--Advertisement--

सांस्कृतिक विविधता को बचाए रखना जरूरी: बरयाम

प्रसिद्ध कवि व अनुवादक प्रो. वरयाम सिंह ने कहा है कि वैचारिक व सांस्कृतिक विविधता को कायम रखने के लिए निजी...

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:10 AM IST
सांस्कृतिक विविधता को बचाए रखना जरूरी: बरयाम
प्रसिद्ध कवि व अनुवादक प्रो. वरयाम सिंह ने कहा है कि वैचारिक व सांस्कृतिक विविधता को कायम रखने के लिए निजी संस्थाओं और स्वतंत्र रचनाकारों को आगे आने का आह्वान किया है। वे ठियोग में सर्जक की ओर से आयोजित मधुकर भारती व अरूण भारती स्मृति समारोह में बोल रहे थे। सर्जक ने यह कार्यक्रम मधुकर भारती की चौथी पुण्य तिथि और अरूण भारती के जन्मदिन पर आयोजित किया था। वरयाम सिंह ने कहा कि गैर सरकारी आयोजनों में सभी विचारधाराओं के लेखक खुलकर अपनी बात कह सकते हैं जबकि सरकारी आयोजनों में कुछ लोग एक विचार को ही पुष्ट करने के लिए एकत्र होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की देव संस्कृति व देश के विभिन्न की संस्कृतियों के साथ ही हमें जीना है।

उन्होंने सर्जक को बिना सरकारी मदद के इस प्रकार के कार्यक्रमों के लिए बधाई देते हुए कहा कि कई जिलों में आने वाले सिराज क्षेत्र में भी निजी रूप से लेखकों को जोड़कर ऐसे कार्यक्रम किए जाएंगे। इससे पूर्व दोनों दिवंगत साहित्यकारों व कवि तेजराम शर्मा को श्रद्धांजलि व मौन के बाद निंरजन देव, मोहन साहिल, डाॅ.तुलसी रमण, देवेन्द्र धर, डाॅ.दयानंद शर्मा, हरिदत्त वर्मा ने दोनों लेखकों के कृतित्व पर प्रकाश डाला। अरूण भारती के पुत्र अश्वनी ने भी अपने पिता के बारे में संस्मरण सुनाए।

ठियोग में स्मृति समारोह में ओम भारद्वाज के पहले कहानी संग्रह का विमोचन।

पांच कवियों की कविताओं का पाठ

कार्यक्रम के पहले सत्र में पांच चर्चित युवा कवियों ने अपना कविता पाठ किया जिनमें राजेश शर्मा, दिनेश शर्मा, सत्यनारायण स्नेही, ब्रह्मानंद देवरानी और अतुल अंशुमाली शामिल हैं। इनकी प्रखर व नए मुहावरे की कविताओं ने सभी को प्रभावित किया। इसी सत्र में ठियोग कालेज व नवोदय विद्यालय से आए नवोदित कवियों ने अपनी कविताएं सुनाईं जिनमें श्रेया, देवांश, पूजा, अक्षिता, कविता, भावना और दिव्या शामिल रहे। दूसरे सत्र में हुई कवि गोष्ठी में एक दर्जन से अधिक कवियों ने कविता पढ़ी जिनमें देवेन्द्र धर, कुलराजीव पंत,र|चंद निर्झर, हरिदत्त वर्मा, अरूणजीत ठाकुर, नरेश देवग, प्रांशू आदित्य, दीपक भारद्वाज, मोहन राठौर, दयानंद शर्मा, साहिल शामिल हैं।

X
सांस्कृतिक विविधता को बचाए रखना जरूरी: बरयाम
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..