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टीसीपी को लेकर मंत्रिमंडल में हुए निर्णय पर ठियोग और कुसुम्पटी के लोगों में अब जगी आशा की किरण

टीसीपी से ग्रामीण क्षेत्रों को अलग करने की मांग कर रही ठियोग व कुसुंपटी विस क्षेत्रों की विभिन्न पंचायतों के...

Danik Bhaskar | Feb 05, 2018, 02:10 AM IST
टीसीपी से ग्रामीण क्षेत्रों को अलग करने की मांग कर रही ठियोग व कुसुंपटी विस क्षेत्रों की विभिन्न पंचायतों के लोगों में प्रदेश सरकार मंत्रिमंडल की बैठक में किए गए निर्णय को लेकर आस जगी है कि उनकी सुनवाई अब सरकार करेगी। पिछले माह मुख्यमंत्री के आनी दौरे से लौटते हुए नारकंडा, ठियोग व कुसुंपटी के पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से ग्रामीण क्षेत्रों को टीसीपी से हटाने की मांग की थी। जिसपर मुख्यमंत्री ने लोगों को आश्वासन दिया था।

किसानों बागवानों को कठिनाई

टीसीपी के दायरे में आने वाली ग्राम पंचायत बणी के प्रधान राजेन्द्र झीना, शटैयां के प्रधान चंदन जोगी, देवरीघाट के प्रधान सुरेश वर्मा, चियोग के प्रधान गीताराम सहित आसपास की पंचायतों के प्रतिनिधियों का कहना है कि मुख्यमंत्री धूमल वाली भाजपा की पूर्व सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों को टीसीपी से बाहर करने का निर्णय किया था जिससे लोगों ने राहत की सांस ली थी। इन प्रतिनिधियों का कहना है कि इन पंचायतों के निवासी किसानों बागवानों को अपनी ही पैतृक भूमि पर मकान बनाने के लिए कई प्रकार के नियम लागू हैं। जो उचित नहीं है। इन पंचायतों में न तो टीसीपी की ओर से कोई सुविधा है न कोई प्लानिंग। यहां के स्थाई निवासी किसानों बागवानों को भी बिना किसी कारण नोटिस भेजे जा रहे हैं। कई बार तो उन लोगों को भी नोटिस भेज दिए जा रहे हैं जो मकान बना ही नहीं रहे। जो खेद का विषय है।

बणी पंचायत के प्रधान राजेन्द्र झीना, चियोग पंचायत प्रधान गीताराम आदि ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अपील की है कि पूर्व मुख्यमंत्री की तरह वे भी कुसुंपटी व ठियोग क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों को टीसीपी से बाहर करें और भवनों को लेकर नियम आसान किए जाएं। केवल होटलों रिजार्टों व बड़े व्यवसायिक भवनों पर ही सरकार नियम लागू करे। उनका कहना है कि कई ग्रामीणों के पास दो तीन बीघा ही भूमि है जिनपर मकान बनाकर वे रोजगार कमाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उन्हें इससे भी वंचित किया जा रहा है।

नारकंडा, ठियोग व कुसुंपटी के पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से ग्रामीण क्षेत्रों को टीसीपी से हटाने की थी मांग

स्थायी निवासियों पर नियम न थोंपने का आग्रह

इन पंचायतों के लोगों ने इन पंचायतों में स्थायी रूप से बसे लोगों पर किसी प्रकार के नियम न थोंपने का आग्रह किया है। लोगों का कहना है कि जिन लोगों की भूमि सड़कों से नीचे की ओर है उन्होंने कर्ज लेकर बड़ी मुश्किल से मकान बनाए हैं। सड़क तक मकान बनाने में कई मंजिलें बनानी पड़ रही हैं। क्योंकि इन परिवारों के युवा सड़कों में दुकानें आदि खोलकर रोजगार कमाना चाहते हैं। लेकिन टीसीपी में आने के बाद किसान बागवान परिवारों को तंग किया जा रहा है। लोगों की मांग है कि या तो सरकार युवाओं को रोजगार दे या सड़क किनारे अपनी पैतृक भूमि वाले किसानों को दुकानें आदि बनाने दंे।