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AAP विधायकों को अयोग्य ठहराने का केस: HC ने EC से पूछा- किस आधार पर लिया फैसला

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 30, 2018, 10:23 PM IST

EC ने संसदीय सचिव का पद रखने पर AAP के 20 MLAs की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश प्रेसिडेंट से की थी, जिसे मान ली गई थी।
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    AAP के आठ विधायकों ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में अयोग्य ठहराने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। (फाइल)

    नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को AAP के 20 विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में इलेक्शन कमीशन (EC) से सवाल पूछा कि ये फैसला किन तथ्यों के आधार पर लिया गया। कोर्ट ने EC को चार दिन के भीतर डिटेल में ये जवाब देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने उपचुनावों के नोटिफिकेशन पर रोक के आदेश को 7 फरवरी तक बढ़ा दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई भी 7 को ही होगी। बता दें कि EC ने संसदीय सचिव का पद रखने पर पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने के लिए सिफारिश राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजी थी, जिसे बाद में मंजूर कर लिया गया था।

    किसने दायर की थी पिटीशन?
    - AAP के आठ विधायकों ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में अयोग्य ठहराने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस चंद्र शेखर की बेंच कर रही है।

    इसके पहले क्या हुआ था?

    - हाईकोर्ट ने सोमवार को ये केस डिवीजन बेंच को ट्रांसफर कर दिया। इस मामले पर लगातार सुनवाई होगी।

    सदस्यता रद्द होने पर हाईकोर्ट गए थे MLA

    - लाभ का पद (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) के मामले में अयोग्य घोषित होने के बाद MLAs ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। विधायकों ने कोर्ट से केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन (अयोग्य घोषित करने वाले) को रद्द करने की अपील की थी।

    इन 20 MLAs की सदस्यता हुई थी रद्द
    - अयोग्य ठहराए गए दिल्ली के विधायकों में आदर्श शास्त्री (द्वारका), अल्का लांबा (चांदनी चौक), अनिल वाजपेयी (गांधी नगर), अवतार सिंह (कालकाजी), कैलाश गहलोत (नजफगढ़), मदन लाल (कस्तूरबा नगर), मनोज कुमार (कोंडली), नरेश यादव (महरौली), नितिन त्यागी (लक्ष्मी नगर), प्रवीण कुमार (जंगपुरा), राजेश गुप्ता (वजीरपुर), राजेश ऋषि (जनकपुरी), संजीव झा (बुराड़ी), सरिता सिंह (रोहतास नगर), सोम दत्त (सदर बाजार), शरद कुमार (नरेला), शिव चरण गोयल (मोति नगर), सुखवीर सिंह (मुंडका), विजेंदर गर्ग (रजिंदर नगर) और जरनैल सिंह (तिलक नगर) के नाम शामिल हैं।

    क्यों रद्द की गई विधायकों की सदस्यता?
    - मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने ही 8 सितंबर, 2016 को विधायकों के संसदीय सचिवों के तौर पर अप्वाइंटमेंट को रद्द कर दिया था।
    - इसके बाद वकील प्रशांत पटेल ने आप विधायकों की शिकायत चुनाव आयोग से की। साथ ही पिटीशन में इसे लाभ का पद मानते हुए विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई। ईसी ने 21 विधायकों को नोटिस जारी किया था।
    - बता दें कि एक विधायक जरनैल सिंह (राजौरी गार्डन) ने पंजाब विधानसभा चुनाव के वक्त पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में से उनका नाम अलग कर लिया गया और विधायकों की संख्या 20 रह गई।

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    हाईकोर्ट ने सोमवार को ये केस डिवीजन बेंच को ट्रांसफर कर दिया। इस मामले पर लगातार सुनवाई होगी। (फाइल)
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Web Title: AAP Office Of Profit Case HC Asks EC To File A Detailed Factual Aspects Of Its Decision
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