70 साल साथ रहे पति-पत्नी, मौत के बाद पति की अर्थी श्मशान भी न पहुंच सकी तो पत्नी ने भी प्राण त्यागे

4 वर्ष पहले
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मुरैना (एमपी)। 70 साल पहले शादी के बंधन में बंधे। नाते-रिश्तेदारी में जाना हो या तीर्थ यात्रा साथ-साथ जाते और आखिरी समय में भी पति के साथ ही इस दुनिया को अलविदा कहा। साथ जीने-मरने की यह अटूट दास्तां है। छोटेलाल शर्मा (90) व गंगादेवी (87) की। दो बुजुर्गों का एक साथ दुनिया को अलविदा कहना परिवार के लिए सदमा है लेकिन कस्बे के लोग दोनों के अटूट प्रेम की चर्चा करते नहीं थक रहे। वहीं परिजन ने भी दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

जीवनसाथी की देह देखकर अचेत होकर गिर पड़ीं पत्नी

पोरसा कस्बे के रहने वाले छोटेलाल शर्मा (90) की शादी तीन साल छोटी गंगादेवी से 70 साल पहले हुआ था। शादी के बाद दोनों के चार बेटे व छह बेटियां हुईं। छोटेलाल ने अपने सभी बेटे-बेटियों की शादी कर दी।

इसके बाद नाती-पोते भी हुए और हंसती-खेलती गृहस्थी के बीच छोटेलाल व उनकी पत्नी गंगादेवी अपने छोटे नाती मायाराम के साथ रह रहे थे। शनिवार शाम 4.40 बजे छोटेलाल का निधन हो गया।

नाती मायाराम व बहू ने गंगादेवी से कहा-चाचा बीमार हो गए हैं, अस्पताल ले जा रहे हैं। यह सुनते ही गंगादेवी अचेत हो गईं। चूंकि नाते-रिश्तेदारों के इंतजार में छोटेलाल का अंतिम संस्कार रविवार सुबह होना तय हुआ इसलिए गंगादेवी को बताया नहीं कि उनके पति अब इस दुनिया में नहीं रहे।

सुबह अंतिम संस्कार के वक्त जब नाती-पोते व बहुएं पति के अंतिम दर्शनों के लिए गंगादेवी को लेकर आईं तो अपने जीवनसाथी की देह देखकर अचेत होकर गिर पड़ीं। महिलाओं ने उन्हें संभाला और पुरुष छोटेलाल की अंतिम यात्रा को मुक्तिधाम की ओर लेकर निकले। घर से 15 मिनट की दूरी पर छोटेलाल की अंतिम यात्रा पहुंची, तब तक गंगादेवी ने भी अपने प्राण त्याग दिए।

एक ही शैया पर लिटाकर किया अंतिम संस्कार

जैसे ही मायाराम व अन्य नातियों को पता चला कि उनकी दादी का निधन हो गया है तो तत्काल परिजन ने दोनों का साथ-साथ अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। परिवार के सभी सदस्यों ने छोटेलाल व गंगादेवी को नागाजी मुक्तिधाम में एक ही शैया पर लिटाया और एक-दूसरे का हाथ थमाकर उन्हें मुखाग्नि दी गई।

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