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थैलेसीमिया से लड़ रही जैसमिन, फिर भी पढ़ाई में रहती है अव्वल

ठियोग नगर में रहने वाली 18 साल की जैसमिन थैलीसिमिया से ग्रसित है। तीन माह की आयु से वह मौत से लड़ते हुए उससे जीत रही...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 26, 2018, 02:15 AM IST

ठियोग नगर में रहने वाली 18 साल की जैसमिन थैलीसिमिया से ग्रसित है। तीन माह की आयु से वह मौत से लड़ते हुए उससे जीत रही है। जैसमिन को हर माह दो बार रक्त चढ़ाया जाता है ताकि वह जिंदा रहे। लेकिन इस लड़की ने कभी हार मानकर आगे बढ़ना नहीं छोड़ा। हंसमुख और चुलबुली जैसमिन बाहर से जब सबको हंसाती है तो उसकी बीमारी देख अंदर से सब रो रहे होते हैं।

शनिवार को जैसमिन को ठियोग कालेज के वार्षिक पारितोषिक समारोह में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने सम्मानित किया। क्योंकि जैसमिन पढ़ाई में भी आगे है। जैसमिन कालेज में तीसरे समेस्टर में पढ़ रही है और अंग्रेजी के विषय में उसने दूसरा स्थान हासिल किया है। पुरस्कार लेते समय इस लड़की के चेहरे पर जो खुशी व संतोष था व देखने लायक था। उसके चाचा सुनील ग्रोवर के अनुसार पूरे परिवार में जैसमीन एक उदाहरण बन कर सबका हौसला बढ़ाती है। उसके पिता अनिल ग्रोवर के अनुसार कभी जैसमिन उनसे किसी चीज़ के लिए आग्रह करती है तो वे कई बार कह देते हैं बाद में लेंगे। तो जैसमिन कहती है बाद में कब। उसके सवाल कुछ देर सबको हैरानी में डाल देते हैं। वह हर समय मौत का सामना करने के लिए तैयार रहती है लेकिन उसने अपना जीवन जीना नहीं छोड़ा है। वह जीवन की हर खुशी को शिद्दत से मनाती है। जैसे पता नहीं कब यह मौका उसके हाथ से निकल जाए। जैसमिन की बहन उससे बढ़ी है लेकिन वह भी उससे पढ़ाई में पीछे रहती है।

जैसमिन पुरस्कार के बाद खुश दिखाई दी।

इस बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए करती है दुअा

ठियोग नगर में हर साल लगने वाले रक्तदान शिविरों में जैसमिन एक प्रेरणा बनकर सामने रहती है। युवाओं की संस्था रिदम बाएज हर साल ठियोग में रक्तदान शिविर लगाता है। थैलेसीमिया से पीड़ित हर बच्चे के लिए जैसमिन दुआ करती है। रिदम बाएज संस्था के मुखिया विनीत कहते हैं जैसमिन को देखकर युवाओं को अपना कर्तव्य याद आता है। ठियोग में हर साल तीन से चार रक्तदान शिविर होते हैं। जनवादी संगठन के अलावा कालेज के छात्र भी शिविर लगाते हैं। जैसमिन सभी की आभारी रहती है। विनीत ने बताया कि जैसमिन की प्ररेणा से कई युवा अब रक्तदान के लिए आग आ रहे हैंं और एक साल में दो-दो बार रक्त भी दे रहे हैं।

रक्तदान की देती रहूंगी प्रेरणा: जैसमिन

जब तक है जीवन देती रहेगी प्रेरणा जैसमिन कहती हैं कि जब तक वह जिंदा है वह लोगों को रक्तदान की प्रेरणा देती रहेगी। उसका जीने का लक्ष्य ही यही है। वह कहती हैं बीमारी कोई भी हो लेकिन उसे कभी गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। जीवटता के साथ उस बीमारी मुकाबला करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए और जो भी पल मिले उसे पूरी शिद्दत के साथ जीना चाहिए। हंस खिलकर बीमारी से मुकाबला करते हुए अपने सभी सपनों को पूरा करने की हमेशा कोशिश करनी चाहिए। मुझे भी जब मौका मिलता है हमेशा खुश रहने की कोशिश करती हूं और अपने परिवार वालों को इसका आभास नहीं होने देती कि मुझे कोई भयंकर बीमारी हैञ।

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