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अब बंगाल में देवधर की मांग

त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के सूत्रधार हैं सुनील देवधर। नागपुर के रहने वाले संघ प्रचारक।

डॉ. भारत अग्रवाल | Last Modified - Mar 07, 2018, 06:00 PM IST

अब बंगाल में देवधर की मांग

त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के सूत्रधार हैं सुनील देवधर। नागपुर के रहने वाले संघ प्रचारक। अमित शाह ने उन्हें चार साल पहले त्रिपुरा भेजा था। वाराणसी से मोदी के चुनाव में भी वॉर रूम में रहते थे। उनके पिता आपातकाल के दौरान मराठी अखबार लोकसत्ता के संपादक रहे थे। त्रिपुरा जाकर देवधर ने बांग्ला और एक स्थानीय बोली कोक बराक सीखी। अब कोलकाता से मांग की जा रही है कि सुनील देवधर को पश्चिम बंगाल भेजा जाए।

यूपी या एमपी!

अरुण जेटली का राज्यसभा का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। लेकिन इस बार गुजरात की स्थितियां थोड़ी भिन्न हैं, लिहाजा उन्हें गुजरात के बजाए उत्तरप्रदेश से राज्यसभा में लाने पर विचार हो रहा है। उधर मध्यप्रदेश बीजेपी के कुछ लोग चाहते हैं कि वह 2019 का लोकसभा चुनाव विदिशा से लड़ें। दिक्कत यह है कि ये वाला अप्रैल 2018 में पड़ रहा है, और लोकसभा चुनाव 2019 में। तब तक क्या करें? पेंच यही है।

गोल पोस्ट सिक्किम

फुटबॉल खिलाड़ी बाईचुंग भूटिया ने ममता बनर्जी को टाटा क्यों किया? भूटिया ने ममता से साफ कह दिया था कि उनका ममता से कतई बैर नहीं है, लेकिन वह अपने राज्य सिक्किम की राजनीति करना चाहते हैं। चर्चा यह है कि किरण रिजिजू उनके निजी मित्र हैं और रिजिजू के जरिए बीजेपी ने भूटिया तक संदेश भिजवाया था कि वह सिक्किम के मुख्यमंत्री पद के भावी दावेदार हो सकते हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री भी बीजेपी के मित्र हैं, लेकिन अब उनकी उम्र हो रही है।

जया बच्चन पर दांवबाजी

ममता बनर्जी चाहती हैं कि जया भादुड़ी बच्चन पश्चिम बंगाल से राज्यसभा जाएं। खबर अखबार में छप गई, तो अखिलेश ने ममता बनर्जी को फोन किया कि हम चाहते हैं कि जया बच्चन यूपी से ही राज्यसभा में जाएं। हो सकता है कि उनके नाम पर मायावती भी समर्थन कर दें और हो सकता है कि बीजेपी के भी कुछ लोग समर्थन कर दें। देखिए, क्या होता है।

कनाडा के साथ ट्रैक टू

कनाडा का मामला फंसा हुआ है। पंजाब में खालिस्तान समर्थक फिर सक्रिय हो रहे हैं। कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के भारत आने के पहले ही प्रधानमंत्री ने संदेश भिजवा दिया था। लेकिन कनैडे वाले सिखों के बीच वोट बैंक की राजनीति करने वाले वहां के नेता कट्टर खालिस्तानियों के बीच खूब उठ-बैठ रहे हैं। 2017 में टोरंटो के नगर कीर्तन में आतंकवादियों की तस्वीरें लगाई गई थीं और जस्टिन ट्रूडो भी उसमें शामिल हुए थे। फिर अटवाल का मामला। लेकिन भारत को एनएसजी सदस्यता देने का कनाडा समर्थन करता है। आपसी व्यापार भी काफी है। लिहाजा प्रधानमंत्री ने कनाडा के साथ ट्रैक टू कूटनीति शुरू करने के लिए विदेश सचिव से कहा है। यह काम कनाडा में राजदूत रह चुके विष्णु प्रकाश को सौंपा गया है।

चुनाव तो तभी होगा
क्या 2019 का लोकसभा चुनाव इसी साल दिसम्बर में करा लिया जाएगा? चुनाव आयोग इससे साफ इनकार करता है। कहीं कोई ऐसी हलचल नहीं है। पीएम भी पूर्ण कार्यकाल के पक्ष में हैं और अगले चुनाव आयुक्त की नियुक्ति भी जनवरी 2019 में होनी है। माने दिसम्बर में चुनाव की कोई संभावना नहीं है।

बंगाली झाड़फूंक
त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के पहले आईटीबीपी के महानिदेशक रंजीत पचनंद चुनाव आयोग के प्रेक्षक की हैसियत से अगरतला गए थे। बात खासी महत्व की है। पचनंद पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं, उनके पिता सेना में रह चुके हैं और खुद वह भी कोलकाता के पुलिस आयुक्त रह चुके हैं। माने इलाके को, भाषा को और सबसे महत्वपूर्ण हथकंडों को खूब अच्छी तरह जानते थे। पचनंद ने बूथ कब्जे की संभावनाओं का अध्ययन किया। उनकी रिपोर्ट पूरी तरह पेशेवर और तटस्थ थी, लेकिन चुनाव में वह बहुत बड़ा मंत्र साबित हुई।

पर्रिकर का आत्मविश्वास
मनोहर पर्रिकर के स्वास्थ्य को लेकर पीएम भी चिंतित हैं। पीएम चाहते हैं कि पर्रिकर का पूरा उपचार हो, चाहे उन्हें सिंगापुर ही क्यों न जाना पड़े। लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो गोवा में कोई कार्यकारी मुख्यमंत्री नियुक्त करना पड़ेगा। पर्रिकर ने पीएम से कहा है कि आप चिंता न करें, मैं ठीक हो रहा हूं।

तय हो गए मुद्दे
सुना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में दो बड़े मुद्दे होंगे- भ्रष्टाचार और कॉमन सिविल कोड।

घरेलू मामला
एमटीएनएल और बीएसएनएल - एक ही मंत्रालय के दो पीएसयू आपस में बुरी तरह उलझे पड़े हैं। अब ऊपर के स्तर पर इस रस्साकशी पर कार्रवाई होना शुरू हो गई है।

ठिकानों की तलाश
अब जब लोकसभा का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, कुछ मंत्रियों के निजी सचिवों ने वापस केन्द्र या राज्य सरकारों में नौकरी की जुगत लगाना शुरू कर दिया है।

..थे, ..हुए.., हो रहे हैं..
यूपी के कुछ अफसर हर मुख्यमंत्री के पसंदीदा बन लेते हैं। नवनीत सहगल की मायावती से निकटता जगजाहिर थी। फिर अखिलेश यादव से निकटता जगजाहिर हुई, अब, इंवेस्टर समिट के बाद, योगी से निकटता जगजाहिर होने जा रही है।

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Web Title: ab bngaaal mein devdhr ki maang
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