Hindi News »National »Latest News »National» 5 Reasons Why BJP Difficult To Won In Gujarat Elections 2017

ANALYSIS: गुजरात में BJP के लिए आसान नहीं रही जीत, ये हैं उसकी 5 वजह

ANALYSIS: गुजरात में BJP के लिए आसान नहीं रही जीत, ये हैं उसकी 5 वजह

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 18, 2017, 03:12 PM IST

नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया था कि गुजरात के नतीजे चौंकाएंगे। ये बात तब सच साबित हुई, जब 150 प्लस सीटों का दावा करने वाली बीजेपी 100 का आंकड़ा नहीं पार कर पाई। गुजरात में इस बार मोदी सीएम चेहरा नहीं थे। जीएसटी के फैसले से व्यापारी नाराज थे। इसके अलावा कांग्रेस का कास्ट कार्ड भी था। इनके चलते कांग्रेस और बीजेपी के बीच अंतर कम हुआ। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने दावा किया कि ये कांटे की टक्कर नहीं थी। DainikBhaskar.com आपको बता रहा है वो 5 वजहें, जिन्होंने गुजरात में बीजेपी की जीत को मुश्किल बनाया।

BJP की मुश्किल की ये रहीं 5 वजह

1) मोदी लहर पर असर पड़ा; बीजेपी का वोट शेयर बढ़ा, लेकिन सीटें घटीं

- गुजरात में 19 साल से BJP सत्ता में है। 15 साल में पहली बार मोदी सीएम कैंडिडेट नहीं थे। इसका असर भी भी मतदाताओं पर पड़ा। मोदी के केंद्र में जाने के बाद बीजेपी को 2 सीएम बदलने पड़े।

कैसे असर पड़ा:2012 में बीजेपी को 47.9% वोट शेयर था, तब उसे 115 सीट मिली थीं। 2017 में वोट शेयर में करीब 1% की बढ़ोत्तरी तो हुई, लेकिन 16 सीट कम हो गई। उधर, 2012 में कांग्रेस का वोट शेयर 38.9% था, तब 61 सीट खाते में आई थीं। इस साल वोट शेयर में करीब 2% का इजाफा और करीब 16 सीट का फायदा हुआ। तीन साल पहले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 60.1% वोट मिले थे और 162 असेंबली सीट पर बढ़त बनाई थी। उधर, 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई थी। उस वक्त वोट शेयर 33.5% था और 17 असेंबली पर बढ़त बनाई थी।

2) पाटीदार आरक्षण आंदोलन
- इस बार कांग्रेस ने पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल से हाथ मिलाया। इस वजह से बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा।

कैसे असर पड़ा: 5 साल पहले 2012 के इलेक्शन में इनमें से 59 यानी 71% सीटें बीजेपी ने जीती थीं। इस बार कांग्रेस और हार्दिक पटेल ने पाटीदारों के असर वाली 73 सीटों में 28 यानी 38% सीटें जीतीं। पिछली बार कांग्रेस यहां की 26% सीटें जीत पाई थी। वहीं, बीजेपी 10% कम यानी 45 सीटें जीतीं।

3) राहुल की अग्रेसिव कैम्पेनिंग
- राहुल गांधी गुजरात चुनाव के दौरान एक नए अंदाज में नजर आए। उन्होंने विकास पागल हो गया, गब्बर सिंह टैक्स, अमित शाह के बेटे जय शाह का मामला और किसानों के मुद्दे उठाए। इससे लगा कि वे बीजेपी की कमजोर नब्ज पर हाथ रखने में काफी हद तक कामयाब रहे। राहुल ने 57 जगहों पर रैलियां कीं। नवसृजन यात्रा निकाली। 8 बार गुजरात आए। चुनाव कैम्पेन के दौरान 27 बार मंदिर गए।

कैसे असर पड़ा:कास्ट फैक्टर और राहुल के ज्यादा एक्टिव होने की वजह से मोदी को भी कैम्पेन पर ज्यादा फोकस करना पड़ा। उन्होंने सात बार गुजरात का दौरा किया। 5 बार मंदिर गए। पहले 60 दिनों के 4 बड़े मुद्दे थे जीएसटी, नोटबंदी, गुजरात में विकास और आरक्षण। लेकिन आखिरी 11 दिनों के 4 बड़े मुद्दे- हिंदुत्व, मंदिर, गुजराती अस्मिता, पाकिस्तान से बीजेपी को फायदा हुआ।

4) सौराष्ट्र में कांग्रेस के साथ आए लोकल लीडर्स

- कांग्रेस यहां लोकल लीडर्स जिग्नेश, हार्दिक, अल्पेश के सहारे ओबीसी, दलित और पटेल-पाटीदार वोटरों को अपने फेवर में करने में कामयाब रही। राहुल गांधी ने गुजरात में अपना चुनाव प्रचार सौराष्ट्र से ही शुरू किया था। उन्होंने द्वारकाधीश मंदिर से नवसृजन यात्रा शुरू की थी।

कैसे असर पड़ा: सौराष्ट्र में कुल 54 सीटें हैं। इनमें से कांग्रेस को 30, बीजेपी को 23 सीटें मिलीं। 2012 के चुनाव में बीजेपी को 35, कांग्रेस को 16 कांग्रेस और अन्य को 3 मिली थीं। यह नुकसान इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि सौराष्ट्र बीजेपी का गढ़ था। यहां केशुभाई पटेल की बगावत के बावजूद बीजेपी कमजोर नहीं हुई थी।

5) GST में रेट कट से बचा सूरत
- कपड़े पर 5 फीसदी जीएसटी लगाने के विरोध में सूरत में कपड़ा कारोबारियों ने हड़ताल पर चले गए थे। 17 जुलाई को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें उनकी मांगें जीएसटी काउंसिल में रखने का आश्वासन दिया। इसके बाद करीब दो हफ्ते तक चली यह हड़ताल समाप्त कर दी गई। सरकार को अनुमान था कि उसे 5 महीने बाद होने जा रहे गुजरात चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को जीएसटी के रेट में कटौती करनी पड़ी।

कैसे पड़ा असर:तमाम कोशिशों के बाद बीजेपी सूरत में डैमेज कंट्रोल करने में काफी हद तक कामयाब रही। काउंटिंग की शुरुआत में तो यहां घाटा दिख रहा था, लेकिन बाद में बीजेपी ने यहां की 16 में से 15 सीटें जीत लीं, कांग्रेस को 1 सीट पर जीत मिली।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From National

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×