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ठियोग की नहौल पंचायत में मनाया बिशु मेला

ठियोग क्षेत्र के गावों में बिशू की साजी के बाद पूरे बैशाख महीने में बिशू मेलों का शुभारंभ हो जाता है। इस साल ठियोग...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:10 AM IST

ठियोग क्षेत्र के गावों में बिशू की साजी के बाद पूरे बैशाख महीने में बिशू मेलों का शुभारंभ हो जाता है। इस साल ठियोग की नहौल पंचायत में बिशू के दिन मेले का आयोजन हुआ जिसमें ठोडा दलों ने इस प्राचीन लोकक्रीड़ा में अपनी प्रतिभा दिखाई। इस मेले में ठोडा दल फागू और बलसन का नगैईक दल शामिल हुए। दो दिनों तक दोनों दलों ने डरोंल की जुबड़ी में ठोडा खेला।

देव परंपरा से जुड़े हैं बिशू मेले : ठियोग क्षेत्र में बिशू मेले देव परंपरा से जुड़े हैं और सदियों से उनका आयोजन होता आ रहा है। इन मेलों में प्राचीन काल से इस परंपरा से जुड़े परिवार ही भाग लेते हैं। हर देवठी का अपना एक खूंद होता है। ये खूंद क्षत्रीय परिवारों के होते हैं और ठोडा खेल अपने पूर्वजों से सीखते आ रहे हैं। हर देवठी में खूंद देवी दुर्गा के उपासक माने जाते हैं। ठोडा खेलने के लिए एक विशेष स्थान होता है।

बैशाख महीने के पहले दिन डरोंल के बिशू मेले में ठोडा का प्रदर्शन करते।

आजकल ठोडा, बरसात के बाद हरियाली :ठियोग क्षेत्र में बैशाख महीने से ठोडा खेल पर आधारित बिशू मेले और बरसात के बाद हरियाली मेलों का आयोजन होता है। अधिकतर मेले देवपरंपरा से जुड़े होने के कारण इनका आयोजन करवाना जरूरी होता है। कई देवठियों में हर साल और कई जगह तीन या चार साल बाद बिशू और हरियाली मेलों का आयोजन होता है। इसके अलावा भी ठियोग में कई गावों में मेलों का आयोजन होता है। तमाम तरह की आधुनिकता के बावजूद ठियोग क्षेत्र में इन ग्राम मेलों को लेकर लोगों के उत्साह में कमी नहीं आई है।

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