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गुजरात: AAP के सभी 27 कैंडिडेट्स की जमानत जब्त, 15 को 500 से भी कम वोट मिले

गुजरात से पहले पार्टी ने फरवरी, 2017 में पंजाब और गोवा में विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे बुरी तरह से हार मिली।

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 12:36 PM IST
गुजरात चुनाव के लिए केजरीवाल ने गोपाल राय को प्रभारी बनाया था। -फाइल गुजरात चुनाव के लिए केजरीवाल ने गोपाल राय को प्रभारी बनाया था। -फाइल

नई दिल्ली. गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की करारी हार हुई। आप ने यहां 29 कैंडिडेट्स चुनाव मैदान में उतारे थे, लेकिन जब सोमवार को नतीजे सामने आए तो सभी की जमानत जब्त हो गई। 16 कैंडिडेट्स को 500 से भी कम वोट मिले। उधर, गुजरात में एक दिलचस्प आंकड़ा भी सामने आया। सिर्फ एक सीट को छोड़कर नोटा की संख्या आप के वोटों से ढाई गुना ज्यादा रही। इससे झारखंड, साउथ और मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले पैर जमाने की कोशिश कर रही आप को बड़ा झटका लगा। बैकफुट पर आए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के सभी बड़े नेता चुप्पी साधे हुए हैं। बता दें कि गुजरात की कुल 182 सीटों में से बीजेपी को 99, कांग्रेस 77 और अन्य को 6 पर जीत मिली।

AAP ने क्या- ईवीएम जीत गया, गुजरात हार गया

- नतीजों पर गुजरात के पार्टी स्पोक्सपर्सन हर्षिल नायक ने न्यूज एजेंसी से कहा कि कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी करने में देरी और सेंट्रल लीडर का कैम्पेन से नदारद रहना हार की बड़ी वजह है। पहले तो यही साफ नहीं था कि चुनाव लड़ना है या नहीं। लीडरशिप ने काफी बाद में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया। इससे नुकसान हुआ।

- आप की तरफ से सिर्फ दो नेताओं के कमेंट सामने आए। पार्टी स्पोक्सपर्सन सौरभ भारद्वाज ने कहा, ''ईवीएम जीत गया, गुजरात हार गया।''

AAP से ढाई गुना ज्यादा आगे NOTA
- गुजरात में नोटा (None of the Above) में आप से ढाई गुना ज्यादा वोट पड़े। पार्टी को सभी सीटों पर करीब 29 हजार वोट मिले, जबकि 75,880 वोटर्स ने सभी पार्टियों के कैंडिडेट्स को खारिज करते हुए ईवीएम में दिए नोटा ऑप्शन को चुना।
- आप के सिर्फ एक कैंडिडेट को नोटा से ज्यादा वोट हासिल हुए। काटरगाम सीट पर आप को 4,135 वोट मिले और 1,693 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।

केजरी ने की थी BJP कैंडिडेट्स को हराने की अपील

- गुजरात चुनाव के लिए पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत कई पार्टी नेताओं ने कैंडिडेट्स के लिए प्रचार किया था। लेकिन वोटिंग से पहले केजरीवाल ने दिल्ली के रामलीला मैदान में केजरीवाल ने वोटर्स से कहा कि अगर आपको लगता है कि गुजरात की किसी सीट पर आम आदमी पार्टी का कैंडिडेट जीतने की स्थिति में नहीं है तो आप लोग हमें वोट मत दीजिए, लेकिन बीजेपी को हराना है।

गुजरात में डेरा डाले रही गोपाल राय की टीम

- आप ने गुजरात फतह के लिए पार्टी के सीनियर लीडर गोपाल राय को राज्य का प्रभारी बनाया था। पिछले छह महीने के दौरान गोपाल राय ने करीब 12 बार गुजरात का दौरा किया।
- चुनाव के दौरान दो महीने से राय और उनकी टीम ज्यादातर वक्त गुजरात में ही रही। बेहतर प्रदर्शन के लिए गोपाल राय ने कैंडिडेट्स की लिस्ट भी दिल्ली के बजाय अहमदाबाद में जारी की थी। बावजूद इसके पार्टी को एक सीट पर भी जीत हासिल नहीं हुई।

AAP तीन बार दिल्ली से बाहर गई, लेकिन हार मिली

- दिल्ली विधानसभा में बहुमत हासिल करने वाली AAP के लिए ये साल अच्छा नहीं रहा। गुजरात चुनाव से पहले पार्टी ने फरवरी, 2017 में पंजाब और गोवा में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उसे बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा।
- इसके बाद अप्रैल में हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) के चुनाव में भी आम आदमी पार्टी को हारकर विपक्ष में बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा। तब पार्टी के कई नेताओं ने लीडरशिप के फैसलों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद केजरीवाल ने कहा था कि अब पार्टी का पूरा फोकस दिल्ली पर होगा।

एमपी, झारखंड और साउथ की तैयारियों को झटका

- आप के एक आला नेता ने महज एक सप्ताह पहले झारखंड का दौरा किया था और बाबू लाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा के साथ पार्टी के गठबंधन की वकालत की थी।
- इसके अलावा, पिछले महीने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चेन्नई में एक्टर कमल हासन से मुलाकात की। अगले साल मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केजरीवाल भोपाल में भी रैली कर चुके हैं।

आप ने अब तक दिल्ली से बाहर तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन करारी हार मिली। -फाइल आप ने अब तक दिल्ली से बाहर तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन करारी हार मिली। -फाइल
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गुजरात चुनाव के लिए केजरीवाल ने गोपाल राय को प्रभारी बनाया था। -फाइलगुजरात चुनाव के लिए केजरीवाल ने गोपाल राय को प्रभारी बनाया था। -फाइल
आप ने अब तक दिल्ली से बाहर तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन करारी हार मिली। -फाइलआप ने अब तक दिल्ली से बाहर तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन करारी हार मिली। -फाइल
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