महिला ने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही बच्चे को मारा, फिर SC-ST एक्ट के तहत सवर्ण जाति के लोगों के खिलाफ लिखवा दी झूठी FIR, सरकार से 4 लाख रुपए से ज्यादा का मुआवजा भी ले लिया, बाद में इस एक राज ने खोल दी पूरी सच्चाई

dainikbhaskar.com | Sep 15,2018 11:51 AM IST

मथुरा के नौहझील थाना क्षेत्र में SC-ST एक्ट के तहत झूठा मामला दर्ज करवाया गया और सरकार से मुआवजा भी ले लिया। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने झूठी रिपोर्ट लिखाने और एसटी-एसटी एक्ट के तहत मुआवजे की पहली किस्त लेने पर कलेक्टर को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि 19 जुलाई को यूपी के भैरई में 6 साल के बच्चे प्रिंस का शव कुएं से मिला था। बालकी की मां गुड्डी ने गांव के ब्राह्मण परिवार सहित 6 लोगों पर अपने बेटे ही हत्या का आरोप लगाया था। इस पर पुलिस ने इन्हें तुरंत अरेस्ट कर जेल भेज दिया था। बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि गुड्डी के पति की 5 माह पहले गांव के एक शख्स ने हत्या कर दी थी। इसके बाद उसके संबंध अपने देवर के साथ बन गए। महिला और देवर को बच्चे ने आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। उसने यह बात सबको बताने का कहा था। इसीलिए महिला ने अपने देवर के साथ मिलकर बच्चे को मार डाला और दूसरे लोगों पर झूठे आरोप लगा दिए। इतना ही नहीं सरकार से 4 लाख 22 हजार 500 रुपए का मुआवजा भी ले लिया। इसी के चलते SC-ST एक्ट एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हम बता रहे हैं SC/ST एक्ट के नए प्रावधानों के बारे में। साथ ही यह भी जानिए की इस एक्ट में ऐसे कौन से प्रावधान हैं जो आपको सलाखों के पीछे पहुंचा सकते हैं।

कोई विवाहित महिला यदि किसी विवाहित पुरुष से संबंध बनाए तो सिर्फ पुरुष की कहलाता है दोषी, महिला नहीं; जानिए ऐसे भारतीय कानून जो सालों से चले आ रहे

dainikbhaskar.com | Sep 15,2018 00:01 AM IST

भारतीय कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं, जो सालों से चल आ रहे हैं। यह ऐसे कानून हैं जो पहली बार में आपको सरप्राइज भी कर सकते हैं। जैसे इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 497 में एडल्टरी को लेकर कानून हैं लेकिन इसमें सजा सिर्फ पुरुष को होती है। कोई विवाहित पुरुष किसी विवाहित स्त्री के साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो ऐसे में पुरुष को ही दोषी माना जाएगा। ऐसा करने वाले पुरुष को 5 साल की सजा और जुर्माना देना पड़ सकता है। जबकि ऐसा करने वाली महिला को इस केस में दोषी नहीं माना जाता। मप्र हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट संजय मेहरा ने बताया कि यह कानून 1860 से चला रहा है। उस समय ये प्रोविजन इसलिए किया गया था ताकि पुरुष अपनी आपसी रंजिश के लिए महिलाओं को हथियार न बनाएं। इतने सालों बाद भी कानून में बदलाव नहीं किया गया। आज हम Know the law सीरीज के तहत आपको ऐसे ही कुछ कानूनों की जानकारी दे रहे हैं।

जमीन खरीदने से पहले अखबार में क्यों देना ही चाहिए जाहिर सूचना? इसलिए है बेहद जरूरी

dainikbhaskar.com | Sep 15,2018 00:01 AM IST

कोई भी व्यक्ति प्रॉपर्टी खरीदते समय अपनी मेहनत की एक बड़ी कमाई उसमें लगा देता है। ऐसे में जरूरी है कि जो प्रॉपर्टी खरीदी जा रही है उसकी वैधता की पूरी तरह से जांच की जाए। मप्र हाईकोर्ट के एडवोकेट संजय मेहरा का कहना है कि यदि आप किसी टाउनशिप में प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं और वहां सभी बैंक लोन दे रहे हैं तो समझ लें कि वहां बड़ी रिस्क नहीं है, क्योंकि बैंक किसी भी टाउनशिप में लोन तभी देते हैं जब वहां का टाइटल (स्वामित्व) और सर्च क्लियर होता है। इसके बावजूद व्यक्ति को अपने लेवल पर कुछ चीजों को वेरिफाई तो करना ही चाहिए। आज हम बता रहे हैं कोई भी प्रॉपर्टी खरीदते समय आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब शादीशुदा लोगों को ये गलती पड़ेगी बहुत भारी, शिकायत मिलते ही अगले मिनट पुलिस सीधे कर सकती है गिरफ्तार

dainikbhaskar.com | Sep 14,2018 16:23 PM IST

सेक्शन 498-ए को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने अपने पुराने फैसले में बदलाव करते हुए 498-ए के तहत शिकायत होने पर वेलफेयर सोसायटी के पास केस जाने की व्यवस्था को बदल दिया है। यानी अब पुलिस आरोपी की सीधे गिरफ्तारी कर सकेगी। हालांकि इस धारा के मिसयूज को रोकने को लेकर कोर्ट ने अग्रिम जमानत की व्यवस्था को लागू रखा है। ऐसे मामलों में पति या उसका परिवार अग्रिम जमानत ले सकेंगे।