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हर साल जंगली आग से परेशान मधोगड़ा के लोग

ठियोग उपमंडल की कोटखाई तहसील के तहत आने वाली हिमरी पंचायत के मधोगड़ा व आसपास के ग्रामीणों ने उनकी घासनियों व जंगल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 24, 2018, 02:15 AM IST

ठियोग उपमंडल की कोटखाई तहसील के तहत आने वाली हिमरी पंचायत के मधोगड़ा व आसपास के ग्रामीणों ने उनकी घासनियों व जंगल में आग की घटनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में सड़क व पानी की योजना तुरंत निर्माण करने की गुहार सरकार से लगाई है। इस क्षेत्र में अब तक पिछले कुछ सालों में सात बार जंगली आग से किसानों बागवानों के सेब बागीचों को नुकसान हो चुका है और उनकी घासनियों का सारा घास भी हर बार जल जाता है।

20 मार्च को जले 90 सेब पौधे

ग्रामीणों के अनुसार 20 मार्च को भी देवगढ़ नाले से लगी आग इन गावों में पहुंच गई। इससे मधोगड़ा गांव में ज्ञानचंद व विद्या देवी के नाशपाती व सेब के 90 पौधे जल गए। इन ग्रामीणों के अनुसार आग इतनी भयानक थी कि ग्रामीणों ने कई घंटे लगाकर उसे बुझाया। सड़क न होने के कारण अग्निशमन वाहन यहां नहीं पहुंच पाए और उन्हें लौटना पड़ा। ग्रामीणों के अनुसार वे 20 सालों से सड़क की मांग कर रहे हैं लेकिन इसका कार्य कछुआ गति से चल रहा है। वे अपनी भूमि भी सड़क के लिए दे चुके हैं। ग्रामीणों ने बड़ोग जंगल में फायर वाचर की तैनाती की मांग भी की है। ग्रामीणों के अनुसार यदि इस स्थान पर सड़क, पर्याप्त पानी वाला टैंक, की मैन, फायर वाचर आदि उपलब्ध हो तो हर साल करोड़ों की वन संपदा और लोगों की घासनियों व बागीचों को होने वाला नुकसान बच सकता है। ग्रामीणों के अनुसार यदि सरकार ने कदम न उठाए तो ग्रामीणों को यहां से पलायन पर विवश होना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से उनकी समस्या को हल करने के निर्देश अधिकारियों को देने का आग्रह किया है।

पानी टैंक निर्माण व सड़क पहुंचाने की और फायर वाचर तैनात करने की मांग

हर साल राख में बदल जाती है मधोगड़ा गांव के आसपास के जंगल व घासनियां।

पानी की योजना से नहीं जोड़ा

मधोगड़ा के ग्रामीणों के अनुसार उनके गांव को उठाऊ पेयजल योजना से भी नहीं जोड़ा जा रहा है जबकि उनकी जमीनों से होकर देवगढ़ के लिए पानी की योजना बनी हुई है। यहां कई कई दिनों तक पानी नहीं मिलता और लाईनें टूटी रहती हैं। पानी के स्टोर निर्माण का प्रस्ताव भी भेजा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार हर चुनाव में 90 प्रतिशत ग्रामीण वोट करते हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

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