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सीएम के गृह जिला में अध्यापकों के कई पद रिक्त

करसोग, 23 अप्रैल भास्कर न्यूज। मुख्यमंत्री के गृह जिला में कई स्कूलों में अध्यापकों के पद रिक्त होने से बच्चों के...

Danik Bhaskar | Apr 25, 2018, 02:20 AM IST
करसोग, 23 अप्रैल भास्कर न्यूज। मुख्यमंत्री के गृह जिला में कई स्कूलों में अध्यापकों के पद रिक्त होने से बच्चों के भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा है। कहने को तो भारत सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया हुआ है और वर्तमान हिमाचल प्रदेश सरकार भी शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति करने के दावे कर रही है, परन्तु करसोग के शिक्षा खण्ड प्रथम के तहत अधिकतर स्कूलों में यह दावे और अधिनियम विरोधाभास पैदा कर रहे है। कनयोग में 9 माह से कोई अध्यापक नहीं है। ग्वालपुर प्राथमिक स्कूल से डेपुटेशन पर अध्यापक भेज कर काम चलाया जा रहा हैं। इस स्कूल में अध्यापकों के दो पद स्वीकृत हैं। स्कूल में बच्चों की संख्या 32 हैं। गवालपुर पंचायत के प्रधान मेघसिंह ठाकुर, एसएमसी के सदस्य हंसराज, सुनील कुमार, गोविंद, डोलमा देवी ने सरकार से आग्रह किया है कि पाठशाला में जल्द से जल्द अध्यापकों के रिक्त पदों को भरे अन्यथा हमें आंदोलन की राह भी पकड़नी पड़ सकती है।

स्कूलों में बढ़ रही है छात्रों की संख्या

तेबन, बखौहण, गवालपुर, खमनों प्राथमिक स्कूलों में भी बच्चों की संख्या अधिक है लेकिन यहां पर भी अध्यापकों के पद रिक्त हैं। इनमें केंद्रीय पाठशाला तेबन में एक मात्र अध्यापक हैं। और स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में तेबन स्कूल में 68 बच्चे है। एसएमसी की अध्यक्ष अनीता कुमारी का कहना है कि सरकार व विभाग से बार-बार पत्राचार द्वारा व स्वयं मिलकर अध्यापको के रिक्त पदों कों भरने बारे कहा गया है। लेकिन अध्यापकों के रिक्त पदों को नहीं भरा गया। उनका कहना है कि उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा। क्योंकि बच्चों के भविष्य का सवाल है।