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SC के जजों ने सही मसले उठाए हैं, इनका निपटारा ज्यूिडशियरी के भीतर हो: 4 रिटायर्ड जजों का CJI को खत

चार रिटायर्ड जजों ने रविवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा को ओपन लेटर लिखा।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 14, 2018, 08:10 PM IST

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    दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह ने बताया कि 4 जजों ने अपने लेटर में लिखा है कि मसलों का निपटारा ज्यूडिशियरी के भीतर हो। - फाइल

    नई दिल्ली.चार रिटायर्ड जजों ने रविवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा को ओपन लेटर लिखा। रिटा. जजों ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने जो मसले उठाए हैं, हम उनसे सहमत हैं। इनमें केसों का आवंटन भी शामिल है। इस मामले का निपटारा ज्यूडिशियरी के भीतर ही किया जाना चाहिए।' सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बीपी सावंत, दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज के चंद्रू और बॉम्बे हाईकोर्ट के जज एच सुरेश ने CJI को खत लिखा। बता दें कि शुक्रवार को जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ ने 20 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें जजों ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में कुछ महीनों से सब ठीक नहीं चल रहा है।

    CJI को खत में क्या लिखा रिटायर्ड जजों ने?

    1) संवैधानिक बेंच के सामने लाए जाएं मसले
    - जस्टिस शाह ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया, "सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की तरह हम भी चाहते हैं कि ये समस्या सुलझनी चाहिए। अहम मुद्दों को पांच सीनियर जजों की संवैधानिक बेंच के सामने लाया जाए। SC के 4 सीनियर जजों ने केसों के आवंटन, खासतौर पर संवेदनशील केसों के एलोकेशन के मसले उठाए। ये गंभीर मसला है।"

    2) मनमाने ढंग से केसों को बेंचों के पास नहीं भेज सकते CJI
    - "जजों ने कहा कि केसों को सही ढंग से अलॉट नहीं किया गया, इन्हें मनमाने ढंग से तय बेंचों को सौंपा गया है। उन्होंने (जजों) इस पर गंभीर चिंता जाहिर की है। इसका इंसाफ और कानून के नियमों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। हम इस बात से सहमत हैं कि CJI रोस्टर का मालिक होता है। लेकिन, वो संवेदनशील केसों को मनमाने ढंग से अपनी चुनी हुई जूनियर जजों की बेंचों को नहीं भेज सकता है।"

    3) केसों के अलॉटमेंट के साफ और स्पष्ट नियम बनें
    - लेटर में रिटायर्ड जजों ने कहा, "इस मसले को सुलझाया जाना चाहिए। केसों को बेंचों के पास सुनवाई को भेजने के लिए स्पष्ट नियम-कायदे बनाए जाने चाहिए, जो तार्किक हों, साफ हों और पारदर्शी हों। जनता का विश्वास स्थापित करने के लिए ऐसा तुरंत किया जाना चाहिए।"

    4) फिलहाल केसों की सुनवाई संवैधानिक बेंच करे
    - "जब तक केसों के अलॉटमेंट के नियम नहीं बन जाते हैं, तब तक सभी महत्वपूर्ण केस, संवेदनशील केसों... जिनमें पेंडिंग केस भी शामिल हैं, उन्हें 5 सीनियर जजों की संवैधानिक बेंच के पास भेजा जाना चाहिए। इसी तरह के कदम उठाकर हम जनता को ये भरोसा दिला सकते हैं कि सुप्रीम कोर्ट साफ और पारदर्शी तरीके से चल रहा है और CJI की रोस्टर तय करने की ताकत का इस्तेमाल संवेदनशील केसों में खास नतीजे हािसल करने के लिए नहीं किया जा रहा है।"

    सुप्रीम कोर्ट के जजों ने 7 पन्नों के लेटर में क्या लिखा था?

    - शुक्रवार को जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद CJI को लिखी 7 पन्नों की चिट्ठी जारी की थी। इसमें कहा गया- बेहद दुख और चिंता के साथ हम आपके सामने अपनी बात रखना चाहते हैं। इस कोर्ट (SC) के कुछ फैसलों ने पूरी न्याय व्यवस्था और हाईकोर्ट्स की स्वतंत्रता पर उल्टा प्रभाव डाला। माननीय CJI के ऑफिस के कामकाज पर भी इसका असर पड़ा। (पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)

    मीडिया के सामने क्या कहा था जजों ने?


    - सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जज जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ एक साथ मीडिया के सामने आए थे। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का एडमिनिस्ट्रेशन ठीक से काम नहीं कर रहा है और चीफ जस्टिस की ओर से ज्युडिशियल बेंचों को सुनवाई के लिए केस मनमाने ढंग से दिए जा रहे हैं। इससे ज्युडिशियरी के भरोसे पर दाग लग रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इंस्टीट्यूशन को ठीक नहीं किया गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। (पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)

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    शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे चेलमेश्वर।
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