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लाभ का पद: सदस्यता गंवाने वाले AAP के 20 MLAs ने हाईकोर्ट में दायर पिटीशंस वापस लीं

दिल्ली के 20 विधायकों को लाभ के पद मामले में अयोग्य ठहराया गया है। केजरीवाल ने इन्हें संसदीय सचिव बनाया था।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 05:09 PM IST
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नई दिल्ली. ऑफिस ऑफ प्रॉफिट (लाभ के पद) मामले में अयोग्य ठहराए गए आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर पिटीशन वापस ले लीं। सोमवार को उनके वकील ने कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग (EC) की सिफारिशों को मंजूर करते हुए नोटिफिकेशन जारी किया है, इसलिए इन अर्जियों का कोई मतलब नहीं रहा। मंगलवार को नई पिटीशन फाइल करेंगे। बता दें कि ईसी ने संसदीय सचिव का पद रखने पर आप विधायकों की सदस्यता रद्द करने के लिए 19 जनवरी को राष्ट्रपति से सिफारिश की थी। जिसे रविवार को मंजूरी मिल गई।

EC की सिफारिश के खिलाफ कोर्ट गए थे MLA

- सोमवार को आप विधायकों के वकील मनीष वशिष्ठ ने कोर्ट को बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग की सिफारिश को मंजूर कर लिया है। 20 तारीख को ही इस बारे में नोटिफिकेशन जारी हो गया था। इसलिए अब इस पिटीशन का कोई मतलब नहीं रहा। प्रेसिडेंट के ऑर्डर को देखने के बाद नई पिटीशन फाइल करेंगे।

- इस पर दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस रेखा पल्ली ने विधायकों की ओर से दायर पिटीशन वापस लेने की इजाजत देते हुए इसे खारिज मान लिया। वहीं, कोर्ट ने 19 जनवरी को ईसी की सिफारिश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और विधायकों को अंतरिम राहत नहीं दी थी।

हाईकोर्ट ने अर्जी रद्द की तो SC जाएंगे MLAs

- उधर, आम आदमी पार्टी के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी से कहा कि अब अगर हाईकोर्ट नई पिटीशन को रद्द करता है तो फैसले से प्रभावित विधायक सुप्रीम का दरवाजा खटखटाएंगे।

- विधायक अलका लांबा ने रविवार को कहा था कि राष्ट्रपति ने जल्दबाजी में फैसला लिया। हमें बोलने का मौका तक नहीं मिला। न्यायपालिका पर भरोसा है, सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे भी खुले हैं।

देश में एक केजरीवाल ही भ्रष्ट मिला

- इस फैसले पर अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा था, '"हमारे 20 विधायकों पर झूठे केस कर दिए, मुझ पर सीबीआई की रेड करा दी और तब भी इनको कुछ नहीं मिला। सिर्फ चार मफलर मिले। इनको पूरे देश में केजरीवाल ही करप्ट मिला, बाकी सब ईमानदार हैं।''
- ''एलजी ने हमारी सरकार की 400 फाइलें बुलाईं, लेकिन उन्हें भी हमारे खिलाफ कुछ नहीं मिला। अब हमारे 20 विधायकों को डिसक्वालिफाई कर दिया। वे हमें हर तरह से परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं।''

सत्य के रास्ते में परेशानियां तो आती ही हैं

- मुख्यमंत्री ने पार्टी वर्कर्स से कहा, ''सत्य के रास्ते पर चलने वाले हर किसी के सामने कई परेशानियां आती हैं, लेकिन याद रखें कि आखिर में जीत उसी की होती है।''
- केजरीवाल ने ट्वीट भी किया, ''ऊपर वाले ने 67 सीट कुछ सोच कर ही दी थीं। हर कदम पर ऊपर वाला आम आदमी पार्टी के साथ है, नहीं तो हमारी औकात ही क्या थी? बस सच्चाई का रास्ता मत छोड़ना।''

इन 20 विधायकों की सदस्यता रद्द

- अयोग्य ठहराए गए दिल्ली के विधायकों में आदर्श शास्त्री (द्वारका), अल्का लांबा (चांदनी चौक), अनिल वाजपेयी (गांधी नगर), अवतार सिंह (कालकाजी), कैलाश गहलोत (नजफगढ़), मदन लाल (कस्तूरबा नगर), मनोज कुमार (कोंडली), नरेश यादव (महरौली), नितिन त्यागी (लक्ष्मी नगर), प्रवीण कुमार (जंगपुरा), राजेश गुप्ता (वजीरपुर), राजेश ऋषि (जनकपुरी), संजीव झा (बुराड़ी), सरिता सिंह (रोहतास नगर), सोम दत्त (सदर बाजार), शरद कुमार (नरेला), शिव चरण गोयल (मोति नगर), सुखवीर सिंह (मुंडका), विजेंदर गर्ग (रजिंदर नगर) और जरनैल सिंह (तिलक नगर) के नाम शामिल हैं।

लाभ के पद का मुद्दा किसने उठाया?

- मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने ही 8 सितंबर, 2016 को विधायकों के संसदीय सचिवों के तौर पर अप्वाइंटमेंट को रद्द कर दिया था।

- इसके बाद वकील प्रशांत पटेल ने आप विधायकों की शिकायत चुनाव आयोग से की। साथ ही पिटीशन में इसे लाभ का पद मानते हुए विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई। ईसी ने 21 विधायकों को नोटिस जारी किया था।
- बता दें कि एक विधायक जरनैल सिंह (राजौरी गार्डन) ने पंजाब विधानसभा चुनाव के वक्त पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में से उनका नाम अलग कर लिया गया और विधायकों की संख्या 20 रह गई।

फैसले का केजरी सरकार पर क्या असर पड़ेगा?

- इस फैसले से मोदी सरकार को कोई संकट नहीं है। 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद भी AAP के पास बहुमत से 10 विधायक ज्यादा हैं। हालांकि, जिन विधायकों की सदस्यता रद्द की गई है, वहां अब बाई इलेक्शंस होंगे।

दिल्ली विधानसभा

- कुल सीट: 70

- AAP:66-20 = 46

- BJP:4

- बहुमत के लिए जरूरी: 36

ऑफिस ऑफ प्रॉफिट क्या होता है?

- कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 102 (1) (ए) के तहत सांसद या विधायक ऐसे किसी और पद पर नहीं हो सकता, जहां अलग से सैलरी, अलाउंस या बाकी फायदे मिलते हों।
- इसके अलावा आर्टिकल 191 (1)(ए) और पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव एक्ट के सेक्शन 9 (ए) के तहत भी ऑफिस ऑफ प्रॉफिट में सांसदों-विधायकों को अन्य पद लेने से रोकने का प्रोविजन है।
- संविधान की गरिमा के तहत ‘लाभ के पद’ पर बैठा कोई व्यक्ति उसी वक्त विधायिका का हिस्सा नहीं हो सकता।