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अगर लोकतंत्र खतरे में है तो मोदी सरकार के मंत्री और BJP नेता भी आवाज उठाएं: SC जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर यशवंत सिन्हा

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने पहली बार मीडिया के सामने आकर शुक्रवार को सीजेआई के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाए थे।

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2018, 03:49 PM IST
सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने शुक् सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने शुक्

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बहाने बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने शनिवार को मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में 1975 जैसे इमरजेंसी के हालात न बनें, इसके लिए संसद सत्र बुराकर चर्चा की जाए। अगर पार्टी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों को भी लगता है कि लोकतंत्र पर खतरा है। फिर उन्हें भी निडर होकर जजों की तरह इसके बचाव में खड़े होना चाहिए। बता दें कि शुक्रवार को जजों ने पहली बार मीडिया के सामने आकर सीजेआई के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने लोकतंत्र पर खतरे की बात भी कही थी।

इमरजेंसी जैसे हालात न बनें, इसलिए संसद सत्र बुलाएं

- सिन्हा ने कहा, ''देश में इमरजेंसी जैसे हालात न बनें, इसके लिए संसद का छोटा सेशन बुलाकर आवाज उठानी चाहिए। अगर संसद को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है तो लोकतंत्र खतरे में है।''
- ''अगर सुप्रीम कोर्ट के 4 जज मीडिया के सामने आकर यह बोलते हैं कि लोकतंत्र पर खतरा है, हमें उनके शब्दों को गंभीरता से लेना चाहिए। सभी नागरिक जो लोकतंत्र के बारे में सोचते हैं, उन्हें बोलना चाहिए। मैं पार्टी (बीजेपी) नेताओं और केबिनेट के मंत्रियों से अपील करता हूं कि डर छोड़कर आवाज उठाएं।''

पीएम के खिलाफ बोलने से न डरें मंत्री

- यशवंत सिन्हा ने आगे कहा कि 4 जजों ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के संकट को उठाया। उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ आवाज उठाई। लेकर पब्लिक कर देश को बताया कि सीजेआई अपनी मर्जी से केस और ज्यूडिशियल ऑर्डर पसंदीदा बेंच को ट्रांसफर करते हैं।
- इसी तरह देश के प्रधानमंत्री भी सभी मंत्रियों के बराबर हैं, लेकिन सरकार में प्रथम मंत्री हैं। केबिनेट के साथियों को भी उनके खिलाफ बोलने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।

क्या नेताओं को SC के विवाद में दखल देना चाहिए?

- यह पूछने पर कि क्या सुप्रीम कोर्ट के विवाद में राजनेताओं को दखल देना चाहिए। सिन्हा ने कहा कि जब 4 जज सबके सामने आकर बोल रहे हैं तो फिर यह कोर्ट का आंतरिक मुद्दा नहीं रहा। हर नागरिक को आवाज उठानी चाहिए। राजनीतिक पार्टियों और संसद को भी लोकतंत्र पर खतरे को भांपना चाहिए।

- बता दें कि शुक्रवार को जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सीपीआईएम नेता डी. राजा ने जस्टिस चेलमेश्वर से मुलाकात की थी। इसके बाद कांग्रेस ने कहा कि जजों के उठाए मुद्दे परेशान करने वाले हैं। जस्टिस बीएच लोया की मौत की जांच सीनियर जज से करानी चाहिए।

बजट सेशन पर क्या बोले सिन्हा?

- विंटर सेशन और बजट सेशन को लेकर सिन्हा ने कहा, ''मैंने कभी इतने छोटे संसद सत्र के बारे में नहीं सुना। यह भी एक तरह से लोकतंत्र पर खतरा है। सरकार के मंत्री डरे हुए हैं, मैं पर्सनली जानता हूं।''
- बता दें कि मोदी सरकार ने 29 जनवरी से 9 फरवरी तक संसद का बजट सेशन बुलाया है। 1 फरवरी को आम बजट पेश होगा। यह सेशन का पहला भाग होगा। इसके बाद अप्रैल में दूसरा भाग शुरू होगा।

लोकतंत्र के 4 स्तंभों का स्वतंत्र होना जरूरी: शिवसेना

- वहीं, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, ''शुक्रवार को जो हुआ बेहद परेशान करने वाला है। चारों जजों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, लेकिन एक बात गौर करने वाली है कि इन्हें यह कदम क्यों उठाना पड़ा। लोकतंत्र के 4 स्तंभों (कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका और पत्रकारिता) का स्वतंत्र होना जरूरी है। अगर वे एक दूसरे पर गिरेंगे तो सब खत्म हो जाएगा।''

सिन्हा ने कई बार सरकार को आड़े हाथों लिया

- बता दें कि पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा मोदी सरकार के जीएसटी और नोटबंदी पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि इससे देश की इकोनॉमी को नुकसान हुआ। उन्होंने कश्मीर मुद्दे को लेकर सरकार की नीतियों को भी कठघरे में खड़ा किया।

- एक आर्टिकल में उन्होंने कहा था, '"इकोनॉमी की हालत खराब है। पिछले दो दशक में प्राइवेट क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट सबसे कम रहा है। जीएसटी को गलत तरीके से लागू किया गया। इससे लाखों लोग बेरोजगार हो गए। इकोनॉमी में पहले से ही गिरावट आ रही थी, नोटबंदी ने तो सिर्फ आग में घी का काम किया।''

- इंटरव्यू में सिन्हा ने दावा किया था कि उन्होंने नरेंद्र मोदी से मुलाकात का वक्त मांगा था, पर नहीं मिला। पीएम के इस बर्ताव से वे बेहद आहत हुए।

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