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असम में NRC ने जारी किया आंकड़ों का पहला ड्राफ्ट, 1.9 करोड़ लोगों को कानूनी तौर पर नागरिक माना गया

इस साल के आखिर तक ये साफ हो जाएगा कि असम में रहने वाले कितने लोग कानूनी तौर पर इस राज्य के नागरिक हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 01, 2018, 12:54 PM IST

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    एनआरसी का पहला ड्राफ्ट है। इसमें उन 1.9 करोड़ लोगों के नाम हैं, जिनका वेरिफिकेशन हो चुका है। - फाइल

    नई दिल्ली/गुवाहाटी.असम में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) का पहला ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। इसमें राज्य के 3.29 करोड़ में से 1.9 करोड़ लोगों को जगह दी गई है। यानी इन 1.9 करोड़ लोगों को कानूनी तौर पर भारत का नागरिक मान लिया गया है। बाकी नामों की वेरिफिकेशन प्रॉसेस शुरू हो गई है। दूसरी लिस्ट भी जल्द जारी की जा सकती है। हालांकि, वेरिफिकेशन प्रॉसेस इस साल के आखिर में पूरी हो जाएगी। इस वेरिफिकेशन प्रॉसेस का मकसद उन बांग्लादेश की सीमा से लगे असम में गैरकानूनी तरीके से रह रहे लोगों की पहचान करना है।

    5 तरीकों से चेक किया जा सकता है ड्राफ्ट में नाम

    पहला: 31 जनवरी तक सेवा केंद्रों पर सुबह 10 से शाम 4 बजे के बीच लिस्ट के जरिए नाम चेक किया जा सकता है। सभी वर्किंग डेट्स पर नाम लिस्ट में चेक किए जा सकते हैं।

    दूसरा: www.nrcassam.nic.in, www.assam.mygov.in, www.assam.gov.in और www.homeandpolitical.assam.gov.in पर ऑनलाइन नाम चेक किया जा सकता है।

    तीसरा: एप्लीकेंट्स के पहले से रजिस्टर्ड नंबर से 9765556555 या 9108464438 और 9108464450 पर SMS कर ऑटोमेटिक रेसिप्ट हासिल कर सकते हैं।

    चौथा:ऊपर दिए मोबाइल नंबर पर डिमांड SMS भेजकर नाम चेक किया जा सकता है। SMC में टाइप करना होगा ARN स्पेस 21 डिजिट का एप्लीकेशन रेसिप्ट नंबर (ARN)।

    पांचवां: एप्लीकेंट्स टोल फ्री नंबर्स पर कॉल करके भी नाम के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। असम में रहने वालों के लिए नंबर 15107 और असम के बाहर रहने वालों के लिए नंबर 18003453762 है।

    NRC ने क्या कहा?

    - एनआरसी ड्राफ्ट की जानकारी रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया शैलेष ने दी। उन्होंने कहा- ये एनआरसी का पहला ड्राफ्ट है। इसमें उन 1.9 करोड़ लोगों के नाम हैं, जिनका वेरिफिकेशन हो चुका है। जैसे-जैसे बाकी नामों का वेरिफिकेशन होता जाएगा, हम ड्राफ्ट जारी करते रहेंगे।
    - एनआरसी के स्टेट को-ऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला ने कहा- जरूरी नहीं है कि सभी नाम इस लिस्ट में आ गए हों। जिनके नाम इसमें नहीं आ पाए हैं, उन्हें फिक्र करने की जरूरत नहीं है। नामों का वेरिफिकेशन एक लंबी प्रॉसेस है।
    - प्रतीक ने आगे कहा- हो सकता है कि कई ऐसे नाम इस लिस्ट से छूट गए हों जो सिंगल फैमिली से आते हों। बचे हुए डॉक्युमेंट्स का वेरिफिकेशन किया जा रहा है। लिहाजा, लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
    - हजेला ने कहा कि ये प्रॉसेस इस साल के आखिर तक पूरी कर ली जाएगी।

    सरकार ने क्या कहा?

    - शैलेष ने कहा, "NRC बेमिसाल है। इसके जैसा देश में दूसरा उदाहरण नहीं है। मुझे नहीं लगता है कि दुनिया के किसी दूसरे देश में लोगों की नागरिकता की पहचान के लिए इस तरह की प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया हो। हम बिना किसी गलती के ड्राफ्ट्स पब्लिश करने के मकसद के साथ काम कर रहे हैं। अगला ड्राफ्ट कब पब्लिश किया जाएगा, ये सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस तय होगा। हम पूरी प्रक्रिया इस साल के अंत तक खत्म कर लेंगे।"

    क्या है मामला?

    - दरअसल, असम में रह रहे लाखों लोगों को ये साबित करना है कि उनके माता-पिता 1971 में बांग्लादेश बनने से पहले ही यहां आकर रहने लगे थे। यानी वो बांग्लादेश बनने के बाद असम नहीं आए।
    - बता दें कि असम में पिछले कई साल से गैरकानूनी तौर पर बांग्लादेश से आकर यहां रहने वालों का मुद्दा उठता रहा है।

    दो साल पहले शुरू हुई थी प्रॉसेस

    - केंद्र और राज्य सरकार के साथ आॅल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के बीच राज्य में रहने वाले नागरिकों का कानूनी दस्तावेजीकरण (legal documentation) करने का फैसला 2005 में लिया गया था।
    - इसके तहत उन लोगों की पहचान की जानी थी जो बांग्लादेश बनने के बाद असम आए और यहां रहने लगे। इसके बाद ही असम में एनआरसी अपडेशन शुरू हुआ।
    - एप्लिकेशन प्रॉसेस मई 2015 में शुरू हुई। असम के 68.27 लाख परिवारों से 6.5 करोड़ दस्तावेज आए। इसका पहला ड्राफ्ट 31 जनवरी की रात को जारी किया गया। एनआरसी सेंटर पर लोग अपने नाम इस लिस्ट में चेक कर सकते हैं। ऑनलाइन और एसएमएस के जरिए भी ये काम किया जा सकता है।
    - एनआरसी के राजनीतिक मायने भी हैं। बीजेपी लगातार इस मुददे को उठाती रही है। 2016 में असम में बीजेपी की पहली बार सरकार बनी। बीजेपी के सत्ता में आने की एक वजह एनआरसी ड्राफ्ट जारी करने की मांग भी थी।

    इससे पहले NCR कब अपडेट हुई थी?

    - इससे पहले 1951 में असम में NCR अपडेट हुई थी। तब राज्य में 80 लाख नागरिक दर्ज किए गए थे।

    ये आंदोलन कब शुरू हुआ था?

    - 1971 में आसू ने असम में बांग्लादेश से आए अवैध अप्रवासियों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। ये 6 साल तक चला। इसके चलते 15 अगस्त 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सामने असम अकॉर्ड पर साइन किए गए।

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