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दुनीचंद को सौंपी भाजपा की कमान दीपराम प्रदेश कार्यकारिणी में

ठियोग भाजपा की कमान अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष दुनीचंद कश्यप को सौंप दी गई है। पूर्व मंडल अध्यक्ष दीपराम...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 02:10 AM IST

ठियोग भाजपा की कमान अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष दुनीचंद कश्यप को सौंप दी गई है। पूर्व मंडल अध्यक्ष दीपराम वर्मा को भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया है। नए अध्यक्ष ने ठियोग में सभी पक्षों व नेताओं से विमर्श के बाद कार्यकारिणी का जल्द गठन करने का ऐलान किया है। कश्यप ने प्रदेश हाईकमान अध्यक्ष सतपाल सत्ती , जिलाध्यक्ष अजय श्याम, संसदीय प्रभारी पुरुषोत्तम गुलेरिया सहित सभी उच्च नपाधिकारियों को धन्यवाद दिया है और अपनी नियुक्ति को अनुसूचित जाति के लोगों का सम्मान बताया है।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को सराय हॉल में मंडल की बैठक मे कार्यकर्ताओं ने विस चुनावों में राकेश वर्मा के विरोध में कथित रूप से कार्य करने वालों को अधिमान दिए जाने का विरोध किया था और मुख्यमंत्री से मिलने की बात की थी। दूसरे दिन ही मंडल अध्यक्ष को बदलकर पार्टी ने वर्मा समर्थकों को कड़ा संदेश दे दिया है। राकेश वर्मा ने कहा है कि उनसे पार्टी ने किसी भी निर्णय से पहले कोई बात नहीं की है। उन्होंने बताया कि वे कार्यकर्ताओं से बातचीत कर ही आगे के कदम पर फैसला करेंगे।

नए मंडल अध्यक्ष दुनींचंद ने कहा है कि वे राकेश वर्मा, संदीपनी भारद्वाज, ज्ञान चंदेल सहित क्षेत्र के सभी नेताओं से मिलकर नई कार्यकारिणी गठित करेंगे। उन्होंने कहा की सभी पक्षों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया जाएगा। लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी के इस कदम का क्या प्रभाव होगा यह समय बताएगा। ठियोग भाजपा में पिछले कई सालों से राकेश वर्मा का वर्चस्व रहा है।

राकेश वर्मा विरोधी खेमे से हैं दुनीचंद

दुनीचंद कश्यप राकेश वर्मा विरोधी खेमे के हैं और विस चुनावों से पहले वे भी जिला भाजपा के साथ वर्मा को टिकट के विरोध में थे। इससे पहले वर्मा विरोधी नरेश शर्मा को एपीएमसी का अध्यक्ष बनाया जा चुका है। इन नियुक्तियों से राकेश वर्मा खेमे को पार्टी से अलग थलग करने की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। वर्मा समर्थक पार्टी की अचानक हुई इस कार्रवाई से हतप्रभ हैं। उनका कहना है कि पार्टी को मंडल अध्यक्ष बदलने से पूर्व राकेश वर्मा से विचार विमर्श करना चाहिए था। उधर वर्मा विरोधी खेमा सरकार व संगठन के सहारे लगातार भारी पड़ रहा है।

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