Home | National | Latest News | National | Bofors case Crucial hearing in Supreme Court

बोफोर्स घोटाला: BJP नेता की पिटीशन पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई

आर्मी के लिए 400 तोपें खरीदने की डील 1986 में हुई थी। इसमें इटली के कारोबारी ओत्तावियो क्वात्रोची को बड़ी दलाली मिली।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Feb 02, 2018, 11:34 AM IST

1 of
Bofors case Crucial hearing in Supreme Court
बोफोर्स तोप घोटाले को आजाद भारत के बाद सबसे बड़ा मल्टीनेशनल स्कैम माना जाता है। -फाइल

नई दिल्ली.   सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को बोफोर्स घोटाले से जुड़ी पिटीशन पर सुनवाई करेगा। तोपों की खरीद में 64 करोड़ रु. की दलाली के मामले में बीजेपी नेता और वकील अजय अग्रवाल ने पिटीशन फाइल की है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में अग्रवाल से पूछा था कि उन्होंने किस हैसियत से थर्ड पार्टी के तौर पर पिटीशन दायर की है? बता दें कि भारतीय सेना के लिए 400 तोपें खरीदने की डील 1986 में हुई थी। इसमें इटली के कारोबारी ओत्तावियो क्वात्रोची को बड़ी दलाली मिली। कांग्रेस ने हमेशा राजीव गांधी के रोल से इनकार किया है। CBI जांच के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 2004 में राजीव को क्लीन चिट दी थी।

 

सीजेआई समेत 3 जजों की बेंच में सुनवाई

- अग्रवाल ने 31 मई, 2005 को आए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पिटीशन फाइल की है। तब कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया था। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ की बेंच के सामने होगी। 

- 16 जनवरी को पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अग्रवाल से पूछा था कि उन्होंने किस हैसियत से थर्ड पार्टी के तौर पर पिटीशन फाइल की है? आज वकील अग्रवाल कोर्ट को इसका जवाब देंगे।

- बता दें कि अजय अग्रवाल 2014 के लोकसभा इलेक्शन में सोनिया गांधी के लिए खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ चुके हैं।

 

क्या था बोफोर्स घोटाला?

 

- बोफोर्स तोप घोटाले को आजाद भारत के बाद सबसे बड़ा मल्टीनेशनल स्कैम माना जाता है। 1986 में हथियार बनाने वाली स्वीडन की कंपनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को 155mm की 400 तोपें सप्लाई करने का सौदा किया था। यह डील 1.3 अरब डाॅलर (डॉलर के मौजूदा रेट से करीब 8380 करोड़ रुपए) की थी। 
- 1987 में यह बात सामने आई थी कि यह डील हासिल करने के लिए भारत में 64 करोड़ रुपए दलाली दी गई। उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। 
- स्वीडिश रेडियो ने सबसे पहले 16 अप्रैल 1987 में दलाली का खुलासा किया। इसे ही बोफोर्स घोटाला या बोफोर्स कांड के नाम से जाना जाता है। इसी घोटाले के चलते 1989 में राजीव गांधी की सरकार गिर गई थी।
- आेलोफ पाल्मे की बाद में हत्या हो गई थी।

 

दलाली में किसका रोल था?

- आरोप था कि राजीव गांधी परिवार के नजदीकी बताए जाने वाले इटली के कारोबारी ओत्तावियो क्वात्रोची ने इस मामले में बिचौलिए की भूमिका अदा की। इसके बदले में उसे दलाली की रकम का बड़ा हिस्सा मिला। दलाली देने के लिए एक मुखौटा कंपनी ए.ई. सर्विसेस बनाई गई थी। क्वात्रोची की 2013 में मौत हो गई थी।
- 1997 में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच पूरी होने में 18 साल लगे, जिस पर 250 करोड़ रुपए खर्च हुए। 
- सीबीआई जांच पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने राजीव गांधी को इस मामले में क्लीन चिट दे दी थी।

 

Bofors case Crucial hearing in Supreme Court
बीजेपी नेता अजय अग्रवाल ने बोफोर्स घोटाले में सुनवाई के लिए पिटीशन दायर की है। -फाइल
prev
next
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

Trending Now