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आधार से सरकार को ऐसा स्विच मिला, जो किसी की सिविल डेथ कर सकता है: SC में सीनियर वकील

आधार को जरूरी किए जाने को लेकर 27 पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट की कॉन्स्टीट्यूशनल बेंच में सुनवाई शुरू।

पवन कुमार | Last Modified - Jan 18, 2018, 06:17 AM IST

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    कोर्ट ने पूछा- मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट के साथ आधार लिंक करना कितना सही? -सिम्बॉलिक

    नई दिल्ली.आधार की वैधानिकता (Legitimacy) और जरूरी किए जाने को लेकर सु्प्रीम कोर्ट की पांच जजों की कॉन्स्टीट्यूशनल बेंच ने बुधवार से सुनवाई शुरू की। पिटिशनर के वकील श्याम दीवान ने अपनी दलीलें रखीं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दायर 27 पिटिशन की एक साथ सुनवाई कर रहा है। इस दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा, "क्या इस बात का ख्याल रखा जा सकता है कि जिस मकसद से डाटा लिया गया है, उसका इस्तेमाल सिर्फ उसी काम के लिए हो?" दीवान ने कहा, "वे खुलासा करेंगे कि ऐसा नहीं हो रहा है। आधार ऐसा स्विच है जो किसी भी व्यक्ति की सिविल मौत का कारण बन सकता है। इसे अनिवार्य करना नागरिकों के अधिकारों की हत्या करने के बराबर है।" इस मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

    पिटिशनर के वकील ने इन सवालों के जवाब मांगे

    - आधार कानून की संवैधानिकता(Constitutionality) पर जवाब।
    - क्या आधार कानून के मुताबिक सही है?
    - क्या किसी को हक है कि वह पहचान-पत्र के लिए फिंगरप्रिंट या शरीर के किसी अन्य हिस्से की पहचान सरकार को दे या नहीं?

    - निजी जानकारी साझा करना सिक्युरिटी के लिए खतरा है या नहीं?
    - आधार कार्ड को मनी बिल की तरह क्यों पेश किया गया?
    - मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट के साथ आधार लिंक करना कितना सही?
    - पब्लिक बेनेफिशियरी में यह जरूरी क्यों है?

    - इनकम टैक्स रिटर्न में इसकी जरूरत क्यों है?

    इसे जरूरी करना नागरिकों के हक की हत्या करने जैसा- पिटिशनर के वकील

    वेणुगोपाल: फरवरी में अयोध्या मामले की भी सुनवाई होनी है। आधार मामला भी बेहद जटिल है। इसलिए कॉन्स्टीट्यूशनल बेंच सभी पक्षकारों के बोलने का वक्त तय करे।

    दीवान: अगले हफ्ते बता पाऊंगा कि दलीलें कब तक पूरी हो पाएंगी। क्या कॉन्स्टीट्यूशन सरकार को नागरिकों का निजी डाटा लेने के लिए मजबूर करने का हक देता है? बीते 7 साल से बिना किसी वैध कानूनी ढांचे के यह संचालित हो रहा है।


    जस्टिस भूषण: इस मामले में ब्रॉड गाइड लाइन हैं और शायद इसमें सबकुछ शामिल है।
    दीवान: बायोमीट्रिक डाटा स्टोर करना अवैध था। यह गलती आधार कानून बनाते वक्त दूर नहीं की गई।


    जस्टिस सिकरी:क्या इस गड़बड़ी की वजह से पूरा डाटा बेस नष्ट करना होगा?
    दीवान: हां, ऐसा करना ही होगा।

    जस्टिस चंद्रचूड़: डाटा बेस की क्रॉस लिंकिंग क्या है?
    दीवान: आधार इसे सक्षम बनाता है और प्रोफाइलिंग की इजाजत देता है। सवाल यह नहीं है कि वे आप पर नजर रखते हैं या नहीं? आधार का ढांचा ही खराब है, क्योंकि इससे शासन का वर्चस्व कायम होता है।

    चीफ जस्टिस: क्या आधार बिल को स्टेंडिंग कमेटी के पास भेजा गया था?
    दीवान: नहीं भेजा गया।

    जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस सिकरी: क्या आधार बायोमीट्रिक सिस्टम अमेरिकी वीजा बायोमीट्रिक सिस्टम से अलग है? क्या पिटिशनर यह कहना चाहते हैं कि जब कानून नहीं था तो उस दौरान (2009 और 2016 के बीच) का डाटा नष्ट कर दिया जाए?
    दीवान: अमेरिका में कोई भी एक प्रोफाइल का इस्तेमाल नहीं कर रहा। जबकि, यहां पर ऐसा हो रहा है। इसलिए यह अलग है। सही प्रिंट न आने की वजह से 6.2 करोड़ बायोमीट्रिक नष्ट कर दिए गए। ये लोग आत्मा या बेईमान लोग नहीं थे। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। खामियों के कारण ही इंग्लैंड की सरकार ने बायोमीट्रिक सिस्टम को वापस ले लिया था।

    कौन सी बेंच कर रही है सुनवाई?

    5 जजों की कॉन्स्टीट्यूशनल बेंच की अध्यक्षता चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा कर रहे हैं। बेंच में जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं। इस मामले की लंबे वक्त से जस्टिस जे चेलमेश्वर सुनवाई कर रहे थे, लेकिन न तो वह और न ही मीडिया से बात करने वाले अन्य तीन सीनियर जजों को चीफ जस्टिस ने कॉन्स्टीट्यूशनल बेंच में रखा है।

    किन पिटीशनर्स के लिए जिरह कर रहे हैं दीवान?
    श्याम दीवान पूर्व कर्नाटक हाईकोर्ट जज जस्टिस केएस पुट्टास्वामी, एक्टिविस्ट अरुणा रॉय, शांता सिन्हा और सीपीएम लीडर वीएस अच्युतानंदन की पिटीशंस पर सुप्रीम कोर्ट में जिरह कर रहे हैं।

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    आधार को जरूरी किए जाने को लेकर बुधवार को शुरू सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में गुरू़वार को भी जारी रहेगी। -फाइल
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Web Title: Aadhaar An Electronic Leash On Citizens: Senior Lawyer In SC
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