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नशाखाेरी काे राेकने के लिए युवाअाें काे अाना पड़ेगा अागे

एक वर्ष पहले
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प्रदेश में नशावृत्ति को रोकने के लिए युवाओं और विशेष रूप से युवा संगठनों की भूमिका अहम है, जिसके तहत प्रदेश में युवा शक्ति अपनी रचनात्मक ऊर्जा को नशे की रोकथाम में प्रयोग कर प्रदेश के विकास में अपना सहयोग प्रदान कर सकते हैं। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बचत भवन में सुनील उपाध्याय एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा प्रदेश में बढ़ रही नशे की समस्या की चुनौतियों और निवारण के संबंध में एक दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए अपने संबोधन में यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ-साथ युवाओं तथा युवाओं के संगठनों को भी प्रदेश के नशा विरोधी कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान करना आवश्यक है। तकनीकी सत्र में पुलिस अधीक्षक ओमापति जम्वाल ने नशे को रोकने के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासांे व प्रावधानों के ऊपर विस्तृत जानकारी प्रदान की। मेंटल अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाॅ. संजय ने नशे के कारण मानसिक दुष्प्रभावों के संबंध में अपने विचार सांझा किए। जिला न्यायवादी रणबीर प्रमार ने नशे के विरूद्ध कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी।

इस अवसर पर नशा निवारण बोर्ड के सलाहकार ओपी शर्मा ने अपने उद्बोधन मंे नशे को रोकने के प्रति किए जाने वाले प्रयासों, विभिन्न स्तरों पर जन समुदाय की भागेदारी तथा विभागीय स्तरों पर किए जाने वाले कार्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। सुनील उपाध्याय ट्रस्ट के सचिव डाॅ. सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् द्वारा संचालित ट्रस्ट शिक्षा में सेवा कार्य कर रहा है, जिससे संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रचार हो सके। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश उच्चतर शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय डाॅ. सुनील गुप्ता, मुख्यमंत्री के विशेष कार्यकारी अधिकारी महेंद्र धर्माणी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय स्तर पर विशेष आमंत्रित सदस्य डाॅ. नागेश ठाकुर, पुर्नवास केंद्र के संचालक विशाल ठाकुर व पंकी सूद, शिमला शहर के सभी महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में युवाओं ने सम्मेलन में भाग लिया तथा चर्चा की।

बचत भवन में सुनील उपाध्याय एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा प्रदेश में बढ़ रहे नशे की लत पर मंथन हुअा।
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