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दावोस में PM ने कहा था डाटा से दुनिया कंट्रोल होगी, आधार से यही करने की कोशिश: SC में ममता सरकार

सिब्बल ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान मोदी के दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिए गए भाषण का जिक्र किया।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 06, 2018, 10:22 PM IST

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    सिब्बल ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान मोदी के दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिए गए भाषण का जिक्र किया। सिब्बल ने पीएम के दावोस में दिए गए बयान को कोट करते हुए कहा- जो डाटा पर कंट्रोल करेगा वो सबसे ताकतवर होगा और वो ही दुनिया को आकार देगा। - सिब्बल

    नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की आधार कार्ड कार्ड को मेंडेटरी करने की स्कीम का विरोध किया। ममता सरकार ने सुनवाई के दौरान कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री के दावोस में दिए बयान का इस्तेमाल किया। कहा- पीएम ने दावोस में कहा था कि डाटा से दुनिया कंट्रोल होगी। केंद्र सरकार नागरिकों की निजी जानकारियों के जरिए उनको कंट्रोल कर रही है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच आधार वैलेडिटी पर सुनवाई कर रही है। इसी सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने वकील कपिल सिब्बल के जरिए दलीलें पेश कीं।

    चीफ जस्टिस कर रहे हैं बेंच की अगुआई

    - सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली पांच जजों की बेंच आधार की संवैधानिक वैधता (constitutional validity) पर सुनवाई कर रही है। इसमें जस्टिस एके. सीकरी, जस्टिस एएम. खानविलकर, जस्टिस डीवाय. चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण भी शामिल हैं।
    - केंद्र सरकार के इस कदम के खिलाफ कुछ पिटीशंस सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं हैं। सरकार ने 2016 में आधार की संवैधानिक वैधता पर कानून बनाया था।
    - सिब्बल ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान मोदी के दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिए गए भाषण का जिक्र किया। सिब्बल ने पीएम के दावोस में दिए गए बयान को कोट करते हुए कहा- जो डाटा पर कंट्रोल करेगा वो सबसे ताकतवर होगा और वो ही दुनिया को आकार देगा।


    पीएम के बयान के ये मायने

    - सिब्बल ने अपनी दलील में आगे कहा- पीएम के बयान के तो ये मायने हुए कि भारत में भी जो डाटा कंट्रोल करेगा वो भारत को भी कंट्रोल करेगा। सरकार वो करेगी जो उसने पहले कभी नहीं किया होगा।
    - उन्होंने कहा- आधार और कुछ नहीं बल्कि सरकार के लिए सूचना का अधिकार है। सवाल ये है कि क्या इसे संवैधानिक दर्जा दिया जा सकता है? उत्तर है ‘नहीं’।

    आजादी के बाद सबसे अहम केस

    - पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने कहा कि आधार से जुड़ा यह केस आजादी के बाद से सुप्रीम कोर्ट के सामने लाया गया सबसे अहम मामला है। मसला ये नहीं है कि सरकार का कितना पैसा बचेगा। बल्कि, मामला ये है कि क्या नागरिकों के फंडामेंटल राइट्स छिन जाएंगे।
    - उन्होंने कहा कि कानून के जरिए किसी शख्स के पर्सनल डाटा को खतरे में नहीं डाला जा सकता। कोई टेक्नोलॉजी सेफ नहीं है और ना इसकी गारंटी दी जा सकती।

    उदाहरण भी दिया

    - सिब्बल ने दलील के दौरान एक उदाहरण भी दिया। कहा- एक विधवा को सिर्फ इसलिए पेंशन नहीं मिली क्योंकि उसके पास आधार नहीं था। मुझे (खुद को विक्टिम के तौर पर पेश करते हुए) विधवा पेंशन मिलनी चाहिए क्योंकि ये मेरा स्टेटस है। इसका मेरी पहचान से कोई लेना-देना नहीं है।
    - इस पर बेंच ने कहा कि इस मामले में वैधानिकता का मसला सामान्य मामलों में है, किसी अपवाद (exception) के तौर पर नहीं। कोर्ट ये कैसे तय कर सकता है कि किस लेवल तक रिस्क ठीक है या नहीं। कोर्ट को इस मामले पड़ना चाहिए या फिर इसे कानून बनाने वालों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
    - सिब्बल बेंच के सवालों का जवाब बुधवार को देंगे।

    आधार ना होने की वजह से मौत

    - इसके पहले, आधार के खिलाफ पिटीशंस दायर करने वालों के वकील श्याम दीवान ने दलीलें दीं। कहा- इस तरह की रिपोर्ट्स हैं कि झारखंड में कुछ लोगों की भूख से मौत हो गई। आधार से उनका राशन कार्ड लिंक नहीं था।
    - दीवान ने आरोप लगाया कि नागरिकों का डाटा प्राईवेट कंपनियों के पास मौजूद है और वो उसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रही हैं। दीवान ने ये भी कहा कि UIDAI का डिजाइन फूल प्रूफ नहीं और इसमें गडबड़ी की जा सकती है।

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    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली पांच जजों की बेंच आधार की संवैधानिक वैधता (constitutional validity) पर सुनवाई कर रही है।
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Web Title: Centre Would Control Personal Information Of Citizens To Have A Grip Over Them: West Bengal In SC
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