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भारत में हर तीसरी लड़की को सार्वजनिक स्थल पर यौन उत्पीड़न का डर- रिपोर्ट में दावा

सेव द चिल्ड्रन ने विंग 2018 वर्ल्ड ऑफ इंडिया सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा को लेकर लड़कियों की धारणा पर सर्वे किया।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 15, 2018, 09:48 PM IST

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    दो तिहाई से ज्यादा लड़कियां पब्लिक प्लेस में छेड़छाड़ का शिकार होने पर अपनी मां को सच्चाई बताती हैं। -सिम्बॉलिक
    • सर्वे में खुलासा- पीड़िता सबसे पहले घटना के बारे में मां को बताती है

    नई दिल्ली.देश में हर तीन में से एक लड़की (13-19 साल) को सार्वजनिक स्थलों पर यौन उत्पीड़न का डर बना रहता है। वहीं, देश में हर पांच में से एक लड़की मारपीट और दुष्कर्म को लेकर चिंतित हैं। यह डेटा एक सर्वे में सामने आया। गैर सरकारी संस्था सेव द चिल्ड्रन ने "विंग 2018 वर्ल्ड ऑफ इंडिया गर्ल्स" सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा को लेकर लड़कियों की धारणा के आधार पर सर्वे किया।



    दो-तिहाई से अधिक लड़कियां मां को बताती हैं सच्चाई
    - सर्वे में खुलासा हुआ है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की दो-तिहाई से अधिक लड़कियां ऐसी हैं। जो सार्वजनिक स्थलों पर छेड़छाड़ का शिकार होने के बाद अपनी मां को सच्चाई बताती हैं।
    - वहीं, 5 में से 2 लड़कियों ने बताया कि उनके साथ सार्वजनिक स्थलों पर हुई छेड़छाड़ के बारे में उनके माता-पिता को पता चलने के बाद वे उनके घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा देते हैं।

    सर्वे में 4000 से ज्यादा लड़के-लड़कियां शामिल

    - सर्वे में देश के 6 राज्यों के 30 शहरों, 12 जिलों और 84 गांवों को शामिल किया गया। इसमें दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पंश्चिम बंगाल, असम और मध्यप्रदेश हैं।
    - 4000 से ज्यादा लड़के-लड़कियों और 800 माता-पिता से जानकारी जुटाई गई है।


    महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए योजनाएं
    - केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी सर्वे की रिपोर्ट जारी की। उन्होंने कहा कि लड़कियों और महिलाओं को ध्यान में रखकर शहरी क्षेत्र के विकास की योजनाएं बनाईं जानी चाहिए। लेकिन इनका क्रियांवन नियमों के मुताबिक नहीं होता, यह महत्वपूर्ण है कि इन योजनाओं में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी होनी चाहिए।

    - उन्होंने कहा, न्यू इंडिया 2022 की अवधारणा सर्वोदय और अन्त्योदय के आधार पर चलाई जा रही है। इसका मतलब है, "सबसे पहले आखिरी शख्स आएगा। इसीलिए हमें हाशिए पर रही महिलाओं से शुरुआत करनी होगी।

    महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण- मेनका गांधी
    - केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि अच्छा समाज बनाने के लिए महिलाओं और लड़कियों के अधिकार और सुरक्षा के प्रति उनकी धारणा सबसे महत्वपूर्ण है।
    - सरकार ने हालही मे महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर पॉक्सो एक्ट 2012 और अपराधी संसोधन कानून 2013 में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए।

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    5 में से 2 लड़कियों ने बताया कि उनके साथ पब्लिक प्लेस पर हुई छेड़छाड़ के बारे में उनके माता-पिता को पता चलने के बाद वे उनके घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा देते हैं। -फाइल
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Web Title: 1 In 3 Teenage Girls Fears Assault In Public Places In India-Report
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