Hindi News »National »Latest News »National» राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: Ayodhya Ram Mandir Babri Mosque Dispute Supreme Court Hearing

अयोध्या विवाद: SC सिर्फ मुख्य पक्षकारों को ही सुनेगा, दखल देने वाली सभी याचिकाएं खारिज

पिछली सुनवाई में 20 धार्मिक पुस्तकों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन न हो पाने की वजह से सुनवाई टाल दी गई थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 14, 2018, 09:18 PM IST

  • अयोध्या विवाद: SC सिर्फ मुख्य पक्षकारों को ही सुनेगा, दखल देने वाली सभी याचिकाएं खारिज, national news in hindi, national news
    +1और स्लाइड देखें
    आयोध्या विवाद की सुनवाई पांच जजों की कॉन्स्टिीट्यूशन बेंच कर रही है। -फाइल

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अयोध्या विवाद से जुड़ी उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जो मुख्य पक्षकारों की तरफ से दायर नहीं की गई थीं। कोर्ट अब सिर्फ मुख्य पक्षकारों को ही सुनेगा। कोर्ट ने जिन याचिकाओं को खारिज किया है, उनमें बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी की वह याचिका भी शामिल है, जिसमें उन्होंने बाबरी मस्जिद-राम मंदिर संपत्ति विवाद में दखल की कोशिश की थी। हालांकि, पूजा के अधिकार का हवाला देते हुए दाखिल स्वामी की मूल याचिका को SC की अन्य बेंच सुनवाई करेगी।

    कौन हैं अयोध्या मामले में तीन पक्षकार?

    1. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड
    2. राम लला विराजमान
    3. निर्मोही अखाड़ा

    किन की याचिकाएं खारिज हुईं?

    - तीन मुख्य पक्षकारों के अलावा एक दर्जन अन्य पक्षकार भी हैं। इनमें श्याम बेनेगल, तीस्ता सीतलवाड़, अपर्णा सेन, अनिल धारेकर और सुब्रमण्यन स्वामी की याचिकाएं भी शामिल हैं।

    स्वामी की किस पिटीशन पर सुनवाई जारी रहेगी?

    - सुब्रमण्यन स्वामी ने इंटरवेन पिटीशन जारी की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में केस फास्ट ट्रैक पर आया। इसे खारिज कर दिया गया है। लेकिन, स्वामी ने अलग से एक रिट पिटीशन भी दायर की थी।

    - स्वामी ने कहा, "मैंने एक रिट पिटीशन दायर की थी, जिसमें मैंने कहा था कि प्रार्थना करना मेरा मूलभूत अधिकार है और ये अधिकार संपत्ति के अधिकार से बड़ा है।"

    - बेंच ने कहा कि स्वामी की रिट पिटीशन पर कानून के मुताबिक बेंच सुनवाई करेगी।

    लोकसभा चुनाव तक सुनवाई टालने की अपील की गई थी
    - पिछली सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से इस केस की सुनवाई लोकसभा चुनाव तक टालने की मांग की थी।
    - उन्होंने कहा, "कृपया होने वाले असर को ध्यान में रखकर इस मामले की सुनवाई कीजिए। कृपया इसकी सुनवाई जुलाई 2019 में की जाए, हम यकीन दिलाते हैं कि हम किसी भी तरह से इसे और आगे नहीं बढ़ने देंगे। केवल न्याय ही नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा दिखना भी चाहिए।"
    - इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "ये किस तरह की पेशकश है? आप कह रहे हैं जुलाई 2019। क्या इससे पहले मामले की सुनवाई नहीं हो सकती?"

    पक्षकारों को 50 सुनवाई में फैसला आने की उम्मीद
    - राम मंदिर के समर्थन में आए पक्षकारों का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 90 सुनवाई में ही फैसला दे दिया था। पक्षकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट 50 सुनवाई में फैसला दे सकता है।
    - हालांकि बाबरी मस्जिद से जुड़े पक्षकार ऐसा नहीं मानते। उनका कहना है कि केस में दस्तावेजों का अंबार हैं, उन सभी पर प्वाइंट टू प्वाइंट दलीलें रखी जाएंगी। हिंदू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन नेे बताया कि केस में 7 भाषाओं हिंदी, उर्दू, पाली, संस्कृत, अरबी आदि के ट्रांसलेटेड डॉक्युमेंट्स जमा हो चुके हैं।

