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बीटिंग रिट्रीट: रायसीना हिल्स पर मिलिट्री बैंड 26 से ज्यादा धुन पेश करेंगे, थोड़ी देर में होगी सेरेमनी

26 जनवरी से शुरू हुए गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हर साल बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ विजय चौक पर होता है।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 04:14 PM IST
4 दिन के गणतंत्र दिवस समारोह का समापन बीटिंग रिट्रीट के साथ हुआ। 4 दिन के गणतंत्र दिवस समारोह का समापन बीटिंग रिट्रीट के साथ हुआ।

नई दिल्ली. चार दिन तक चलने वाले गणतंत्र दिवस समारोह के आखिरी दिन सोमवार को रायसीना हिल्स पर ‘बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी' का आयोजन हुआ। इसमें 18 मिलिट्री बैंड और 15 पाइप एंड ड्रम बैंड ने हिस्सा लिया। 69वें गणतंत्र दिवस समारोह के समापन के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने काफिले के साथ विजय चौक पहुंचे। इस मौके पर तीनों सेनाओं के साथ पुलिस और पैरामिलिट्री के बैंड ने 26 मनमोहक धुनों पर मार्च करते हुए उन्हें सलामी दी। बता दें कि हर साल 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट का आयोजन होता है। यह गणतंत्र दिवस समारोह की आखिरी परंपरा है, जो 1950 से चली आ रही है।

राष्ट्रपति को दी गई सलामी

- इस बार तीनों सेनाओं के मिलिट्री बैंड ने सारे जहां से अच्छा, वंदेमातरम् जैसी 26 धुनों पर मार्च किया। इनमें से 25 धुन भारतीय संगीतकारों ने तैयार कीं।

- बीटिंग रिट्रीट में 18 मिलिट्री बैंड, 15 पाइप एंड ड्रम बैंड शामिल हुए और एक साथ सेना के सर्वोच्च कमांडर (राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद) को सलामी दी।

- इस समारोह के लिए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण तीनों सेनाओं के प्रमुख समेत कई देशों से आए गेस्ट शामिल हुए।

इस बार बीटिंग रिट्रीट में क्या खास?

- मेजर अशोक कुमार बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के मुख्य संचालक थे। वहीं, आर्मी बैंड की कमान मेजर एसके शर्मा, नेवी बैंड को ऑफिसर रमेश चांद ने लीड किया। एयरफोर्स के बैंड के संचालक जूनियर वारंट ऑफिसर असोख कमार थे। इसके अलावा पुलिस और सीएपीएफ बैंड का नेतृत्व कॉन्स्टेबल भीम सिंह ने किया।

- सभी बैंड ने आकर्षक प्रस्तुतियां देकर विजय पथ पर मौजूद हर किसी का मनमोह लिया। बैंड परफॉर्मेंस के बीच में शास्त्रीय संगीत के जरिए वैष्णव जन... वंदेमातरम्... और ऐ मेरे वतन के लोगों... की धुन बजाई गई। आखिर में शाम 6 बजे सारे जहां से अच्छा... धुन बजाते हुए बैंड राजपथ की ओर चले गए।

क्यों होती है बीटिंग रिट्रीट?

- बीटिंग द रिट्रीट सेना की बैरक वापसी का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस के बाद 29 जनवरी को इस सेरेमनी का आयोजन रायसीना हिल्स के विजय चौक पर किया जाता है।

- दुनियाभर में बीटिंग रिट्रीट की परंपरा रही है। लड़ाई के दौरान सेनाएं सूर्यास्त होने पर हथियार रखकर अपने कैंप में जाती थी, तब एक संगीतमय समारोह होता था, इसे बीटिंग रिट्रीट कहा जाता है।

भारत में कब शुरू हुई परंपरा?

- भारत में बीटिंग रिट्रीट की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। तब भारतीय सेना के मेजर रॉबर्ट ने इस सेरेमनी को सेनाओं के बैंड्स के डिस्प्ले के साथ पूरा किया था।

बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में विजय चौक पहुंचे नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में विजय चौक पहुंचे नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू।
बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी सेनाओं की बैरक में वापसी का प्रतीक है। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी सेनाओं की बैरक में वापसी का प्रतीक है।
बीटिंग रिट्रीट में मिलिट्री बैंड ने 26 मनमोहक धुनें पेश कीं। बीटिंग रिट्रीट में मिलिट्री बैंड ने 26 मनमोहक धुनें पेश कीं।
भारत में बीटिंग रिट्रीट की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। -फाइल भारत में बीटिंग रिट्रीट की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। -फाइल
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