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डोकलाम में चीनी सैनिकों की मौजूदगी गंभीर बात नहीं, हम हर हालात से मुकाबले को तैयार: आर्मी चीफ

आर्मी चीफ बिपिन रावत ने बुधवार को कहा कि इंडिया-चीन बॉर्डर पर अब हालात डोकलाम विवाद से पहले जैसे हो गए हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 17, 2018, 07:59 PM IST

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    आर्मी चीफ ने कहा कि डोकलाम में हमारे सैनिक अभी भी मौजूद हैं।

    नई दिल्ली.आर्मी चीफ बिपिन रावत ने बुधवार को कहा कि इंडिया-चीन बॉर्डर पर अब हालात डोकलाम विवाद से पहले जैसे हो गए हैं। डोकलाम ट्राइ जंक्शन पर चीनी सैनिकों के होने पर उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता है कि इसमें कोई गंभीर बात नहीं है। हम किसी भी हालात से मुकाबले के लिए तैयार हैं। हमारे सैनिक अभी भी वहां मौजूद हैं।" आर्मी चीफ ने रायसीना डायलॉग में ये बातें कहीं।

    डोकलाम पर और क्या बोले आर्मी चीफ?


    1) PLA वापस लौटी तो हम भी सामना करने को तैयार
    - आर्मी चीफ ने कहा, "जहां तक डोकलाम की बात है तो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवान वहां अपने एरिया में हैं। हालांकि, वे उतने नहीं हैं, जितना कि पहले हमने उन्हें देखा था। उन्होंने कुछ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किया है, लेकिन इसमें ज्यादातर टेम्परेरी है। हो सकता है कि वे ठंड की वजह से अपने इक्विपमेंट ना ले गए हैं और कोई भी ये सोच सकता है कि क्या वे वापस लौट सकते हैं? तो हम भी वहां हैं। अगर वे वापस लौटते हैं तो हम उनका सामना करेंगे।"

    2) तनाव कम करने के लिए अच्छी कोशिशें
    - रावत ने कहा, "चीन और भारत के बीच का मैकेनिज्म अच्छी तरह से काम कर रहा है। डोकलाम के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बहुत अच्छी कोशिशें की गई हैं। हमने बॉर्डर पर्सनल मीटिंग शुरू कर दी है। हम लगातार मीटिंग कर रहे हैं। ग्राउंड लेवल पर कमांडर्स से भी बात हो रही है और ये एक्चेंज लगातार चल रहा है।"

    आतंकवाद पर आर्मी चीफ ने क्या कहा?

    - उन्होंने कहा, "हर आतंकवादी संगठन का एक आतंकी और राजनीतिक धड़ा होता है। आतंकवाद से निपटने के लिए इन दोनों से भी निपटना चाहिए। इन संगठनों के मिलिटेंट विंग पर हमने कार्रवाई की है। हालांकि, इन संगठनों की पॉलिटिकल ऑर्गनाइजेशंस लोगों को बहलाकर, अफवाहें फैलाकर, फंड जुटाकर और NGOs के नाम पर अभी भी काम कर रहे हैं। मिलिटेंट और पॉलिटिकल फ्रंट दोनों पर एक्शन लिया जाना चाहिए।"


    चीन पर पहले क्या बयान दिया था आर्मी चीफ ने?
    - 12 जनवरी को जनरल रावत ने कहा था कि चीन भले ही ताकतवर देश है, लेकिन भारत भी कमजोर नहीं है। भारत अपनी सीमा में किसी भी देश को अतिक्रमण नहीं करने देगा। हमारे पास सीमा पर सभी तरह के विवाद से निपटने के लिए मजबूत “मैकेनिज्म’ है। उत्तरी सीमा पर चीन से लगी एलएसी पर विवाद जारी है, जिसे हम रोकने की कोशिशों में लगे हैं।"
    - जनरल रावत ने कहा था, "अब हालात 1962 जैसे नहीं हैं और हर क्षेत्र में सेना की ताकत बढ़ी है। सीमा पर हर जगह भारतीय सैनिकों की तैनाती को भी बढ़ाया गया है। डोकलाम के उत्तरी इलाके में चीन के सैनिकों की मौजूदगी है, लेकिन उनकी संख्या कम हुई है। यहां चीन 2000 से सड़क बना रहा है। सेना के स्तर पर हम मजबूत हैं, लेकिन अकेले सेना ही चीन से नहीं निपट सकती। इसके लिए भारत को पड़ोसी देशों के साथ भी सहयाेग बढ़ाना होगा। खास तौर पर श्रीलंका, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को साथ लेकर चलना होगा। ताकि चीन की ताकत को बैलेंस किया जा सके।"

    क्या था डोकलाम विवाद, कितने दिन चला?

    - डोकलाम में विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने वहां चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का दावा था कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा था।
    - इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। भारत-चीन का जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 km लंबा बॉर्डर है। इसका 220 km हिस्सा सिक्किम में आता है।
    - बता दें कि भारतीय-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच मिड 16 जून से 28 अगस्त के बीच तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। बाद में अगस्त में यह टकराव खत्म हुआ और दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी।

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