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भारत को सांस्कृतिक महाशक्ति बनाने के लिए अब तक क्या किया? बताएगा विदेश मंत्रालय

मुकेश कौशिक | Last Modified - Jan 02, 2018, 08:06 AM IST

चीन ने कल्चरल डिप्लोमेसी के लिए 20 अरब डॉलर का बजट रखा है। इसके मुकाबले भारतीय संस्था का कुल बजट मात्र 215 करोड़ है।
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    पीएम मोदी बौद्ध सर्किट देशों की यात्रा कर रहे हैं। इनमें श्रीलंका, कंबोडिया, दक्षिण कोरिया, जापान जैसे देश हैं। (फाइल)

    नई दिल्ली.भारत सरकार इन दिनों ‘सॉफ्ट पावर’ बनने की दिशा में काम कर रही है। ‘सॉफ्ट पावर’ बनने से मतलब है, कल्चरली भारत का महाशक्ति बनना। विदेश मंत्रालय इसका खाका तैयार कर रहा है। इसके तहत उसका जोर इस पर भी है कि इसे स्मार्ट तरीके से कैसे आगे बढ़ाया जाए। इसे उन्होंने ‘स्मार्ट पावर’ कहा है। अब संसद से जुड़ी स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) 3 जनवरी को पड़ताल करेगी कि विदेश मंत्रालय ने इसके लिए जमीनी मोर्चे पर क्या कदम उठाए हैं। सुषमा स्वराज की अगुवाई वाला मंत्रालय उन्हें इसका जवाब देगा।

    - विदेश मंत्रालय ने कुछ दिन पहले इस बारे में स्टैंडिंग कमेटी को अपनी सिफारिशें सौंपी थीं। उन सिफारिशों के अमल के बारे में भी विदेश मंत्रालय से जवाब-तलब किया जाएगा। भारत को चीन से चुनौती मिल रही है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि चीन का बजट इस मामले में भारत से कहीं ज्यादा है।

    - इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिसर्च भारत की ओर से दुनियाभर में सांस्कृतिक अभियान चलाती है। मगर यह वित्तीय तंगी से जूझ रही है।

    20 अरब डॉलर का बजट रखा चीन ने

    -मंत्रालय ने संसदीय समिति को सूचित किया है कि चीन ने कल्चरल डिप्लोमेसी के लिए 20 अरब डॉलर का बजट रखा है। इसके मुकाबले भारतीय संस्था का कुल बजट मात्र 215 करोड़ रुपये है।

    - अफसर बताते हैं कि चीन बौद्ध धर्म को अपना बताने से लेकर कंफ्यूशियस तक के ज्ञान के सहारे दुनिया में खुद को सॉफ्ट पावर के रूप में स्थापित करने के अभियान में जुटा है। चीन ने विश्वभर में करीब 250 कंफ्यूशियस इंस्टीट्यूट कायम कर दिए हैं।

    सॉफ्ट पावर बनने के ये औजार सिर्फ हमारे पास

    - विविध संस्कृति, राजनीतिक मूल्य, आध्यात्मिक ज्ञान, खान-पान, बेहतरीन व्यंजन, कला और संगीत, नृत्य, अहिंसा का अस्त्र, धार्मिक बहुलता दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

    - गांधी ‘दर्शन’ भी अहम: विदेश सचिव एस जयशंकर ने कमेटी को जानकारी दी कि प्रवासी भारतीयों के बीच महात्मा गांधी के दर्शन को ले जाने के लिए प्रवासी भारतीय केंद्र अहम भूमिका निभा सकते हैं। पीएम ने दक्षिण अफ्रीका की यात्रा में पीटरमार्टिज़बर्ग का दौरा किया था। यह वह स्टेशन है जहां महात्मा गांधी को ट्रेन से फेंका गया था। यह भी भारत की सॉफ्ट डिप्लोमेसी का हिस्सा था।

    सांस्कृतिक ताकत की जंग : ‘बुद्ध कूटनीति’ से लेकर बॉलीवुड और भेलपूरी तक का सहारा

    - फिल्म और सीरियल भी मददगार: विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सॉफ्ट पावर बनने में बॉलीवुड-भेलपुरी भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। फिल्मों-सीरियलों के गैर कमर्शियल राइट्स को लेकर भारतीय मिशन धाक जमा रहा है।

    - बौद्ध सर्किट देशों की यात्राएं:पीएम मोदी बौद्ध सर्किट देशों की यात्रा कर रहे हैं। इनमें श्रीलंका, कंबोडिया, दक्षिण कोरिया, जापान जैसे देश हैं।

    - धरोहरों से धाक: योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने के बाद भारतीय पर्व नवरोज को विश्व की अमूर्त धरोहर का दर्जा मिला।
    - कुंभ मेले को यूनीसेफ ने धरती के सबसे शांतिपूर्ण मेले के तौर पर मानवता की अमूर्त धरोहर घोषित किया।

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    कुंभ मेले को यूनीसेफ ने धरती के सबसे शांतिपूर्ण मेले के तौर पर मानवता की अमूर्त धरोहर घोषित किया। (फाइल)
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Web Title: India As Soft Power Foreign Ministry Will Answer Parliament Committee
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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