुबह करीब तीन बजे भारी बारिश के बाद सतीवाला नदी में आए उफान से नदी का पानी स्लम क्षेत्र में घुस आया। इसके कारण रिटेनिंग वॉल ढह कर पर झुग्गियों पर गिर गई। इससे एक प्रवासी परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मलबे व पानी के बीच चार साल के मासूम की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके माता-पिता ने पीजीआई में दम तोड़ दिया।

क्या है सारा मामला
जानकारी के अनुसार राजू (30)निवासी मध्य प्रदेश अपनी पत्नी शारदा (28)और बच्चे राहुल (4) के साथ बरोटीवाला में नदी के साथ में लगती जमीन पर झुग्गी में रहता था। राजू और उसकी पत्नी मजदूरी कर अपना जीवन निर्वाह कर रहे थे। शनिवार रात को राजू और उसका परिवार झुग्गी के अंदर सोया हुआ था कि रविवार सुबह नदी में अचानक तेज बहाव आ गया और पानी साथ में लगती रिटेनिंग दीवार को तोडते हुए स्लम क्षेत्र में घुस गया। इस हादसे में पांच के करीबन झुगियां क्षतिग्रस्त हो गई और राजू की झुग्गी पर दीवार गिरने से उसका पूरा परिवार उसके नीचे दब गया। आसपास के लोगों ने इकट्ठा होकर राजू उसकी पत्नी व बच्चे को जब तक बाहर निकाला तब तक राजू का बेटा राहुल दम तोड चुका था।

घायलों को तुरंत सीएचसी बद्दी ले जाया गया, जहां से हालत को गंभीर देखते हुए डाक्टरों ने उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रैफर कर दिया जहां राजू और उसकी पत्नी शारदा ने भी रविवार दोपहर बाद दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही तहसीलदार बद्दी मुकेश शर्मा मौके पर पहुंचे और उन्होंने घटना स्थल का जायजा लिया। उन्होंने पीडि़त के परिजनों को 20 हजार की को फौरी दी व हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

पहले हुए हादसों से नहीं लिया प्रशासन ने कोई सबक
जून 2017 में आए भीष्ण तूफान से बद्दी में एक उद्योग की 20 फीट ऊंची दीवार गिरने से आठ प्रवासी लोगों की मौत हो गई थी, जबकि इस हादसे में 7 अन्य प्रवासी गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। बावजूद इसके प्रशासन ने इस हादसे से भी कोई सबक नहीं लिया। प्रशासन की लोकॉस्ट हाउसिंग स्कीम मात्र कागजों तक ही सीमित रह गई है। वैसे तो प्रशासन असुरक्षित क्षेत्र से स्लम को हटाने के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन इस तरह के हादसे होने के बाद प्रशासन के हर दावे मात्र खोखले नजर आते हैं।

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