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मीठे, नमकीन पकवानों से महके ठियोग के गांव

ठियोग क्षेत्र के सबसे बड़े त्योहार महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया गया। मंगलवार को ठियोग के गांवों का हर घर...

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2018, 02:10 AM IST
मीठे, नमकीन पकवानों से महके ठियोग के गांव
ठियोग क्षेत्र के सबसे बड़े त्योहार महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया गया। मंगलवार को ठियोग के गांवों का हर घर शिवरात्रि के अवसर पर बनने वाले मीठे, नमकीन पकवानों से महक गया। लोगों ने व्रत रखा और दिन भर भगवान शिव व पार्वती के शुभ विवाह की तैयारियों में लगे रहे। लोगों ने व्रत रखकर सुबह शिव मंदिरों या अपनी देवठियों में शिव स्वरूप अपने देवताओं की पूजा अर्चना की। इसके बाद घरों में शिव पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं और भगवान गणेश की गोबर की प्रतिमा बनाकर उसे स्थापित किया गया। महिलाओं ने पारिजात की पत्तियों का चंदुआ बनाकर उसे घर के बाहर टांग दिया। देर रात तक शिवरात्रि का उत्सव चलता रहा।

पकैन काली रोटी बनी : हर घर में पकवानों महक आती रही। अग्नि देवता की पूजा कर लोगों ने गुड़ व आटे से बने मीठे पकैन तले। इसके साथ की काली रोटी, सनसे, पापड़, पकौड़े आदि कई चीजें बनाई गईं। बच्चे इस अवसर पर काफी खुश दिखाई दिए क्योंकि घरों में ही सबकुछ खाने को मिल रहा था। मंगलवार को मौमस के खराब होने और रूक रूक कर बर्फबारी के कारण काफी ठंड रही जिस कारण लोग अपनी रसोईयों में चूल्हों के सामने बैठकर शिवरात्रि के पकवानों को बनाने का आनंद लेते रहे।

ठियोग बाजार में आसपास के गावों के बच्चों ने भगवान शिव की बारात निकाली। कंधों पर पालकी लिए और हाथों में चिपटा लिए ये बच्चे हर दुकान व घर में गए। लोगों ने इन बारातियों का स्वागत कर उन्हें भेंट दी। बच्चों की कई टोलियां बाराती बनकर स्वांग करने पहुंची थीं। एक बच्चा माथे पर भस्म मले भगवान का प्रतीक बना हुआ था। उधर ठियोग के कई गावों में शिवरात्रि को रात भर जागरण भी आयोजित किया जाता है। धरेच स्थित जईश्वरी माता के अधीन आने वाले गांव में मंगलवार से जागरण आरंभ हुआ।

शिवरात्रि महोत्सव

बच्चों ने ठियोग बाजार में निकाली भगवान शिव की बारात, शिव पार्वती की मिट्‌टी की प्रतिमा स्थापित कीं

ठियोग बाजार में भगवान शिव की बारात लेकर निकला बच्चों का एक दल।

आज बंटेगा बांटा

बुधवार को ठियोग में लोग अपनी बेटियों और बहनों को शिवरात्रि पर बनाए पकवान बांटेंगे। इसके लिए सुबह से की चहल पहल शुरू हो जाएगी। कुछ दशक पहले तक लोग खास प्रकार के बने किल्टुओं को पीठ पर लादे उसमें बांटा लेकर जाते थे। गावों की पगडंडियों पर एक खास चहलपहल रहती थी। लेकिन अब लोग बसों व निजी वाहनों बांटा देने जाते हैं। हर गांव के सड़क से जुड़ने और निजी वाहनों की संख्या में वृद्धि के कारण यह कार्य आसान हो गया है। अपने मायके से आने वाले पिता या भाई की बेटियां शिवरात्रि के दूसरे दिन बड़ी आस से प्रतीक्षा करती हैं।

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