    HC ने विवादित जमीन 3 हिस्सों बांटने का दिया था ऑर्डर
    - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में विवादित 2.77 एकड़ जमीन 3 बराबर हिस्सों में बांटने का ऑर्डर दिया था। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था।

    शिया बोर्ड का कौन सा प्रपोजल SC रिकॉर्ड में आया?
    - मुस्लिमों के एक गुट ने उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बैनर तले कोर्ट में एक मसौदा पेश किया था। इस मसौदे के मुताबिक, विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाए और मस्जिद लखनऊ में बनाई जाए। इस मस्जिद का नाम राजा या शासक के नाम पर रखने के बजाए मस्जिद-ए-अमन रखा जाए।

    कोर्ट ने 7 लैंग्वेज में ट्रांसलेशन कराने को कहा था
    - बता दें कि कोर्ट ने 11 अगस्त को 7 लैंग्वेज के डॉक्युमेंट्स का ट्रांसलेशन करवाने को कहा था। 6 दिसंबर को सुनवाई तय की थी, लेकिन उस वक्त तक ट्रांसलेशन का काम पूरा नहीं हो पाया था, इसलिए कोर्ट ने तारीख 8 फरवरी तक बढ़ा दी थी। तब कुल 19,590 पेज में से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के हिस्से के 3,260 पेज जमा नहीं हुए थे।

    अभी कितने जजों की बेंच सुनवाई कर रही है?
    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा:
    3 तलाक खत्म करने और सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने जैसे फैसले सुना चुके हैं।
    जस्टिस अब्दुल नाजिर: तीन तलाक बेंच में थे। प्रथा में दखल गलत बताया था। प्राइवेसी को फंडामेंटल राइट करार दिया था।
    जस्टिस अशोक भूषण: दिल्ली सरकार और एलजी के बीच जारी अधिकारों की जंग के विवाद पर सुनवाई कर रहे हैं।

    आगे की स्लाइड में पढ़ें, 7 साल में SC में 20 अर्जियां, 7 चीफ जस्टिस बदले...

  • अयोध्या विवाद: SC सिर्फ मुख्य पक्षकारों को ही सुनेगा, दखल देने वाली सभी याचिकाएं खारिज, national news in hindi, national news
    +1और स्लाइड देखें
    सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि यह धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि जमीन विवाद से जुड़ा मामला है।

    7 साल में SC में 20 अर्जियां, 7 चीफ जस्टिस बदले
    - हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड 14 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फिर एक के बाद एक 20 पिटीशन्स दाखिल हो गईं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया, लेकिन सुनवाई शुरू नहीं हुई। इस दौरान 7 चीफ जस्टिस बदले। सातवें चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने पिछले साल 11 अगस्त को पहली बार पिटीशन्स लिस्ट की थी। पहले ही दिन डॉक्युमेंट्स के ट्रांसलेशन पर मामला फंस गया था। संस्कृत, पाली, फारसी, उर्दू और अरबी समेत 7 भाषाओं में 9 हजार पन्नों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करने के लिए कोर्ट ने 12 हफ्ते का वक्त दिया था। इसके अलावा 90 हजार पेज में गवाहियां दर्ज हैं। यूपी सरकार ने ही 15 हजार पन्नों के दस्तावेज जमा कराए हैं।

    सुनवाई में देरी न हो, इसलिए दोनों पक्षों से बात
    - चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के आदेश पर रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल वन ने 22 जनवरी को केस से जुड़े सभी पक्षकारों के वकीलों के साथ बैठक की थी। इसमें दस्तावेजों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया की गई। पक्षकारों को सुना गया। एक फरवरी को दोबारा से बैठक की गई। इसमें पक्षकारों ने बताया, वे तैयार हैं।

    फैसले का राजनीति पर हो सकता है असर
    - अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश की राजनीति पर व्यापक असर हो सकता है।
    - 2019 में लोकसभा चुनाव में बीजेपी और अन्य पार्टियां राम मंदिर को बड़ा मुद्दा बना सकती हैं।
    - कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव प्रभावित हो सकते हैं।

Topics:
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए India News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: Ayodhya Ram Mandir Babri Mosque Dispute Supreme Court Hearing
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From National

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×